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(मध्य प्रदेश) धार भोजशाला: सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला — बसंत पंचमी पर पूजा भी, जुमे की नमाज भी, शांति की राह

नई दिल्ली (ईएमएस)। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 23 जनवरी को होने वाली बसंत पंचमी और जुमे की नमाज को लेकर अहम फैसला सुनाया है। शीर्ष अदालत ने एक संतुलित व्यवस्था अपनाते हुए कहा है कि बसंत पंचमी के दिन हिंदू समाज दोपहर 12 बजे तक पूजा कर सकेगा, इसके बाद जुमे की नमाज अदा की जाएगी और शाम 4 बजे से पुनः हिंदू समाज को पूजा की अनुमति दी जाएगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि नमाज के बाद पूजा पर कोई रोक नहीं होगी

इस फैसले को धार्मिक स्वतंत्रता और साम्प्रदायिक सौहार्द के बीच संतुलन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करना जरूरी है और किसी भी तरह की गलतफहमी या तनाव को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट का संतुलित फैसला: दोनों समुदायों को समान अधिकार

बसंत पंचमी के दिन अखंड सरस्वती पूजा की मांग को लेकर हिंदू पक्ष ने 20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका पर 22 जनवरी को सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों को ध्यान में रखते हुए समय विभाजन ही सबसे उचित समाधान है

हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन और हरिशंकर जैन ने दलील दी कि 23 जनवरी को बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ रहे हैं, इसलिए हिंदू समाज को दिनभर पूजा की अनुमति दी जाए और जुमे की नमाज पर रोक लगाई जाए। लेकिन अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि किसी भी समुदाय को धार्मिक अभ्यास से वंचित नहीं किया जा सकता, इसलिए समय विभाजन का निर्णय लिया गया।

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सुरक्षा व्यवस्था सख्त, शांति के लिए प्रशासन पूरी तरह सजग

भोजशाला परिसर में पूजा और नमाज को लेकर पहले भी तनाव की स्थितियां बन चुकी हैं। 2006, 2013 और 2016 में भी जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी, तब विवाद के हालात बने थे। इसलिए इस बार प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो और दोनों समुदाय शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने धार्मिक कर्तव्य निभा सकें।

  • भोजशाला परिसर और आसपास के क्षेत्रों में 24 घंटे पुलिस तैनाती
  • वॉच टावर और अतिरिक्त चौकियां
  • जिग-जैग बैरिकेडिंग के माध्यम से नियंत्रित प्रवेश
  • 8 हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती, जिसमें से 50% बल पहले से मौजूद
  • CCTV, ड्रोन कैमरे और AI तकनीक से निगरानी
  • थ्रीडी मैपिंग, बाइक और मोबाइल पार्टियां
  • 300 मीटर के दायरे को नो-फ्लाई जोन घोषित
  • ड्रोन, UAV, पैराग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलून पर प्रतिबंध
  • भारी वाहनों के लिए डायवर्जन प्लान और शहर के भीतर वैकल्पिक मार्ग

इंदौर रेंज के आईजी अनुराग सिंह ने बताया कि ये सभी व्यवस्थाएं शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए की गई हैं। उनका कहना है कि प्रशासन का उद्देश्य है कि दोनों समुदाय अपने-अपने धार्मिक कार्य निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कर सकें।


समाज में शांति का संदेश: “भिन्नता में भी एकता”

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल धार्मिक अधिकारों का सम्मान करता है, बल्कि यह एक सामाजिक संदेश भी है कि विवाद और तनाव की जगह समन्वय और सहिष्णुता को महत्व देना चाहिए।

यह फैसला यह दिखाता है कि भारत में विभिन्न धर्मों के लोग एक ही जगह पर अपने-अपने धार्मिक कर्तव्य निभा सकते हैं, बशर्ते समाज और प्रशासन शांति बनाए रखने के लिए एक साथ काम करें।


सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भोजशाला में पूजा और नमाज की व्यवस्था शांति से होने की उम्मीद है। प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर जो तैयारियाँ की हैं, वे यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि बसंत पंचमी के दिन पूजा-अर्चना और जुमे की नमाज दोनों शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हों

यह समय है कि सभी समुदाय धर्म के नाम पर नफरत नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अधिकारों का सम्मान करें और साम्प्रदायिक सौहार्द को मजबूत बनाएं।

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