नगर निगम में मेहनत गरीब की, पैसा ठेकेदार का.. । जनसुनवाई कक्ष में धरने पर बैठे विनय सक्सेना

जबलपुर | बाज मीडिया । जबलपुर नगर निगम में ठेका सफाई कर्मियों और आउटसोर्स कर्मचारियों के कथित शोषण का मुद्दा अब खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार को पूर्व विधायक विनय सक्सेना अपने समर्थकों के साथ नगर निगम पहुँचे और सीधे जनसुनवाई कक्ष में धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक कर्मचारियों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
“मेहनत हमारी, फायदा किसी और का” — कर्मचारियों की पीड़ा
नगर निगम में काम कर रहे सफाई कर्मियों का आरोप है कि वे रोजाना कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन उन्हें ना तो तय वेतन मिल रहा है और ना ही बुनियादी सुविधाएं।
विनय सक्सेना ने आरोप लगाया कि अफसरों और ठेकेदारों की मिलीभगत से कर्मचारियों का आर्थिक, सामाजिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है।
श्री सक्सेना बताया कि:
- कर्मचारियों को सरकारी गाइडलाइन के अनुसार मजदूरी नहीं मिल रही
- सिर्फ ₹250 प्रतिदिन दिए जा रहे हैं
- PF और ESIC जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रहीं
- काम के लिए जरूरी सामान (झाड़ू, मास्क, ग्लव्स, जूते) भी पर्याप्त नहीं दिए जाते

ठेकेदार पर गंभीर आरोप
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि नगर निगम से ठेकेदार को 30 दिनों का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन कर्मचारियों को सिर्फ 26 दिनों का ही वेतन दिया जा रहा है।
यानी बीच के 4 दिनों की रकम कहाँ जा रही है — यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
गढ़ा क्षेत्र का एक मामला सामने आया, जहाँ एक युवक पिछले डेढ़ साल से कर्मचारियों की मजदूरी के लिए अधिकारियों के चक्कर काट रहा है, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ।
जनसुनवाई कक्ष बना आंदोलन का केंद्र
विनय सक्सेना ने जनसुनवाई कक्ष में ही धरना शुरू कर दिया और कहा कि:
“जब तक ठेका कर्मचारियों को इंसाफ नहीं मिलेगा, हम यहां से नहीं हटेंगे।”
उन्होंने वीडियो और लिखित शिकायत के जरिए पूरे मामले को सार्वजनिक किया और निगम प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनाया।
निगम प्रशासन ने मानी शिकायतें
इस पूरे घटनाक्रम के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया।
सक्सेना के अनुसार, प्रशासन ने शिकायतों को प्राथमिक रूप से सही माना है और तीन दिन के भीतर जांच पूरी करने का आश्वासन दिया है।
चेतावनी: अब आंदोलन बढ़ेगा
विनय सक्सेना ने चेतावनी दी कि अगर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुद्दा सिर्फ जबलपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि:
- भोपाल
- दिल्ली
तक उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मजदूरी का मामला नहीं है, बल्कि गरीब कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी
इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से: वरिष्ठ कांग्रेस नेता गुड्डू नबी उस्मानी, राजेंद्र सराफ, संजय उपाध्याय, गोविंद पटेल, संतोष कश्यप, अलीम खान, यू.डी. आकाश तिवारी, रंजीत, केशव कोरी, राकेश चौधरी, दिलीप चमकेले, सुभाष धर, एडवोकेट मोहम्मद अली, अरविंद तिवारी, कलीम खान, जाकिर खान, अमित नामदेव सहित कई पार्षद शामिल रहे।
बाज मीडिया विश्लेषण
जबलपुर में यह मामला सिर्फ सफाई कर्मियों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है।
अगर नगर निगम जैसी संस्था में ही मजदूरों का शोषण हो रहा है, तो यह प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा सवाल है।
👉 अब देखना यह होगा कि:
- 3 दिन में जांच सच में पूरी होती है या नहीं
- दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है
आपकी राय क्या है?
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