
… पूर्व विधानसभा में कांग्रेस ने दो युवा मुस्लिम चेहरों पर बड़ा भरोसा जताया है। आसिफ इकबाल को डॉ. जाकिर हुसैन ब्लॉक अध्यक्ष और तौफीक खान ‘चंकी’ को मौलाना आजाद वार्ड की जिम्मेदारी देकर पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि वह मुस्लिम समाज के बीच अपनी कमजोर होती पकड़ को मजबूत करना चाहती है। लोगों के बीच सक्रिय, मिलनसार और नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करने वाले इन दोनों नेताओं से कांग्रेस को उम्मीद है कि वे पार्टी और मुस्लिम समाज के बीच भरोसे की नई कड़ी बनेंगे।
जबलपुर। राजनीति में वोट ही सबसे बड़ा पैमाना होता है। कोई पार्टी कितनी मजबूत है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जाता है कि उसे कितने वोट मिले और वह कितनी सीटें जीत सकी।
जबलपुर जिले में कांग्रेस की हालत किसी से छिपी नहीं है। आठ विधानसभा सीटों में से सात सीटों पर कांग्रेस लगातार हार रही है। जिले में कांग्रेस की जो थोड़ी बहुत राजनीतिक ताकत बची हुई है, उसका सबसे बड़ा सहारा पूर्व विधानसभा क्षेत्र है।
पूर्व विधानसभा में भी कांग्रेस की सबसे बड़ी ताकत मुस्लिम समाज रहा है। सालों से मुस्लिम समाज कांग्रेस के साथ खड़ा रहा है और चुनावों में उसका साथ देता रहा है।
लेकिन पिछले 10-15 सालों में हालात बदले हैं।
मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग कांग्रेस से नाराज भी रहा है और निराश भी। लोगों को शिकायत रही कि उनके मुद्दे मजबूती से नहीं उठाए गए। कुछ नेताओं की कार्यशैली पर सवाल उठे, कुछ पर घमंड के आरोप लगे और कुछ नेताओं को लोगों ने जनता से दूर माना।
इन सबका असर कांग्रेस की छवि पर पड़ा।
आज भी मुस्लिम समाज का बड़ा हिस्सा कांग्रेस को वोट देता है, लेकिन यह भी सच है कि बहुत से लोग कांग्रेस को पसंद से नहीं बल्कि मजबूरी में वोट देते हैं। वजह साफ है—उन्हें कोई मजबूत विकल्प नजर नहीं आता।
लेकिन अब यह स्थिति पहले जैसी नहीं रही।
बीते नगर निगम चुनाव में AIMIM ने जबलपुर की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। भले ही पार्टी कोई बड़ी जीत हासिल नहीं कर सकी, लेकिन उसने यह संदेश जरूर दिया कि अगर कोई पार्टी लगातार मेहनत करे और लोगों के बीच रहे तो मुस्लिम समाज उसे विकल्प के रूप में स्वीकार करने को तैयार है।
यही बात कांग्रेस भी समझ रही है।
नगर निगम चुनाव, विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अब अपने पारंपरिक वोट बैंक को फिर से मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने मुस्लिम समाज के बीच नए और युवा चेहरों को जिम्मेदारी देना शुरू किया है।
हाल ही में युवा नेता आसिफ इकबाल को डॉ. जाकिर हुसैन ब्लॉक अध्यक्ष बनाया गया है। वहीं तौफीक खान ‘चंकी’ को मौलाना अबुल कलाम आजाद वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कांग्रेस के जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ संगठनात्मक नियुक्तियां नहीं हैं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। पार्टी यह दिखाना चाहती है कि वह नए लोगों को आगे लाने और युवाओं को जिम्मेदारी देने के लिए तैयार है।
आसिफ इकबाल की पहचान एक मिलनसार और लोगों के बीच रहने वाले युवा नेता की रही है। वहीं तौफीक चंकी भी लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं और युवाओं के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
मुस्लिम समाज के भीतर इन नियुक्तियों को लेकर सकारात्मक चर्चा भी देखने को मिल रही है। बहुत से लोगों का मानना है कि नए चेहरे शायद उन कामों को कर सकें, जिनकी उम्मीद पुराने नेतृत्व से थी लेकिन जो पूरे नहीं हो सके।

हालांकि असली परीक्षा अभी बाकी है।
सिर्फ पद मिलने से हालात नहीं बदलते। लोगों की उम्मीद है कि नए नेता शिक्षा, रोजगार, सड़क, पानी, सफाई, सरकारी योजनाओं और समाज के दूसरे जमीनी मुद्दों पर काम करेंगे। अगर ऐसा होता है तो कांग्रेस की छवि मजबूत हो सकती है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने मुस्लिम समाज के बीच अपनी कमजोर होती पकड़ को महसूस किया है और उसे सुधारने की कोशिश शुरू कर दी है।
अब देखना यह है कि आसिफ इकबाल और तौफीक चंकी जैसे नए चेहरे कांग्रेस की इस कोशिश को कितनी मजबूती दे पाते हैं और क्या कांग्रेस मुस्लिम समाज के बीच अपना पुराना भरोसा फिर से हासिल कर पाती है।



