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ज्ञानवापी-मथुरा-संभल विवाद: दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की मध्यस्थता ठुकराई

वाराणसी/मथुरा/संभल | BAZ News Network (BNN) । सुप्रीम कोर्ट की कोशिश नाकाम हुई। उत्तर प्रदेश के तीन बड़े धार्मिक विवादों—ज्ञानवापी, मथुरा और संभल—में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने मध्यस्थता के जरिए सुलह का प्रस्ताव ठुकरा दिया। अब सभी केस अदालत में ही लड़े जाएंगे।

News in Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने ‘समाधान समारोह 2026’ के तहत मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा था
  • ज्ञानवापी, मथुरा की शाही ईदगाह और संभल की शाही जामा मस्जिद तीनों विवादों में दोनों पक्ष राजी नहीं हुए
  • हिंदू पक्ष कहता है मंदिरों पर मस्जिदें बनाई गईं, मुस्लिम पक्ष इसे खारिज करता है
  • मथुरा केस 2020 में खारिज हुआ था, बाद में फिर से जिंदा हुआ
  • संभल में सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, 4 लोग मारे गए थे

ज्ञानवापी विवाद में मध्यस्थता क्यों नहीं मानी गई

वाराणसी का ज्ञानवापी विवाद सबसे पुराना है। हिंदू पक्ष का कहना है कि 1993 तक सोमनाथ व्यास के परिवार ने मस्जिद के तहखाने में पूजा की। मुलायम सिंह यादव की सरकार ने इसे बंद करवा दिया। उनका दावा है कि यहां प्राचीन विश्वेश्वर मंदिर था जिसे औरंगजेब ने तुड़वाकर मस्जिद बनवाई।

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मुस्लिम पक्ष इस दावे को नकारता है। उनका कहना है कि मस्जिद औरंगजेब से पहले की है और मुसलमान लगातार यहां नमाज पढ़ते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता निकालने की कोशिश की, लेकिन कोई भी पक्ष झुकने को तैयार नहीं हुआ।

मथुरा की शाही ईदगाह और कृष्ण जन्मभूमि विवाद

मथुरा में हिंदू पक्ष का दावा है कि शाही ईदगाह मस्जिद भगवान कृष्ण की जन्मस्थली पर बनी है। उन्होंने मस्जिद हटाने की मांग की है। 2020 में सिविल कोर्ट ने Places of Worship Act, 1991 के तहत केस खारिज कर दिया था। लेकिन मथुरा जिला कोर्ट ने अपील के बाद केस दोबारा जिंदा कर दिया।

हिंदू पक्ष ऐतिहासिक सबूत पेश कर रहा है कि मस्जिद मंदिर की जमीन पर खड़ी है। मुस्लिम पक्ष कानून का हवाला देता है कि 1947 के बाद किसी धार्मिक जगह का स्वरूप नहीं बदला जा सकता। लेकिन अदालती लड़ाई अब भी जारी है।

संभल मस्जिद विवाद और हिंसा का साया

संभल का मामला सबसे नया और सबसे खतरनाक साबित हुआ। एडवोकेट हरि शंकर जैन और दूसरे लोगों ने याचिका दाखिल की कि शाही जामा मस्जिद मुगल काल में मंदिर तोड़कर बनाई गई थी। नवंबर 2024 में सिविल कोर्ट ने सर्वे का आदेश दिया।

दूसरे सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी। पत्थरबाजी हुई, आगजनी हुई, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। चार लोगों की जान चली गई। इस हिंसा के बाद भी दोनों पक्ष मध्यस्थता के लिए राजी नहीं हुए।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘समाधान समारोह 2026’ के तहत तीनों केसों में सुलह की कोशिश की थी। लेकिन हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने अदालती लड़ाई जारी रखने का फैसला किया है। अब ये विवाद कानूनी रास्ते से ही आगे बढ़ेंगे।

📌 Sources & References

  • The Observer Post

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