जबलपुर में हजारों मुस्लिम परिवारों के ‘आशियाने’ का सपना खतरे में! गोहलपुर-खजरी बाईपास पर धड़ल्ले से बिक रहे अवैध प्लॉट

जबलपुर। शहर के गोहलपुर से खजरी-खिरिया बाईपास तक का इलाका इन दिनों अवैध प्लॉटिंग के बड़े कारोबार का केंद्र बन चुका है। सबसे चिंता की बात यह है कि इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग अपनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी लगाकर घर बनाने का सपना खरीद रहे हैं, लेकिन जिन जमीनों पर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, उनमें से कई के पास न वैध लेआउट है, न नगर निगम की अनुमति, न ही जरूरी विभागीय स्वीकृतियां।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की तो हजारों परिवारों की जीवनभर की कमाई खतरे में पड़ सकती है।
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40 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां, फिर भी कार्रवाई नहीं
आरोप है कि, गोहलपुर से अमखेरा रोड और खजरी-खिरिया बाईपास के बीच करीब 40 से अधिक स्थानों पर अवैध प्लॉटिंग का कारोबार खुलेआम चल रहा है। हैरत की बात यह है कि यह पूरा क्षेत्र नगर निगम मुख्यालय से महज चार किलोमीटर और संभागीय जोन कार्यालय दमोहनाका से करीब 500 मीटर की दूरी पर स्थित है।
इसके बावजूद बिना स्वीकृत लेआउट, बिना कॉलोनी विकास अनुमति और कई मामलों में बिना डायवर्सन के ही खेतों को प्लॉट में बदलकर बेचा जा रहा है।
‘आज बुकिंग करो, कल रेट बढ़ जाएगा’ कहकर बनाया जा रहा दबाव
पूरे इलाके में बिल्डरों ने बिक्री अभियान तेज कर दिया है। सड़क किनारे टेंट लगाकर कर्मचारी बैठाए जा रहे हैं, पंपलेट बांटे जा रहे हैं और ग्राहकों को साइट विजिट कराई जा रही है।
मौके पर पहुंचे खरीदारों का कहना है कि उनसे तुरंत बुकिंग राशि जमा करने का दबाव बनाया जाता है और दावा किया जाता है कि जल्द ही यहां बड़ी कॉलोनी विकसित होने वाली है। अधिकांश खरीदार इस भरोसे पर अपनी जमा पूंजी निवेश कर रहे हैं कि भविष्य में यहां उनका अपना घर होगा।
सबसे ज्यादा चिंता मुस्लिम परिवारों की
स्थानीय लोगों के अनुसार गोहलपुर और आसपास के क्षेत्रों में मुस्लिम समाज के हजारों परिवार वर्षों से अपने घर का सपना पूरा करने के लिए छोटी-छोटी बचत करते रहे हैं। कम कीमत होने के कारण बड़ी संख्या में लोग इन्हीं प्लॉटों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
यदि भविष्य में ये कॉलोनियां अवैध घोषित होती हैं या इन पर कार्रवाई होती है तो सबसे बड़ा आर्थिक नुकसान उन्हीं परिवारों को होगा जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी की कमाई इन प्लॉटों में लगा दी है।
बिना लेआउट, बिना डायवर्सन बेचे जा रहे प्लॉट
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कई बिल्डरों ने केवल कृषि भूमि का डायवर्सन कराकर ही प्लॉट काटना शुरू कर दिया, जबकि कई जगह बिना डायवर्सन के ही वर्गफीट के हिसाब से जमीन बेची जा रही है।
इतना ही नहीं, खरीदारों के नाम रजिस्ट्री भी कराई जा रही है, जिससे आम लोग यह मान लेते हैं कि जमीन पूरी तरह वैध है।
आखिर बिजली कनेक्शन कैसे मिल गए?
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन कॉलोनियों को वैध अनुमति नहीं मिली, वहां बिजली के कनेक्शन कैसे पहुंच गए?
कुछ स्थानों पर स्थायी विद्युत कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि कई जगह अस्थायी कनेक्शन के सहारे निर्माण कार्य चल रहा है। कहीं सड़क बनाई जा रही है तो कहीं नालियां तैयार की जा रही हैं, जबकि कॉलोनी की वैधानिक स्वीकृति ही नहीं है।
ग्रीन बेल्ट तक में काट दिए प्लॉट
जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर खेती योग्य जमीन और ग्रीन बेल्ट क्षेत्र तक में प्लॉटिंग कर दी गई है। नगर निगम की एनओसी, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) की अनुमति और रेरा पंजीयन जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किए बिना ही कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।
इन कॉलोनियों में न पेयजल की स्थायी व्यवस्था है, न ड्रेनेज सिस्टम, न सार्वजनिक सुविधाएं और न ही नियमानुसार सड़कें।
99 अवैध कॉलोनियां चिन्हित, एफआईआर सिर्फ 12 पर
कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने पदभार संभालने के बाद जिले की 99 अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार कराई थी। इसके बावजूद अधिकांश स्थानों पर प्लॉट बिकते रहे और अब कई जगह मकानों का निर्माण भी शुरू हो चुका है।
जानकारी के अनुसार अब तक केवल 12 मामलों में ही एफआईआर दर्ज हो सकी है, जबकि बाकी मामलों में कार्रवाई महीनों से फाइलों तक सीमित है।
प्रशासन से उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले ही प्रभावी कार्रवाई करता तो हजारों लोग अवैध कॉलोनियों में निवेश करने से बच सकते थे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नगर निगम, राजस्व विभाग, टीएनसीपी और अन्य जिम्मेदार एजेंसियां आखिर कब जागेंगी? और क्या उन परिवारों की जीवनभर की जमा-पूंजी सुरक्षित रह पाएगी, जिन्होंने अपने बच्चों के भविष्य और अपने आशियाने का सपना इन प्लॉटों में निवेश कर देखा है?
क्या कहते हैं नियम?
- कॉलोनी विकसित करने से पहले लेआउट की स्वीकृति आवश्यक होती है।
- कृषि भूमि पर प्लॉटिंग से पहले वैध डायवर्सन जरूरी है।
- बड़ी आवासीय परियोजनाओं के लिए टीएनसीपी और अन्य विभागों की अनुमति अनिवार्य होती है।
- आवश्यक श्रेणी की परियोजनाओं में रेरा पंजीयन भी जरूरी है।
- बिना इन अनुमतियों के खरीदे गए प्लॉट भविष्य में कानूनी विवाद का कारण बन सकते हैं।
(नोट : यह रिपोर्ट स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों तथा उपलब्ध प्रशासनिक जानकारी पर आधारित है। संबंधित बिल्डरों एवं प्रशासन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)



