
जबलपुर | BAZ Media Jabalpur Division । समान नागरिक संहिता को लेकर प्रदेश में विरोध तेज हो गया है। आज सद्भावना मंच ने घंटाघर में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अल्पसंख्यकों को इस कानून से बाहर रखने की मांग की। मंच ने धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप को संविधान के खिलाफ बताया।
News in Short
- सद्भावना मंच ने घंटाघर में कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा
- अल्पसंख्यकों को कानून से बाहर रखने की मांग
- बहुजन मुक्ति मोर्चा समेत कई संगठन शामिल
- पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप न करने की अपील
- 11 बिंदुओं पर आपत्तियां दर्ज कराईं
समान नागरिक संहिता विरोध में संयुक्त मोर्चा
सद्भावना मंच के इस विरोध प्रदर्शन में बहुजन मुक्ति मोर्चा, बुद्धिस्ट इंटरनेशनल फोरम, भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा भी शामिल रहे। मंच ने प्रदेश सरकार से साफ शब्दों में कहा कि अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप न किया जाए। जबरन कोई भी कानून न थोपा जाए।
ड्राफ्ट कमेटी को 11 बिंदुओं पर आधारित आपत्तियां और सुझाव दिए गए। मंच ने बताया कि यह कानून संविधान के मौलिक अधिकार यानी धार्मिक स्वतंत्रता से सीधे टकराता है। सभी धर्मों की आस्था और धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।
मुख्य मांगें
सद्भावना मंच ने छह प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग में कहा गया कि जिस तरह मध्यप्रदेश में आदिवासी जनजाति समुदाय को इस कानून से बाहर रखा गया है, उसी तरह प्रदेश के अल्पसंख्यकों को भी बाहर रखा जाए। अल्पसंख्यक समुदाय को उसकी आस्था और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर मिले पर्सनल लॉ को खत्म न किया जाए।
मंच ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा की मांग की जो संविधान ने दी है। कहा कि किसी भी कानून को उनकी मर्जी के बिना थोपा न जाए। धार्मिक आस्था और मान्यताओं के अनुसार अपने सिविल कानूनों का पालन करने की छूट दी जाए। पर्सनल लॉ में किसी भी तरह का हस्तक्षेप न किया जाए।
बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद
इस ज्ञापन के मौके पर बड़ी तादाद में सद्भावना मंच के सदस्य मौजूद रहे। इनमें अध्यक्ष एडवोकेट ओपी यादव, सचिव शकील अहमद, घनश्याम यादव, अमित पांडे, भावना दीक्षित, अंजना कुररिया, दलबीर सिंह, गुरमीत सिंह, गुलाम रसूल, अतुल जोसफ, मोहम्मद मेहदी, रामराज पटेल, प्रवीण गजविए, चंद्रशेखर टुडे, राहुल बोध, मधुसूदन पटेल, संजय बोध और रमन पटेल शामिल थे।
सद्भावना मंच का यह विरोध प्रदेश में समान नागरिक संहिता को लेकर बढ़ते तनाव का संकेत है। धार्मिक स्वतंत्रता और पर्सनल लॉ के मुद्दे पर सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
📌 Sources & References
- सद्भावना मंच जबलपुर
- शकील अहमद (सचिव)



