Advertisement
JabalpurNews

BAZ Special Report: देश के अन्य हाईकोर्ट से कितनी अलग है जबलपुर हाईकोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था? भ्रूण प्रकरण के बाद सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठे सवाल

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच में एक व्यक्ति के थैले में मृत भ्रूण लेकर कोर्ट परिसर तक पहुंच जाने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद अब चर्चा सिर्फ लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि देश के अन्य हाईकोर्ट की तुलना में जबलपुर बेंच की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत या कमजोर है।


🔍 जबलपुर बेंच: मौजूदा व्यवस्था क्या कहती है?

जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट परिसर में कुल छह प्रवेश द्वार हैं। आम नागरिकों के लिए केवल एक गेट से प्रवेश की अनुमति है, जहां पहले गेट पास बनता है और उसके बाद जांच के बाद प्रवेश दिया जाता है।

Advertisement

सूत्रों के अनुसार कार्यदिवस में लगभग 35 पुलिसकर्मी परिसर में तैनात रहते हैं, जिनमें एक एडिशनल एसपी स्तर के अधिकारी, तीन इंस्पेक्टर और अन्य सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। भवन के अंदर प्रवेश से पहले दूसरी बार चेकिंग की व्यवस्था भी है।

हालिया घटना में दोनों स्तर की जांच के बावजूद प्रतिबंधित सामग्री भीतर पहुंच जाना सुरक्षा प्रोटोकॉल के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़ा करता है।

विज्ञापन

⚖️ इलाहाबाद हाईकोर्ट: मल्टी-लेयर सिक्योरिटी मॉडल

इलाहाबाद हाईकोर्ट (प्रयागराज) देश के सबसे पुराने और बड़े न्यायालयों में से एक है। वहां सुरक्षा तीन स्तरों पर होती है—

  • बाहरी परिधि पर सशस्त्र पुलिस बल
  • गेट पर मेटल डिटेक्टर और बैगेज स्कैनर
  • कोर्ट रूम क्षेत्र में अलग से फ्रिस्किंग

वकीलों और स्टाफ के लिए अलग प्रवेश मार्ग और आम लोगों के लिए अलग लाइन की व्यवस्था रहती है। कई मामलों में हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान पीएसी (प्रांतीय सशस्त्र बल) की अतिरिक्त तैनाती भी की जाती है।


🏛️ दिल्ली हाईकोर्ट: टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी

दिल्ली हाईकोर्ट में सुरक्षा व्यवस्था अपेक्षाकृत अधिक तकनीकी और सख्त मानी जाती है।

  • सभी प्रवेश द्वारों पर एक्स-रे बैगेज स्कैनर
  • फेस रिकॉग्निशन सक्षम सीसीटीवी नेटवर्क
  • स्मार्ट विजिटर पास सिस्टम
  • हाई-सिक्योरिटी जोन में बायोमेट्रिक एंट्री

दिल्ली में आतंकी हमले (2011) के बाद सुरक्षा को पूरी तरह पुनर्गठित किया गया था। इसके बाद से मल्टी-लेयर मॉनिटरिंग और नियमित मॉक ड्रिल अनिवार्य की गई है।


🏢 बॉम्बे हाईकोर्ट: संवेदनशील मामलों के लिए अलग प्रोटोकॉल

मुंबई स्थित बॉम्बे हाईकोर्ट में संवेदनशील और आपराधिक मामलों की सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाती है।

  • कोर्ट परिसर में क्विक रिएक्शन टीम
  • संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत अलर्ट सिस्टम
  • वकीलों, मीडिया और आम जनता के लिए पृथक जोन

वहां निजी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के संयुक्त समन्वय से निगरानी की जाती है।


❓ क्या जबलपुर बेंच में स्टाफ की कमी?

जबलपुर बेंच में कुल तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या लगभग 35 बताई जाती है। न्यायिक कार्य, वकीलों की संख्या और रोजाना आने वाले आम नागरिकों को देखते हुए यह संख्या पर्याप्त है या नहीं—यह अब बहस का विषय बन गया है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, तकनीकी उपकरणों की उपलब्धता और निगरानी प्रणाली का नियमित ऑडिट भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

स्थानीय अधिवक्ताओं का कहना है कि कई बार भीड़ के समय फ्रिस्किंग सतही रह जाती है। यदि बैगेज स्कैनर या अन्य उपकरण मौजूद हैं तो क्या वे पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं—इस पर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं है।


📊 तुलना में मुख्य अंतर

बिंदुजबलपुर बेंचइलाहाबाददिल्लीबॉम्बे
टेक्नोलॉजीसीमित जानकारीस्कैनर + मैनुअल जांचहाई-टेक निगरानीसंयुक्त निगरानी
अतिरिक्त बलसामान्य तैनातीजरूरत पर PACमॉक ड्रिल अनिवार्यQRT मौजूद
प्रवेश प्रणालीगेट पास आधारितपृथक प्रवेश लाइनस्मार्ट पास सिस्टमजोन आधारित व्यवस्था

🛑 सवाल जो जवाब मांगते हैं

  • क्या जबलपुर बेंच में सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा?
  • क्या टेक्नोलॉजी अपग्रेड की जरूरत है?
  • क्या तैनात स्टाफ संख्या और प्रशिक्षण पर्याप्त है?
  • क्या संवेदनशील मामलों में अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू किया जाएगा?

🔎 आगे की राह

चार पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद मामला फिलहाल अनुशासनात्मक कार्रवाई तक सीमित है। लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर तुलना से स्पष्ट है कि बड़े हाईकोर्ट परिसरों में तकनीकी निगरानी और बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती है।

जबलपुर बेंच की घटना ने यह संकेत दिया है कि केवल गार्ड की मौजूदगी पर्याप्त नहीं, बल्कि सिस्टम की कठोरता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या मध्य प्रदेश हाईकोर्ट प्रशासन और पुलिस विभाग मिलकर सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेंगे, या यह मामला कुछ समय बाद सामान्य खबर बनकर रह जाएगा।

Jabalpur Baz

बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
Back to top button

You cannot copy content of this page