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पाकिस्तान-बांग्लादेश की चुप्पी: चीन के उइगर मुसलमानों पर जुल्म पर क्यों नहीं बोलते

नई दिल्ली | BAZ News Network (BNN) । चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर मुसलमानों पर हो रहे कथित अत्याचारों पर दुनिया के दो बड़े मुस्लिम देश पाकिस्तान और बांग्लादेश की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। कश्मीर और फिलिस्तीन के मुद्दे पर आवाज उठाने वाले ये देश उइगर मुसलमानों के मामले में चीन की नाराजगी मोल लेने को तैयार नहीं।

News in Short

  • संयुक्त राष्ट्र ने शिनजियांग में मानवाधिकार उल्लंघन को ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ बताया है
  • पाकिस्तान के लिए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) सबसे बड़ी प्राथमिकता
  • बांग्लादेश ने रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए आवाज उठाई लेकिन उइगर मुद्दे पर चुप
  • विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय हित धार्मिक एकता से ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं

शिनजियांग में उइगर मुसलमानों की स्थिति

उइगर तुर्की भाषा बोलने वाला मुस्लिम समुदाय है जो मुख्य रूप से चीन के शिनजियांग प्रांत में रहता है। पिछले एक दशक से इस इलाके में बड़े पैमाने पर डिटेंशन कैंप, इस्लामी रीति-रिवाजों पर पाबंदी, परिवारों का बिखराव और डिजिटल निगरानी की खबरें आ रही हैं। 2022 में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा था कि शिनजियांग में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप ‘अंतरराष्ट्रीय अपराध, खासतौर पर मानवता के खिलाफ अपराध’ की श्रेणी में आ सकते हैं।

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चीन ने हमेशा इन आरोपों को खारिज किया है। बीजिंग का कहना है कि ये कार्यक्रम आतंकवाद रोकने और गरीबी मिटाने के असली प्रयास हैं जो चरमपंथ को खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी हैं।

पाकिस्तान की रणनीतिक मजबूरी

पाकिस्तान और चीन की दोस्ती महज राजनयिक औपचारिकता नहीं है। बीजिंग इस्लामाबाद का सबसे करीबी सामरिक साझीदार और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के जरिए बुनियादी ढांचे में निवेश का मुख्य स्रोत है। चीन पाकिस्तान का प्रमुख रक्षा साझीदार भी बन गया है जो आधुनिक सैन्य उपकरण, संयुक्त लड़ाकू विमान निर्माण, नौसैनिक प्लेटफॉर्म मुहैया कराता है। कश्मीर मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन का राजनयिक समर्थन पाकिस्तान के लिए बेशकीमती है।

इन्हीं करीबी रणनीतिक संबंधों को देखते हुए पाकिस्तान की लगातार सरकारों ने शिनजियांग पर चीन के रुख का समर्थन किया है। पाकिस्तानी नेताओं ने बार-बार चीन की आंतरिक नीतियों के औचित्य पर भरोसा जताया है और देश के भीतर और बाहर से उइगर मुसलमानों की आवाज उठाने की अपीलों के बावजूद सार्वजनिक आलोचना से परहेज किया है।

बांग्लादेश का नाजुक संतुलन

बांग्लादेश का नजरिया थोड़ा सूक्ष्म है लेकिन सीमित भी। चीन बांग्लादेश के शीर्ष व्यापारिक साझीदारों में से एक और बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, परिवहन और औद्योगिक विकास में अग्रणी निवेशक बन गया है। ढाका की अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर आधुनिक बनाने की महत्वाकांक्षाओं ने बीजिंग की वित्तीय सहायता को तेजी से महत्वपूर्ण बना दिया है। साथ ही बांग्लादेश भारत, अमेरिका, जापान और अन्य विकास साझीदारों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है।

दिलचस्प बात यह है कि बांग्लादेश को पड़ोसी म्यांमार में उत्पीड़न से भागकर आए रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सराहना मिली है। रोहिंग्या संकट में मानवीय भूमिका निभाने वाला ढाका उइगर मुसलमानों के खिलाफ आरोपों पर जवाब देने में बेहद सतर्क रहा है। यह अंतर उन कठिन समझौतों को उजागर करता है जिनका मध्यम शक्तियों को अक्सर सामना करना पड़ता है जब वे नैतिक विश्वासों को रणनीतिक और आर्थिक लक्ष्यों के साथ समेटने की कोशिश करती हैं।

पाकिस्तान और बांग्लादेश का रुख इस धारणा पर सवाल खड़े करता है कि साझा धार्मिक पहचान जरूरी तौर पर विदेश नीति में साझा नजरिया पैदा करती है। हकीकत यह है कि राष्ट्रीय हित आज विचारधारा और धार्मिक एकता से कहीं ज्यादा अहम हो गए हैं। चीन के साथ आर्थिक और सामरिक जुड़ाव ने इन देशों की उइगर मुद्दे पर बोलने की क्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर दिया है।

📌 Sources & References

  • The Observer Post
  • UN Human Rights Report

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