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Jabalpur

नबी-ए-करीम ﷺ की शान में कथित गुस्ताख़ी के खिलाफ़ जबलपुर की ‘मुस्लिम ख़वातीन सड़कों’ पर ..। बोलीं आज गुजारिश की है, जरूरत पड़ी तो कल आंदोलन करेंगे

जबलपुर। हुज़ूर नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की शान-ए-अक़दस में सोशल मीडिया पर की गई कथित गुस्ताख़ाना टिप्पणी के विरोध में जबलपुर की सैकड़ों मुस्लिम ख़वातीन ने मशहूर इस्लामिक स्कॉलर, आलिमा फ़ाज़िला मोहतरमा रशीदा तबस्सुम अंसारी की क़यादत में गोहलपुर थाना पहुंचकर पुर-अमन एहतिजाज किया।

प्रदर्शन के दौरान मुस्लिम महिलाओं ने कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली महिला के खिलाफ़ फ़ौरन एफआईआर दर्ज कर गिरफ़्तारी की मांग करते हुए राष्ट्रपति के नाम थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपा। साथ ही मुतालबा किया कि संसद ऐसा सख़्त क़ानून बनाए, जिससे किसी भी मज़हब की मुक़द्दस हस्तियों की तौहीन करने वालों के खिलाफ़ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने कहा कि हिंदुस्तान का दस्तूर हर नागरिक को अपनी बात रखने की आज़ादी देता है, लेकिन किसी भी मज़हब की मुक़द्दस शख़्सियत की तौहीन करने या उनके बारे में झूठे और अपमानजनक आरोप लगाने का हक़ किसी को नहीं है। उनका कहना था कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले मामलों में तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई होना देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब और सामाजिक भाईचारे के लिए बेहद ज़रूरी है।

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“इस्लाम ने 1400 साल पहले औरत को इज़्ज़त और हुक़ूक़ दिए” : रशीदा तबस्सुम अंसारी

मीडिया से बातचीत करते हुए आलिमा फ़ाज़िला मोहतरमा रशीदा तबस्सुम अंसारी ने कहा कि आज से लगभग 1400 वर्ष पहले जब दुनिया के कई हिस्सों में महिलाओं पर अत्याचार हो रहे थे, उस दौर में इस्लाम ने औरत को इज़्ज़त, तहफ़्फ़ुज़ और मुकम्मल हुक़ूक़ अता किए।

उन्होंने कहा, “जब अरब में बेटियों को ज़िंदा दफ़्न किया जा रहा था, हिंदुस्तान में औरतों को सती प्रथा के तहत ज़िंदा जलाया जा रहा था और उस दौर के सबसे ताक़तवर समझे जाने वाले रोमन साम्राज्य में महिलाओं को तमाम फ़साद की जड़ माना जाता था। ऐसे वक़्त में रहमतुल्लिल आलमीन हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ने फ़रमाया कि बेटियाँ रहमत हैं, बीवी के साथ सबसे बेहतर सुलूक करने वाला सबसे बेहतर मुसलमान है और माँ के क़दमों तले जन्नत है। इस्लाम ने औरत को विरासत में हिस्सा देकर उसके आर्थिक अधिकार भी मुक़र्रर किए।”

उन्होंने अफ़सोस जताते हुए कहा कि आज कुछ लोग सोशल मीडिया पर सस्ती शोहरत हासिल करने के लिए मोहसिन-ए-इंसानियत हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ की पाक सीरत पर झूठे और बेहूदा इल्ज़ाम लगा रहे हैं, जिससे करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं।

“हम दर्द लेकर पुलिस स्टेशन आए हैं”

रशीदा तबस्सुम अंसारी ने कहा, हम अपने घरों और बच्चों को छोड़कर दर्द के साथ पुलिस स्टेशन आए हैं, क्योंकि हमारे नबी-ए-करीम ﷺ की पाक ज़िंदगी को सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है। हमारी सिर्फ़ इतनी गुज़ारिश है कि हमारे नबी-ए-करीम ﷺ की ज़ात-ए-मुक़द्दस पर झूठे और गंदे इल्ज़ाम लगाने वालों के खिलाफ़ कानून के मुताबिक़ सख़्त कार्रवाई की जाए। साथ ही ऐसा कानून बनाया जाए कि किसी भी धर्म की मुक़द्दस शख़्सियत के खिलाफ़ गंदे अल्फ़ाज़, अपमानजनक भाषा या झूठे आरोप लगाना किसी के लिए भी आसान न रह जाए।

