
कोलकाता। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने एक बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि जो लोग CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के दायरे में नहीं आते, उन्हें घुसपैठिया माना जाएगा और उन्हें देश से बाहर भेजा जाएगा। यह बात उन्होंने नबान्ना में बांग्लादेश बॉर्डर की फेंसिंग के लिए जमीन सौंपने के एक कार्यक्रम में कही।
🔍 क्या है “ढूंढो, हटाओ, भेजो” नीति?
सुवेंदु अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार अब “Detect, Delete and Deport” यानी “ढूंढो, हटाओ, वापस भेजो” नीति लागू कर रही है। इसके तहत:
🔵 दूसरा कदम: पुलिस उन्हें गिरफ्तार करके BSF (सीमा सुरक्षा बल) को सौंपेगी
🔵 तीसरा कदम: BSF, बांग्लादेश के BGB (बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश) से बात करके उन्हें वापस भेजेगी
मुख्यमंत्री ने कहा — “हम अब इस कानून को पश्चिम बंगाल में लागू कर रहे हैं। जो CAA के दायरे में नहीं आते, उन्हें अवैध घुसपैठिया माना जाएगा।”
✅ CAA के तहत किन्हें मिलेगी छूट?
अधिकारी ने साफ किया कि CAA के तहत आने वाले लोगों को परेशान नहीं किया जाएगा। CAA के अनुसार 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आए इन धर्मों के लोग सुरक्षित हैं:
✅ सिख
✅ बौद्ध
✅ जैन
✅ पारसी
✅ ईसाई
(अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश से आए इन समुदायों के लोग)
उन्होंने कहा — “जो लोग CAA के तहत आते हैं, उन्हें न परेशान किया जाएगा, न पकड़ा जाएगा।”
लेकिन जो इस दायरे में नहीं आते — यानी जो मुसलमान हैं या जो तय तारीख के बाद आए हैं — उन्हें घुसपैठिया मानकर वापस भेजा जाएगा।
🌾 75 एकड़ जमीन BSF को सौंपी
इस कार्यक्रम में राज्य सरकार ने BSF को करीब 75 एकड़ जमीन सौंपी। यह जमीन भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर 27 किलोमीटर की फेंसिंग के लिए दी गई है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पश्चिम बंगाल की 2,200 किलोमीटर बांग्लादेश से सटी सीमा है। इसमें से करीब 1,600 किलोमीटर पर फेंसिंग हो चुकी है, लेकिन अभी भी 600 किलोमीटर बाकी है।
✅ फेंसिंग हो चुकी: 1,600 किमी
⏳ अभी बाकी: 600 किमी
🌾 BSF को दी गई जमीन: 75 एकड़
📍 फेंसिंग होगी: 27 किमी में
👮 पुलिस और BSF मिलकर करेंगे काम
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि यह नई व्यवस्था सभी सीमावर्ती थाना क्षेत्रों में लागू की जाएगी। इसके लिए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को निर्देश दे दिए गए हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने 14 मई 2024 को इस बारे में दिशानिर्देश जारी किए थे, लेकिन पिछली राज्य सरकार ने उन्हें लागू नहीं किया। उन्होंने कहा — “अगर जमीन पहले मिल जाती तो सैकड़ों किलोमीटर की फेंसिंग पहले ही हो जाती।”
⚠️ विवाद और सवाल
इस नीति से राजनीतिक बहस तेज होने की आशंका है। विरोधी दलों का कहना है कि यह नीति सीधे तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाती है, क्योंकि CAA में मुसलमानों को शामिल नहीं किया गया है।
साथ ही यह सवाल भी उठ रहे हैं कि लंबे समय से बंगाल में रह रहे लोगों की पहचान कैसे होगी और क्या कोई गलती से पकड़ा जाएगा।
👤 किसने कहा: सुवेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल
📅 कब: 21 मई 2026
📍 कहां: नबान्ना, कोलकाता
📋 नीति: “ढूंढो, हटाओ, भेजो” (Detect, Delete, Deport)
✅ सुरक्षित: CAA के दायरे में आने वाले 6 धर्मों के लोग
❌ निशाने पर: CAA से बाहर रहने वाले — जो वापस भेजे जाएंगे
🌾 जमीन: 75 एकड़ BSF को दी
— रिपोर्ट: BazMedia.in | दिनांक: 21 मई 2026



