
जबलपुर | BAZ Media Jabalpur Division । हज़रत इमाम हुसैन की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम पर्व की तैयारियां संस्कारधानी में जोर पकड़ चुकी हैं। मुस्लिम बहुल इलाकों में शहीदी कलाम गूंजने लगे हैं। इमामबाड़ों में रंग-रोगन और सजावट का काम तेज हो गया है।
News in Short
- 16 जून को मुहर्रम का चांद दिखने की उम्मीद, हिजरी सन 1448 शुरू होगा
- नालबंद, गोहलपुर, रजा चौक सहित कई इलाकों में शहीदी कलाम की गूंज
- 150-200 साल पुरानी सवारियों की परंपरा, फूल-मखाने से बनती हैं
- शिया समुदाय इमामबाड़ों में 10 दिन तक मजलिसों का आयोजन करेगा
- मदन महल दरगाह रोड पर पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग
16 जून को दिख सकता है चांद
मुफ्ती-ए-आज़म मध्यप्रदेश हज़रत मौलाना मुशाहिद रज़ा क़ादरी बुरहानी के मुताबिक 16 जून यानी 29 जिलहिज्जा को मुहर्रम का चांद नजर आ सकता है। शाम मगरिब के वक्त चांद देखने की कोशिश करने की अपील की गई है। चांद नजर आते ही मौलाना साहब के नंबर 9302256729, 9303899999, 8889186720 पर फौरन इत्तिला देने को कहा गया है। इसके साथ ही इस्लामी नववर्ष हिजरी सन 1448 का आगाज़ भी होगा।
कौमी एकता की मिसाल है जबलपुर का मुहर्रम
जबलपुर में मुहर्रम सिर्फ मुस्लिम पर्व नहीं है। यहां हिंदू और दूसरे धर्मों के लोग भी अकीदत के साथ शामिल होते हैं। नालबंद मोहल्ला, मोतीनाला, चारखम्बा, गोहलपुर, मंडी मदार टेकरी, आनंद नगर, रजा चौक, ठक्कर ग्राम, फूटाताल, ओमती, नया मोहल्ला, सदर, गढ़ा और रांझी में शहीदी कलामों की गूंज सुनाई दे रही है।
मुहर्रम का सबसे बड़ा आकर्षण ताजिए और कलात्मक सवारियां हैं। हज़रत इमाम हुसैन के रोज़ा-ए-मुबारक की नुमाइंदगी करने वाली ये झांकियां बेहद खूबसूरती से तैयार की जाती हैं। शहर में सवारियों की परंपरा 150 से 200 साल पुरानी है। सदर से शुरू हुई ये परंपरा अब पूरे शहर में फैल चुकी है। गढ़ा के पुराने मुजावर आज भी फूल और मखाने से पारंपरिक सवारियां तैयार करते हैं।
इमामबाड़ों में 10 दिन तक मजलिसें
शिया समुदाय दस दिन तक इमामबाड़ों में सुबह से रात तक मजलिसें आयोजित करेगा। गलगला स्थित जैदी विला और जाहिद हुसैन इमामबाड़े में जनानी मजलिस होगी। इमामिया हॉल में रात की मजलिसें होंगी जहां मौलाना कर्बला की वाकियात का बयान देंगे। शिया नौजवान भी पूरे उत्साह से तैयारियों में जुटे हैं।
इमामबाड़ों में रंग-रोगन, साज-सज्जा और बिजली की सजावट का काम जारी है। मदन महल पहाड़ी पर हज़रत पीराने पीर की दरगाह और जिन्नाती मस्जिद में भी शाम के बाद अकीदतमंदों की आवाजाही बढ़ गई है।
मुस्लिम इस्लाह कमेटी के पदाधिकारियों ने प्रशासन से मदन महल दरगाह रोड और कचहरी दरगाह पर पुलिस गश्त बढ़ाने की मांग की है। हाजी क़दीर सोनी, सरदार हामिद हुसैन, हाजी मक़बूल अहमद रज़वी सहित कई गणमान्य नागरिकों ने शांति और सुरक्षा बनाए रखने की अपील की है।
📌 Sources & References
- स्थानीय रिपोर्टिंग
- मुफ्ती मुशाहिद रज़ा क़ादरी बुरहानी
- मुस्लिम इस्लाह कमेटी



