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जश्ने पंजतन व जश्ने अशरफ़ी में डूबा सदर , नूरानी फिज़ाओं में गूंजा सूफियाना कलाम

रिपोर्ट, अरशद अली कादरी, जबलपुर। शहर की सरज़मीं उस वक्त इमान अफ़रोज़ और रूहानी नूर से जगमगा उठी, जब सदर जामा मस्जिद के सामने जश्ने पंजतन, जश्ने अशरफ़ी, जश्ने अमीरुल औलिया और जश्ने गुल अशरफ़ी का अज़ीम-उश्शान एहतिमाम किया गया। इस बाबरकत महफिल की सरपरस्ती साहिब-ए-कश्फ़ व करामत, सुल्तान-ए-अकबर, गौस-ए-ज़मां, कलंदर-ए-दौरा, फ़कीर-ए-अशरफ़ी, मखदूम सूफ़ी सैयद मोहम्मद अख़्तर हुसैन अशरफ़ गुल अशरफ़ी मोहम्मदी किछौछवी (क़ुद्दस सिर्रहू) ने फ़रमाई।

यह मुक़द्दस आयोजन गौसे किछौछा गुल अशरफ़ी एकेडमी के ज़ेरे-एहतिमाम हुआ, जिसमें शहर ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों से भी बड़ी तादाद में अकीदतमंद, मुरीदीन, मुहिब्बान और आशिक़ाने अहले-बैत शरीक हुए।

✨ मग़रिब के बाद नजरो-नियाज़, इबादत और दुआओं का सिलसिला

कार्यक्रम की शुरुआत नमाज़-ए-मग़रिब के बाद नज़रो-नियाज़ से हुई। अकीदतमंदों ने बड़ी अदब और ख़ुशू के साथ अल्लाह की राह में नियाज़ पेश की और बुज़ुर्गाने दीन की बारगाह में सलाम और फ़ातेहा पढ़ी गई। माहौल इतना नूरानी था कि हर दिल पर अजीब सुकून तारी हो गया।

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लोग हाथ उठाकर दुआ करते हुए अपने मुल्क, शहर और अहलो-अयाल की सलामती के लिए रोते और गिड़गिड़ाते नज़र आए।

🎤 रात भर सजी महफ़िल-ए-सिमा, कव्वाली में डूबा हर दिल

रात करीब 8:30 बजे से शानदार महफ़िल-ए-सिमा का आगाज़ हुआ। हिंदुस्तान के मशहूर-ओ-मक़बूल कव्वाल हाजी उस्ताद सैयद मुकर्रम अली वारसी भोपाली अपने हमनवां के साथ महफिल में पहुंचे।

जैसे ही उन्होंने पहला कलाम छेड़ा, पूरा माहौल “अल्लाह हू… अल्लाह हू…” की सदाओं से गूंज उठा। उनके पेश किए गए सूफियाना कलाम जैसे—

  • “भर दो झोली मेरी या मोहम्मद”
  • “दमादम मस्त कलंदर”
  • “यह तो बाबा का करम है”

इन कलामों ने महफिल को रूहानियत की ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया। बुजुर्ग, नौजवान, बच्चे और अकीदतमंद झूमते, आंखों से आँसू बहाते और दिल से अल्लाह का ज़िक्र करते नज़र आए।

🌅 फज्र के बाद सलातो सलाम और तबर्रुक का एहतराम

रात भर चली इस रूहानी महफिल के बाद सुबह नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद सलातो सलाम और फ़ातेहा का एहतिमाम किया गया। इसके बाद तकरीबन सभी हाज़िरीन में तबर्रुक तकसीम किया गया।

मुरीदीन ने कहा कि ऐसी महफिलें दिलों को जोड़ने का काम करती हैं और इंसान को अल्लाह के करीब ले जाती हैं।

🤲 अमन, भाईचारे और मुल्क की तरक्की की दुआ

आख़िर में एक ख़ास दुआ का एहतिमाम किया गया, जिसमें मुल्क में अमन-ओ-सुकून, आपसी भाईचारे, नफ़रतों के खात्मे और इंसानियत की कामयाबी की दुआ मांगी गई।

गौसे किछौछा गुल अशरफ़ी एकेडमी की जानिब से तमाम हाज़िरीन, मुरीदीन, खिदमतगुज़ारों और शहरवासियों का दिल से शुक्रिया अदा किया गया। उन्होंने कहा कि आपकी मौजूदगी से यह जश्न कामयाब और यादगार बन पाया।

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