उन्होंने आगे कहा, “हमारे देश में बोलने की आज़ादी है, लेकिन किसी को गाली देने या किसी धर्म की मुक़द्दस शख़्सियत का अपमान करने का अधिकार नहीं है। कुछ आवारा अनासिर सोशल मीडिया पर सस्ती मक़बूलियत पाने के लिए मज़हबी शख़्सियात के बारे में बेहूदा बातें कर रहे हैं। अगर कानून के मुताबिक़ ऐसे लोगों पर निष्पक्ष और सख़्त कार्रवाई हो तो कोई भी दोबारा ऐसी जुर्रत नहीं करेगा।”

सिद्दीका तबस्सुम अंसारी : यह पूरी उम्मत के जज़्बात का मसला

सिद्दीका तबस्सुम अंसारी ने कहा कि हुज़ूर नबी-ए-करीम ﷺ की शान में गुस्ताख़ी किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरी उम्मत के जज़्बात का मसला है। उन्होंने कहा कि उनका एहतिजाज किसी से नफ़रत फैलाने के लिए नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर इंसाफ़ की मांग करने के लिए है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि मज़हबी जज़्बात को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ़ बिना किसी दबाव के सख़्त कार्रवाई की जाए।

अलकमा मंसूरी : सोशल मीडिया को नफ़रत का ज़रिया न बनने दें

अलकमा मंसूरी ने कहा कि सोशल मीडिया इल्म और जानकारी का एक बड़ा ज़रिया है, लेकिन कुछ लोग इसका इस्तेमाल नफ़रत और फितना फैलाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते ऐसे लोगों पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा गया तो समाज में भाईचारा प्रभावित होगा। उन्होंने मांग की कि किसी भी धर्म की मुक़द्दस हस्तियों के खिलाफ़ आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित करने वालों के लिए कड़ी सज़ा का प्रावधान किया जाए।

खालिदा बानो : आशिक़ान-ए-रसूल ﷺ के जज़्बात का एहतराम होना चाहिए

खालिदा बानो ने कहा कि दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की तरह हम भी सरकार-ए-दो आलम ﷺ से बेपनाह मोहब्बत करते हैं। ऐसे में उनकी पाक सीरत पर झूठे इल्ज़ाम और आपत्तिजनक टिप्पणियां किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जा सकतीं। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कर यह संदेश देना चाहिए कि मज़हबी नफ़रत फैलाने वालों के लिए इस मुल्क में कोई जगह नहीं है।

शाइस्ता तबस्सुम अंसारी : हमारा एहतिजाज अमन और दस्तूर के दायरे में है

शाइस्ता तबस्सुम अंसारी ने कहा कि हम सभी महिलाएं अपने घरों से इसलिए निकली हैं क्योंकि हमारे नबी-ए-करीम ﷺ की शान में गुस्ताख़ी ने हमारे दिलों को गहरा दुख पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि उनका एहतिजाज पूरी तरह अमन, सब्र और संविधान के दायरे में है तथा उनकी सिर्फ़ यही मांग है कि कानून के मुताबिक़ दोषियों पर निष्पक्ष कार्रवाई की जाए।

स्वालिहा अंसारी : हर मज़हब की मुक़द्दस हस्तियों का एहतराम ज़रूरी

स्वालिहा अंसारी ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज की पहचान यह है कि वहां हर मज़हब और उसकी मुक़द्दस हस्तियों का एहतराम किया जाए। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की आज़ादी का मतलब किसी के अकीदे या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इस मामले में जल्द उचित कार्रवाई करेगा, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति ऐसी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

कार्रवाई नहीं हुई तो होगा पुर-अमन एहतिजाज

ज्ञापन में मुस्लिम ख़वातीन ने चेतावनी दी कि यदि संबंधित महिला के खिलाफ़ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई नहीं हुई, तो जबलपुर मुस्लिम समाज की महिलाएं संविधान के दायरे में रहकर गोहलपुर चौक पर बड़े पैमाने पर पुर-अमन एहतिजाज करेंगी। उनका कहना था कि उनका मक़सद किसी तरह का तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि कानून के माध्यम से इंसाफ़ हासिल करना और सभी धर्मों की मुक़द्दस हस्तियों के सम्मान की हिफ़ाज़त सुनिश्चित करना है।

प्रदर्शन में सिद्दीका तबस्सुम अंसारी, अलकमा मंसूरी, खालिदा बानो, शाइस्ता तबस्सुम अंसारी, स्वालिहा अंसारी सहित बड़ी तादाद में मुस्लिम ख़वातीन मौजूद रहीं।

Jabalpur Baz

बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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