
यह इश्क नहीं आसान की तर्ज पर जारी अंकिता राठौर और हसनैन के संघर्ष को उस समय बड़ा झटका लगा, जब जबलपुर अपर कलेक्टर एवं विवाह अधिकारी कोर्ट ने इस शादी के लिए प्रस्तुत आवेदन को खारिज कर दिया है। यह मामला पिछले कुछ महीनों से मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ था, खासकर हिंदूवादी संगठनों के लगातार विरोध प्रदर्शन और लड़की के परिवार की ओर से विरोध जताए जाने के बाद।
हालांकी अंकिता और हसनैन इस मामले में पहले दिन से साथ खड़े हैं और अपने शादी को अपना निजी अधिकार बताते हुये संघर्ष कर रहे हैं. जिससे यह संभावना जताई जा रही है कि वे अब इस मामले में प्रशासनिक आदेश के खिलाफ दोबारा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं.
आदेश में क्या कहा गया..
अपर कलेक्टर एवं विवाह अधिकारी कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत किए गए जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह पाया गया कि आवेदक हसनैन अंसारी पिछले 10 वर्षों से जिला जबलपुर के बाहर रहकर इंदौर में नौकरी कर रहे हैं। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि हसनैन अंसारी ने मौजा सिहोरा, जिला जबलपुर में विवाह की सूचना देने की तारीख से पहले पिछले तीस दिन में यहां निवास नहीं किया है। विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह आवेदन केवल उन्हीं व्यक्तियों के लिए वैध होते हैं, जो संबंधित क्षेत्र में कम से कम 30 दिन से निवास कर रहे हों। अतः इस मामले में, आवेदन पत्र विशेष विवाह अधिनियम के तहत विचारणीय नहीं होने के कारण, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
लम्बे समय से चल रहा विवाद..
इस मामले की शुरुआत 12 नवंबर 2024 को हुई थी, जब अंकिता राठौर (जो इंदौर की निवासी हैं) और हसनैन अंसारी (जो जबलपुर के सिहोरा इलाके के रहने वाले हैं) ने जबलपुर कलेक्ट्रेट में शादी के लिए आवेदन किया था। इस आवेदन के बाद, हिंदूवादी संगठनों और अंकिता के परिवार ने इस शादी का विरोध करना शुरू कर दिया था, जिसके बाद विवाद और बढ़ गया।
4 अक्टूबर 2024 को इस शादी के लिए अनुमति देने की याचिका दायर की गई, और 7 अक्टूबर 2024 को आवेदन किया गया। 12 नवंबर 2024 को शादी के आवेदन की तारीख तय की गई, लेकिन इससे पहले ही 16 अक्टूबर को इस शादी का नोटिस वायरल हुआ। इसके तुरंत बाद, अंकिता के परिवार ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी।
20 अक्टूबर 2024 को, हैदराबाद के विधायक राजा ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने इस शादी का विरोध करते हुए धमकी दी थी। विधायक ने बयान में कहा था कि अगर यह शादी हुई तो इसके गंभीर परिणाम होंगे, और उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इस मामले की पुनः जांच करने की अपील की थी।
अब जबलपुर अपर कलेक्टर एवं विवाह अधिकारी कोर्ट का यह फैसला इस मामले में एक नया मोड़ लाता है। कोर्ट के आदेश से यह स्पष्ट हो गया है कि विवाह अधिनियम के तहत वैध विवाह के लिए आवश्यक शर्तों का पालन नहीं किया गया, जिसके चलते इस शादी का आवेदन खारिज कर दिया गया। अब सबकी नजर अंकिता हसनैन के अगले कदम की तरफ है.

