दो बालिग बहनों इस्लाम कबूल करने पर 5 साल घर में कैद रखा, हाईकोर्ट ने रिहा कराया

प्रयागराज | BAZ News Network (BNN) । इस्लाम कबूल करने की सज़ा — 5 साल की कैद। दो बालिग बहनों को सिर्फ इसलिए घर में कैद रखा गया क्योंकि उन्होंने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माँ-बाप और यूपी सरकार पर 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए दोनों को फौरन रिहा करने का आदेश दिया।
News in Short
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो बालिग महिलाओं को रिहा कराया जो 5 साल से माँ-बाप ने घर में कैद रखा था
- दोनों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल किया था, इसी बात पर परिवार ने कैद रखा
- कोर्ट ने माँ-बाप और यूपी सरकार पर संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया
- पुलिस को आदेश दिया कि महिलाओं की ज़िंदगी में कोई दखल न दे
- वकील सैयद कैफ हसन ने कहा — बालिग महिला की आज़ादी परिवार की मर्ज़ी पर निर्भर नहीं
इस्लाम कबूल करने पर 5 साल तक घर में कैद
जस्टिस संदीप जैन की एकल पीठ ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा — धार्मिक पसंद की वजह से किसी बालिग की आज़ादी नहीं छीनी जा सकती। हेबियस कॉर्पस याचिका में यह मामला आया था। दोनों बहनों को करीब 5 साल से परिवार ने ज़बरन घर में रोक रखा था।
31 जुलाई की सुनवाई में कोर्ट ने दोनों महिलाओं को पेश करने का आदेश दिया था। तब कोर्ट ने कहा था, “इस्लाम कबूल करना और शादी करना बालिग महिला का संवैधानिक अधिकार है। अगर जबरदस्ती या धोखा नहीं है तो बाप समेत कोई भी दखल नहीं दे सकता।”
25 लाख का जुर्माना, पुलिस को सख्त निर्देश
कोर्ट ने माँ-बाप और उत्तर प्रदेश सरकार को संयुक्त रूप से 25 लाख रुपये का मुआवज़ा देने का आदेश दिया। साथ ही पुलिस को सख्त हिदायत दी कि महिलाओं की ज़िंदगी या उनकी पसंद में कोई दखल न दे।
वकील सैयद कैफ हसन और कुंवर सुल्तान अली ने दोनों महिलाओं का केस लड़ा। कैफ हसन ने कहा, “फैसले ने साफ किया कि बालिग महिला की आज़ादी उसके परिवार की धार्मिक पसंद पर निर्भर नहीं हो सकती। सालों से बेवजह कैद रखना संविधान का खुला उल्लंघन था।”
संविधान का अनुच्छेद 21 — निजी आज़ादी की गारंटी
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के उन तमाम फैसलों की कड़ी में आता है जो बालिगों की निजी आज़ादी को परिवारिक या सामाजिक दबाव से बचाते हैं। 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि अनुच्छेद 21 के तहत जीने का अधिकार इसमें शामिल है कि आप अपनी पसंद के शख्स के साथ रहें — धर्म कोई भी हो।
कोर्ट ने यह भी कहा कि परिवार के सदस्यों द्वारा ग़ैरकानूनी तरीके से आज़ादी छीनना भी संविधान के खिलाफ है। ऐसे मामलों में संवैधानिक अदालतों को बालिगों की स्वायत्तता और आज़ादी की रक्षा करनी ही होगी।
विस्तृत कोर्ट ऑर्डर का इंतज़ार है। यह खबर अपडेट की जा रही है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media



