असम में NEET प्रदर्शन के लिए WhatsApp ग्रुप बनाने पर 3 मुस्लिम युवा जेल में

लालुक (लखीमपुर) | BAZ News Network (BNN) । शांतिपूर्ण प्रदर्शन की तैयारी करना महंगा पड़ा। असम के लखीमपुर जिले के लालुक इलाके से असम पुलिस ने तीन मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हैरानी की बात यह है कि तीनों ने प्रदर्शन के लिए लालुक थाने से पहले ही इजाज़त मांगी थी, लेकिन पुलिस ने परमिशन देने से इनकार कर दिया और फिर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
News in Short
- लखीमपुर के लालुक से मोनजुर रहमान (23), अशरफुल इस्लाम (21) और अब्दुल कासिम (23) को 23 जुलाई को गिरफ्तार किया गया
- तीनों ने NEET विरोध के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए WhatsApp ग्रुप बनाया था
- पुलिस से परमिशन मांगी, इनकार हुआ, फिर BNS की धारा 152 के तहत केस दर्ज
- परिवार का आरोप — दूसरे समुदायों को नहीं पकड़ा जा रहा, सिर्फ मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाया जा रहा
- कोर्ट ने पुलिस रिमांड खारिज किया, न्यायिक हिरासत में भेजा
NEET प्रदर्शन की तैयारी पर असम में मुस्लिम युवा गिरफ्तारी
मोनजुर रहमान एम.कॉम का छात्र है। अशरफुल इस्लाम भी एम.कॉम कर रहा है। अब्दुल कासिम फार्मास्यूटिकल साइंस में ग्रेजुएट है और प्रैक्टिस लाइसेंस का इंतज़ार करते हुए प्राइवेट स्कूल में पढ़ाता है। तीनों ने मिलकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में एक WhatsApp ग्रुप बनाया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा है — इसी मुद्दे पर वे शांतिपूर्ण विरोध करना चाहते थे।
परिवारों का कहना है कि गिरफ्तारी से पहले तीनों ने लालुक पुलिस स्टेशन से औपचारिक इजाज़त मांगी थी। लेकिन पुलिस ने परमिशन देने से मना कर दिया। और फिर 23 जुलाई को तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
BNS की धारा 152 के तहत केस — राष्ट्र की एकता खतरे में डालने का आरोप
तीनों युवाओं पर BNS की धारा 61(2)(b), 353(1) और 152 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। धारा 152 गंभीर है — इसमें भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाले कृत्यों का आरोप लगता है। इसमें अलगाववाद, सशस्त्र विद्रोह या विभाजनकारी गतिविधियों को भड़काना शामिल है।
पुलिस ने कोर्ट में तीनों की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने पुलिस का अनुरोध खारिज कर दिया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
परिवार का आरोप — मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाया जा रहा
मोनजुर के पिता मोज़िबुर ने कहा, “मेरे बेटे ने कुछ भी गैर-संवैधानिक नहीं किया। प्रदर्शन आयोजित करने की कोशिश करना कोई अपराध नहीं है। पूरे देश में युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा रहा। मेरे बेटे ने तो अभी प्रदर्शन किया भी नहीं था, सिर्फ आयोजित करने की कोशिश की थी।”
अशरफुल इस्लाम के पिता अय्यूब अली ने साफ कहा, “दूसरे समुदायों के लोगों को नहीं पकड़ा जा रहा। लेकिन हम मुसलमान हैं, इसलिए हमें निशाना बनाया जा रहा है।”
असम में एक के बाद एक ऐसे मामले सामने आ रहे हैं जहां शांतिपूर्ण विरोध की तैयारी या समर्थन पर मुस्लिम युवाओं को गिरफ्तार किया जा रहा है। संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल उठ रहे हैं।
📌 Sources & References
- The Wire
- Maktoob Media



