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भोपाल में लव जिहाद केस से बरी हुआ सैयद खान, पत्नी ने खारिज किए पुलिस के आरोप

भोपाल | BAZ Media Bhopal Division । MP धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत चल रहे लव जिहाद केस में बड़ा फैसला। भोपाल सेशन कोर्ट ने 26 साल के सैयद खान को बरी कर दिया। प्रॉसिक्यूशन जबरन धर्म परिवर्तन, धोखाधड़ी या दबाव का एक भी सबूत नहीं दे सकी। सबसे बड़ी बात—शादी करने वाली लड़की ने खुद पुलिस के आरोप खारिज कर दिए।

News in Short

  • भोपाल कोर्ट ने सैयद खान को MP धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत बरी किया
  • 7 फरवरी को स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करने गए थे, कोर्ट में वकीलों ने मारपीट की
  • पत्नी ने 164 CrPC के तहत बयान में कहा—शादी मर्जी से हुई, धोखा नहीं हुआ
  • कांग्रेस सांसद नासिर हुसैन ने बीजेपी पर नफरत की राजनीति का आरोप लगाया
  • CM मोहन यादव ने मार्च में जबरन धर्म बदलवाने पर मौत की सजा का ऐलान किया था

भोपाल लव जिहाद केस में क्या हुआ था

7 फरवरी 2025 को सैयद खान और उसकी पार्टनर नर्मदापुरम से भोपाल आए थे। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत शादी करनी थी। लेकिन भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकीलों के एक ग्रुप ने खान पर हमला कर दिया। आरोप—झूठी पहचान बताकर हिंदू लड़की से शादी की और इस्लाम कबूल करने के लिए दबाव डाला।

खान को थाने ले जाया गया। MP धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत केस दर्ज हुआ। पुलिस का कहना था—खान ने अपना असली नाम छुपाया, फर्जी नाम इस्तेमाल किया और लड़की को धर्म बदलने के लिए मजबूर किया।

पत्नी ने कोर्ट में क्या कहा

लड़की, जो खुद इस केस में शिकायतकर्ता भी थी, ने बाद में पुलिस के सारे आरोप खारिज कर दिए। सेक्शन 164 CrPC के तहत बयान और क्रॉस एग्जामिनेशन में उसने साफ कहा—खान ने न धमकाया, न धोखा दिया, न मारपीट की। इस्लाम कबूल करने के लिए कोई दबाव नहीं था।

उसने कोर्ट को बताया—मैंने खान से अपनी मर्जी से शादी की। मुझे उसके मजहब के बारे में पता था। पुलिस की कहानी असल में गलतफहमी और परिवार के दबाव की वजह से बनी, खान की धमकी से नहीं।

कोर्ट का फैसला—सबूत नहीं, आरोप सिर्फ

प्रॉसिक्यूशन का पूरा केस शुरुआती शिकायत पर टिका था। लेकिन लड़की की गवाही ने उन आरोपों को सपोर्ट नहीं किया। कोई स्वतंत्र गवाह, दस्तावेजी सबूत या दूसरा मटीरियल पेश नहीं हुआ जो साबित करता कि खान ने जोर-जबरदस्ती, धोखा या दबाव इस्तेमाल किया।

कोर्ट ने कहा—एंटी-कन्वर्जन कानून के तहत सिर्फ आरोप से किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। प्रॉसिक्यूशन को साफ और भरोसेमंद सबूत पेश करने होते हैं। वो नहीं हुआ। इसलिए खान को बरी कर दिया गया।

कांग्रेस सांसद का आरोप—नफरत की राजनीति

कांग्रेस नेता और सांसद डॉ. सैयद नासिर हुसैन ने सैयद खान को बीजेपी की “धमकी और नफरत की राजनीति” का शिकार बताया। X पर पोस्ट में उन्होंने लिखा—खान और उसकी पार्टनर स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत कानूनी तरीके से शादी करने कोर्ट गए थे। लेकिन उसे वकीलों ने पीटा, लव जिहाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया, रोजगार और घर दोनों खो दिए।

हुसैन ने कहा—कोर्ट ने खान को बरी किया क्योंकि खुद लड़की समेत प्रॉसिक्यूशन के गवाहों ने आरोपों को सपोर्ट नहीं किया। उन्होंने बीजेपी पर सवाल उठाया—लव जिहाद के नाम पर कितनी और जिंदगियां बर्बाद होंगी? सरकार इस नफरत और डर का जवाब दे।

MP का धर्म स्वातंत्र्य कानून और मौत की सजा का ऐलान

MP धर्म स्वातंत्र्य ऑर्डिनेंस 2020, जो 7 जनवरी 2021 को लागू हुआ, 1968 के पुराने कानून की जगह आया। इसके तहत धर्म परिवर्तन के लिए डीएम को पहले से सूचना देनी होती है। जबरदस्ती, धोखा, दबाव या शादी के जरिए धर्म बदलवाना गैरकानूनी है।

मार्च 2025 में CM मोहन यादव ने ऐलान किया—लड़कियों को जबरन धर्म बदलवाने वालों को मौत की सजा दी जाएगी। अब यह केस दिखाता है कि कानून के नाम पर बिना सबूत के लोगों को फंसाया जा रहा है या नहीं, यह सवाल खड़ा हो गया है।

भोपाल सेशन कोर्ट का यह फैसला साफ करता है—सिर्फ आरोप और माहौल से कोई केस नहीं बनता। जब तक सबूत न हों, किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। सैयद खान की जिंदगी बर्बाद हुई, लेकिन आखिरकार इंसाफ मिला।

📌 Sources & References

  • Maktoob Media
  • Court records

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