इंदौर हत्याकांड: राजनीतिक शरण या पारिवारिक सहारा? जबलपुर में कथित भाजपा नेत्री के घर से तीन आरोपी गिरफ्तार, उठे नैतिक सवाल

जबलपुर। इंदौर में युवक अक्षय शर्मा के अपहरण और बेरहमी से हत्या के मामले में फरार चल रहे तीन आरोपियों की गिरफ्तारी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। जबलपुर पुलिस ने मुख्य आरोपी शशिकांत शर्मा को उसकी सास शिखा शर्मा के राइट टाउन स्थित घर से गिरफ्तार किया। शिखा शर्मा स्वयं को भाजपा नेत्री बताती हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है—क्या यह केवल पारिवारिक सहारा था या आरोपी को राजनीतिक संरक्षण मिल रहा था?
पुलिस के अनुसार इंदौर में वारदात के बाद आरोपी शशिकांत शर्मा, रवि शर्मा और गौरव शर्मा फरार हो गए थे। उनके ऊपर 2-2 हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। जांच के दौरान सूचना मिली कि शशिकांत अपनी सास के घर में शरण लिए हुए है।
कोतवाली सीएसपी रितेश कुमार शिव के नेतृत्व में लार्डगंज थाना प्रभारी नवल आर्य की टीम ने गुरुवार शाम दबिश दी और शशिकांत को मौके से पकड़ लिया। पूछताछ के आधार पर रवि और गौरव को भी पास के एक अन्य घर से गिरफ्तार कर लिया गया।
17 जनवरी को अक्षय शर्मा का अपहरण कर उसे इंदौर से लगभग 100 किलोमीटर दूर शाजापुर ले जाया गया था। एक फार्महाउस में उसके साथ बेरहमी से मारपीट और अमानवीय यातनाएं दी गईं। 18 जनवरी को गंभीर हालत में उसे इंदौर के बाणगंगा थाना क्षेत्र में छोड़ दिया गया, जहां 22 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
जांच में सामने आया कि पुश्तैनी जमीन को लेकर अक्षय का अपने चाचा गोविंद शर्मा और अन्य परिजनों से विवाद चल रहा था। इसी रंजिश ने इस हत्याकांड का रूप लिया।
राजनीतिक जवाबदेही पर चर्चा
आरोपी का कथित भाजपा नेत्री के घर में छिपा होना अब राजनीतिक और नैतिक बहस का विषय बन गया है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि शरण केवल पारिवारिक रिश्ते के कारण दी गई थी या किसी प्रकार का राजनीतिक संरक्षण था।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि किसी जनप्रतिनिधि या पदाधिकारी के घर में गंभीर अपराध के आरोपी को शरण मिलती है, तो यह नैतिक रूप से गंभीर प्रश्न खड़े करता है। वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार इस पहलू की भी जांच की जा रही है कि आरोपी को छिपाने में किसी प्रकार की जानबूझकर सहायता तो नहीं दी गई।
छह आरोपी गिरफ्तार, दो अब भी फरार
इस मामले में अब तक छह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इससे पहले इंदौर पुलिस विनोद, राहुल और रिंकू को गिरफ्तार कर चुकी थी। शशिकांत, रवि और गौरव की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज हो गई है।
पुलिस के अनुसार सत्यम और एक अन्य रवि अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
यह मामला अब केवल एक जघन्य हत्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक जवाबदेही का प्रश्न भी बन गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि आरोपी को मिली शरण केवल पारिवारिक मजबूरी थी या इसके पीछे कोई और कारण।



