Advertisement
NationalNews

ईद-उल-अजहा के दिन CUET-UG परीक्षा कराने पर उठा विवाद, SIO ने NTA से तारीख बदलने की मांग की

नई दिल्ली। देशभर के लाखों छात्रों के लिए आयोजित होने वाली कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) 2026 की परीक्षा को लेकर नया विवाद सामने आया है। स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (SIO) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से 28 मई को निर्धारित परीक्षा को पुनर्निर्धारित करने की मांग की है, क्योंकि उसी दिन ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया जाएगा।

SIO ने बुधवार को NTA के महानिदेशक को पत्र लिखकर कहा कि धार्मिक पर्व के दिन परीक्षा आयोजित होने से बड़ी संख्या में छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। संगठन के राष्ट्रीय सचिव रोशन मोहिद्दीन ने अपने पत्र में कहा कि कई परीक्षार्थियों के परीक्षा केंद्र दूर-दराज के शहरों में हैं, ऐसे में यात्रा, ठहरने और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने में कठिनाई आएगी।

विज्ञापन

पत्र में यह भी कहा गया कि NTA एक राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी है, जो विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए परीक्षाएं आयोजित करती है। ऐसे में सभी समुदायों की भावनाओं और सुविधाओं का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि परीक्षा प्रक्रिया में समान अवसर और निष्पक्षता बनी रहे।

गौरतलब है कि CUET-UG 2026 की परीक्षा 11 मई से शुरू हुई है और 21 दिनों की अवधि में कुल 35 शिफ्टों में आयोजित की जा रही है। इस वर्ष करीब 15 लाख 68 हजार 866 छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है। यह परीक्षा देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों सहित राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है।

विज्ञापन

इधर, फ्रेटरनिटी मूवमेंट ने भी दिल्ली विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपकर 28 मई की परीक्षा स्थगित करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि ईद-उल-अजहा पूरे देश में राजपत्रित अवकाश है, इसलिए छात्रों की सुविधा को देखते हुए परीक्षा की नई तारीख घोषित की जानी चाहिए।

इस बीच, तेलंगाना की उस्मानिया यूनिवर्सिटी ने राज्य सरकार द्वारा घोषित अवकाश के मद्देनजर 27 मई की परीक्षाएं पहले ही रद्द कर दी हैं। इससे छात्रों और संगठनों को उम्मीद है कि NTA भी इस मामले पर सकारात्मक निर्णय ले सकती है।

छात्र संगठनों का कहना है कि धार्मिक त्योहारों के दौरान परीक्षाएं आयोजित होने से छात्रों पर मानसिक दबाव बढ़ता है और कई बार वे अपने धार्मिक कर्तव्यों तथा परीक्षा के बीच संतुलन नहीं बना पाते। अब सभी की नजर NTA के फैसले पर टिकी हुई है।

विज्ञापन
Back to top button

You cannot copy content of this page