BAZ World: मलबों, भूख और मातम के बीच ग़ज़ा में तीसरी ईद: न कुर्बानी हुई, न खुशियां लौटीं, बच्चों ने कब्रों पर पढ़ी फातिहा

BAZ News Network: ग़ज़ा पट्टी में फिलिस्तीनियों ने लगातार तीसरे साल ईद-उल-अज़हा ऐसे हालात में मनाई, जहां हर तरफ तबाही, भूख, विस्थापन और मौत का मंजर दिखाई दे रहा है। इजरायली हमलों और लंबे समय से जारी घेराबंदी के कारण इस बार भी लाखों परिवार ईद की बुनियादी रस्में तक पूरी नहीं कर सके। कई इलाकों में न कुर्बानी के जानवर मौजूद थे और न ही लोगों के पास उन्हें खरीदने की ताकत बची है।
ईद-उल-अज़हा इस्लाम में हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी और अल्लाह के हुक्म के प्रति उनकी आज्ञाकारिता की याद में मनाया जाता है। लेकिन ग़ज़ा में इस बार यह त्योहार खुशियों के बजाय दर्द, मातम और बेबसी का प्रतीक बन गया।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों के मुताबिक अक्टूबर 2023 से जारी हमलों में ग़ज़ा के 90 प्रतिशत से ज्यादा पशुपालन फार्म तबाह या क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। इजरायल द्वारा जीवित जानवरों की एंट्री पर सख्त पाबंदियों ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। बाजारों में बेहद कम संख्या में जानवर उपलब्ध हैं और उनकी कीमतें आम लोगों की पहुंच से कई गुना बाहर जा चुकी हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, जो भेड़ पहले कुछ सौ डॉलर में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत हजारों डॉलर तक पहुंच गई है। ऐसे में अधिकांश परिवारों के लिए कुर्बानी करना असंभव हो गया है। कई परिवार तो दो वक्त का खाना जुटाने के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। ग़ज़ा के कई हिस्सों में अकाल जैसे हालात पैदा हो चुके हैं।
ईद की नमाज़ भी इस बार मस्जिदों के बजाय मलबों और टूटी सड़कों के बीच अदा की गई। सैकड़ों फिलिस्तीनी ध्वस्त इमारतों और खंडहरों के पास जानमाज़ बिछाकर सजदे में झुकते नजर आए। कहीं आधी टूटी मस्जिदों के बाहर नमाज़ पढ़ी गई तो कहीं खुले आसमान के नीचे लोग अल्लाह से अमन और राहत की दुआ करते रहे।
सबसे दर्दनाक दृश्य तब सामने आए जब ग़ज़ा के बच्चे अपने उन मां-बाप की कब्रों पर पहुंचे, जो इजरायली हवाई हमलों में मारे गए थे। कई बच्चे कब्रों से लिपटकर रोते रहे और फातिहा पढ़ते नजर आए। जहां कभी ईद पर घरों में रौनक, बाजारों में चहल-पहल और बच्चों की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब सिर्फ मलबा, धूल और सन्नाटा बचा है।
जारी बमबारी और विस्थापन ने ग़ज़ा की पारंपरिक ईद की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। हजारों परिवार राहत शिविरों में जिंदगी गुजार रहे हैं। ईद के दिन भी कई इलाकों में हमले जारी रहे। फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी WAFA के अनुसार, ग़ज़ा सिटी के पश्चिमी हिस्से में एक रिहायशी इमारत पर इजरायली हवाई हमले में एक महिला समेत चार लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हो गए। बताया गया कि अल-कंज मस्जिद के पास स्थित इमारत पर कई मिसाइलें दागी गईं।
दूसरी ओर, हजारों फिलिस्तीनी कैदी भी इजरायली जेलों में अपने परिवारों से दूर बेहद कठिन परिस्थितियों में ईद मना रहे हैं। वहीं यरुशलम स्थित Al-Aqsa Mosque में भी भारी प्रतिबंधों के बीच फिलिस्तीनियों ने ईद की नमाज़ अदा की।
अपने ईद संदेश में Hamas ने कहा कि यह ईद ग़ज़ा में जारी “भूख, घेराबंदी और नरसंहार” के माहौल में आई है। संगठन ने आरोप लगाया कि इजरायल लगातार मानवीय सहायता को रोक रहा है, बॉर्डर क्रॉसिंग बंद कर रहा है और फिलिस्तीनियों व पवित्र स्थलों पर हमले तेज कर रहा है।
हमास ने अरब और मुस्लिम दुनिया से ग़ज़ा के समर्थन में आवाज उठाने और घेराबंदी खत्म कराने की अपील की। संगठन ने कहा, “हम ग़ज़ा, वेस्ट बैंक, यरुशलम और दुनिया भर में मौजूद अपने लोगों के साथ खड़े हैं, जो दर्द और हमलों के बावजूद ईद मनाने की कोशिश कर रहे हैं।”
फिलिस्तीनी स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 के बाद से इजरायली हमलों में 72,800 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। ग़ज़ा स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि तथाकथित युद्धविराम लागू होने के बाद भी कम से कम 906 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। लगातार जारी हिंसा के बीच ग़ज़ा में इस बार की ईद खुशियों से ज्यादा इंसानी त्रासदी और संघर्ष की कहानी बनकर रह गई।



