इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फेसबुक पोस्ट मामले में मुस्लिम शख्स की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

इलाहाबाद | BAZ News Network (BNN) । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुमे को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के एक मुस्लिम शख्स की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। मुशाहिद गाडा पर फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट डालने का आरोप था। गाडा ने दावा किया कि उनका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था और विवादित पोस्ट उन्होंने नहीं डाली।
News in Short
- जस्टिस अजय भानोट और दिवेश चंद्र समंत की बेंच ने मुशाहिद गाडा को अंतरिम सुरक्षा दी
- जुलाई 2025 में BNS की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज हुई थी
- पुलिस का आरोप — “भगवा रंग में सरकारी आतंकवादी” वाली पोस्ट से सांप्रदायिक तनाव भड़क सकता था
- अदालत ने गाडा को जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया
- अगली सुनवाई या पुलिस रिपोर्ट तक गिरफ्तारी पर रोक
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए कहा कि मामले में गहराई से विचार की ज़रूरत है। अदालत ने प्राइवेट रेस्पॉन्डेंट को नोटिस जारी किया और राज्य सरकार को चार हफ्ते में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। गिरफ्तारी पर तब तक रोक रहेगी जब तक अगली सुनवाई नहीं होती या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 193 के तहत पुलिस रिपोर्ट दाखिल नहीं हो जाती।
बेंच ने साफ कर दिया कि अगर मुशाहिद गाडा जांच एजेंसी की तय तारीख पर पेश नहीं होते हैं तो अंतरिम सुरक्षा अपने आप खत्म हो जाएगी। फिर पुलिस कानून के मुताबिक कार्रवाई कर सकेगी। अदालत ने याचिकाकर्ता को जांच में पूरा सहयोग देने और जब भी बुलाया जाए बयान दर्ज कराने के लिए हाजिर होने का आदेश दिया।
FIR में क्या आरोप लगे
पुलिस ने जुलाई 2025 में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) के तहत FIR दर्ज की थी। आरोप था कि मुशाहिद गाडा ने फेसबुक पर लिखा — “भगवा रंग में सरकारी मान्यता प्राप्त आतंकवादियों ने हर जगह अफरातफरी मचा रखी है।” पुलिस का दावा था कि इस पोस्ट से सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ सकता था और दो समुदायों के बीच झड़पें हो सकती थीं।
FIR में यह भी कहा गया कि मनोहरपुर गांव में इस पोस्ट की वजह से दो समुदायों में टकराव की आशंका थी। सरकारी वकील ने अदालत में दलील दी कि यह एक “नफरत भरी” सोशल मीडिया पोस्ट थी जिसका मकसद सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काना और सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ना था।
याचिकाकर्ता का पक्ष
मुशाहिद गाडा की तरफ से पेश वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने विवादित कंटेंट अपलोड नहीं किया था। उनका सोशल मीडिया अकाउंट हैक हो गया था। याचिकाकर्ता ने जांच में पूरा सहयोग करने की इच्छा जताई और अदालत को भरोसा दिलाया कि वे किसी भी तरह से न्याय प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेंगे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह फैसला उन मामलों में एक अहम मिसाल बनेगा जहां सोशल मीडिया अकाउंट हैक होने का दावा किया जाता है। अदालत ने साफ किया है कि जांच में सहयोग करना ज़रूरी है, वरना राहत नहीं मिलेगी।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- Live Law



