राजस्थान बॉर्डर में 71 मस्जिद-मदरसों पर नोटिस, APCR ने उठाए सवाल

जयपुर | BAZ Media Bhopal Division । राजस्थान के बॉर्डर इलाकों में मस्जिदों और मदरसों पर गिरती गाज को लेकर एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR) ने तल्ख रिपोर्ट जारी की। संगठन का दावा है कि सिर्फ बाड़मेर में 63 और जैसलमेर में 8— कुल 71 मामलों में इस्लामी धार्मिक संस्थानों को नोटिस भेजे गए। कई को तोड़ भी दिया गया।
News in Short
- APCR की फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में 71 केस दर्ज— बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर में मस्जिद-मदरसों पर कार्रवाई
- नोटिस व्हाट्सऐप से भेजे गए, कुछ मस्जिद की दीवार पर चिपकाए गए
- 17 जून को मिला नोटिस, 18 जून तक जवाब देने को कहा— एक दिन का वक्त
- छह मस्जिदें बाड़मेर में, एक जैसलमेर में, कई मजार बीकानेर में तोड़ी गईं
- प्रशासन का पक्ष— बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव, किसी धर्म को टारगेट नहीं
व्हाट्सऐप से आया नोटिस, एक दिन में दो जवाब
APCR की रिपोर्ट ‘Notices, Faith and Justice’ बाड़मेर, जैसलमेर और जोधपुर में फील्ड विजिट के बाद तैयार हुई। टीम ने प्रभावित लोगों, मस्जिद कमेटियों, वकीलों और जनप्रतिनिधियों से बात की। जमीनी कागजात और नोटिसों का भी जायजा लिया।
रिपोर्ट में सबसे बड़ा सवाल उठा— नोटिस की तारीख 11 जून 2026 थी, लेकिन डिलीवरी 17 जून को हुई। जवाब देने को 18 जून तक का वक्त। यानी सिर्फ एक दिन। कई मामलों में नोटिस व्हाट्सऐप से भेजा गया या मस्जिद की दीवार पर चिपका दिया गया।
प्रभावित लोगों ने दावा किया कि जब वे तय तारीख पर पहुंचे तो अधिकारी मिलने से मना कर गए। कुछ ने लिखित जवाब देना चाहा तो उसे लेने से इनकार कर दिया। APCR का कहना है कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
राजस्थान मस्जिद नोटिस केस में कई कानूनों का इस्तेमाल
नोटिस राजस्थान लैंड रेवेन्यू ऐक्ट 1956, पंचायती राज रूल्स 1996, कॉलोनाइजेशन ऐक्ट 1954 और एविक्शन ऑफ एनक्रोचर्स ऐक्ट 1975 के तहत जारी हुए। कुछ नोटिसों में सालाना लैंड रेवेन्यू के 50 गुना तक जुर्माना और सिविल जेल की चेतावनी भी दी गई।
APCR के मुताबिक, जमीन का कानूनी दर्जा अलग-अलग है— कहीं चरागाह, कहीं खातेदारी, कहीं आबादी भूमि। ऐतिहासिक रिकॉर्ड, रेवेन्यू रिकॉर्ड और मौजूदा दस्तावेजों में फर्क है। ऐसे में एक जैसी प्रशासनिक कार्रवाई कानूनी रूप से सही नहीं ठहरती।
रिपोर्ट के मुताबिक, बाड़मेर में छह मस्जिदें, जैसलमेर में एक और बीकानेर में कई मजार तोड़ दिए गए। कई केस अदालत में लंबित हैं। संगठन का दावा है कि नोटिस देने की प्रक्रिया अभी भी जारी है।
प्रशासन बोला— बॉर्डर सिक्योरिटी के लिए ड्राइव
APCR ने अधिकारियों के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि प्रशासन इसे पाकिस्तान बॉर्डर से 50 किलोमीटर की पट्टी में एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव बता रहा है। अधिकारियों ने साफ किया कि यह किसी धर्म विशेष के खिलाफ नहीं है। सभी अवैध कब्जों पर कार्रवाई हो रही है।
लेकिन स्थानीय निवासियों ने APCR को बताया कि इसी इलाके में दूसरे समुदायों के धार्मिक स्थल भी हैं, लेकिन उन पर ऐसी कार्रवाई नहीं हुई। APCR ने इस आरोप की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
APCR की रिपोर्ट कहती है— बॉर्डर सिक्योरिटी और नागरिकों के संवैधानिक अधिकार एक-दूसरे के खिलाफ नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। प्रशासनिक कार्रवाई संविधान और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक होनी चाहिए। राजस्थान के बॉर्डर इलाकों में जो हो रहा है, वह गंभीर सवाल खड़े करता है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media



