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BAZ WORLD: लेबनान में इज़राइली फौज पर लाखों नागरिकों को जबरन बेदखल करने का आरोप । एमनेस्टी ने कहा – जंगी जुर्म

बेरूत | BAZ News Network (BNN) । लेबनान में इज़राइली फौज पर लाखों नागरिकों को जबरन बेदखल करने का गंभीर आरोप लगा है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने मंगलवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि इज़राइल की ‘सभी को निकलो’ वाली पॉलिसी जंगी जुर्म की श्रेणी में आती है। संगठन का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सीधा उल्लंघन है।

News in Short

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  • एमनेस्टी ने इज़राइल पर लेबनान में लाखों नागरिकों को जबरन बेदखल करने का आरोप लगाया
  • संगठन ने कहा कि ‘वापस मत आओ’ के आदेश जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन हैं
  • 2026 में इज़राइल ने 135 बार बड़े पैमाने पर खाली करने के आदेश जारी किए
  • दक्षिणी लेबनान में हजारों घर और बुनियादी ढांचे तबाह किए गए
  • 10 लाख से ज्यादा लोग अब भी बेघर हैं, मार्च से 3700 से ज्यादा मारे गए

लेबनान में इज़राइल की ‘सभी निकलो’ पॉलिसी

एमनेस्टी की रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइली फौज ने 2026 में लेबनान में अपनी कार्रवाई बढ़ा दी। संगठन ने आरोप लगाया कि इज़राइल ने बड़े पैमाने पर ‘सभी को निकलो’ के आदेश जारी किए। इससे हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े। इतना ही नहीं, जंग खत्म होने के बाद भी लोगों को वापस लौटने नहीं दिया गया।

क्रिस्टिन बेकरले, एमनेस्टी की मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका की डिप्टी रीजनल डायरेक्टर ने कहा, “पिछले ढाई साल से इज़राइल और हिजबुल्लाह के बीच जंग ने नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इज़राइल ने बार-बार व्यापक खाली करने के आदेश दिए, जिससे लाखों लोग बेघर हुए। उन्हें न तो सुरक्षा दी गई और न ही यह बताया गया कि वे कहां जाएं।”

‘वापस मत आओ’ के आदेश — जिनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन

एमनेस्टी का कहना है कि इज़राइली फौज ने कई इलाकों को खाली कराने के बाद ‘वापस मत आओ’ के आदेश जारी किए। इन आदेशों ने दक्षिणी लेबनान के गांवों के रहवासियों को अपने घरों में लौटने से रोक दिया। संगठन ने कहा कि दसियों हजार नागरिक अब भी इज़राइली पाबंदियों और फौजी मौजूदगी की वजह से अपने घर नहीं लौट सके हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इज़राइल ने 2026 में ‘नो-रिटर्न ज़ोन’ का दायरा काफी बढ़ा दिया। नवंबर 2024 में जारी नक्शे में लेबनान के लगभग 4.6% इलाके को कवर किया गया था। अप्रैल 2026 में जारी संशोधित नक्शे में यह दायरा बढ़कर 6% हो गया। इस इलाके को ‘फॉरवर्ड डिफेंस’ ज़ोन घोषित कर दिया गया। एमनेस्टी का कहना है कि इस इलाके में पहले दसियों हजार नागरिक रहते थे।

सैटेलाइट तस्वीरों में दिखी तबाही

एमनेस्टी ने आरोप लगाया कि इज़राइली फौज ने इन इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। संगठन ने सैटेलाइट तस्वीरों का विश्लेषण किया। इन तस्वीरों में बॉर्डर के पास की बस्तियों में घरों और नागरिक बुनियादी ढांचे का व्यापक विनाश दिखा। कई गांव तो लगभग पूरी तरह मिट्टी में मिला दिए गए।

एमनेस्टी की जांच 19 लोगों के इंटरव्यू पर आधारित है। इनमें वे लोग शामिल हैं जो खाली कराए गए इलाकों से बेघर हुए। संगठन ने सितंबर 2024 से मई 2026 के बीच इज़राइली फौज द्वारा जारी 447 नोटिसों का भी विश्लेषण किया। रिपोर्ट में पाया गया कि अकेले 2026 में 135 बार बड़े पैमाने पर खाली करने के आदेश जारी किए गए। 2024 की जंग में यह संख्या सिर्फ 36 थी।

इज़राइल का जवाब और तथ्य

इज़राइली फौज ने एमनेस्टी के आरोपों को खारिज कर दिया। उसने संगठन से कहा कि वह अनिवार्य खाली करने के आदेश जारी नहीं करती, बल्कि नागरिकों को ‘एडवांस वॉर्निंग’ देती है। उसने यह भी दावा किया कि लेबनानी नागरिकों को अपने घर लौटने से नहीं रोका जा रहा।

लेकिन एमनेस्टी ने कहा कि फौज की कार्रवाई और इज़राइली अधिकारियों के बयान इन दावों का खंडन करते हैं। रिपोर्ट में इज़राइली रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ के बयान का हवाला दिया गया। उन्होंने कहा था कि इज़राइली फौज लेबनान, सीरिया और गाजा में ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में “बिना किसी समय सीमा के” रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इन इलाकों को रहवासियों और आतंकवादी समूहों से जुड़े बुनियादी ढांचे से साफ किया जाएगा।

10 लाख लोग अब भी बेघर

लेबनानी सामाजिक मामलों के मंत्रालय के मुताबिक, 7 जून तक 10 लाख से ज्यादा लोग बेघर थे। मार्च 2026 से लेबनान में जंग तेज होने के बाद से 3700 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। यह आंकड़े लेबनानी स्वास्थ्य अधिकारियों ने जारी किए हैं।

सीज़फायर और अमेरिका-ईरान समझौते के बावजूद इज़राइली फौज ने दक्षिणी लेबनान में चार लोगों को मार डाला। ईरान ने आरोप लगाया है कि इज़राइल ने समझौते के बाद से 84 बार सीज़फायर का उल्लंघन किया है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो वह “कड़ा जवाब” देगा।

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि वाशिंगटन के साथ किसी भी अंतिम समझौते में प्रतिबंधों में राहत, जमे हुए ईरानी संपत्तियों की रिहाई और लेबनान से इज़राइली फौज की वापसी शामिल होनी चाहिए।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांग की है कि वह स्थायी सीज़फायर के लिए दबाव बनाए, इज़राइल पर लेबनान से वापस जाने का दबाव डाले और अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करे। संगठन ने यह भी मांग की है कि हथियारों की बिक्री रोकी जाए जो और अत्याचारों को बढ़ावा दे सकती है।

📌 Sources & References

  • Maktoob Media
  • Amnesty International

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