मुस्लिम IAS को ‘पाकिस्तानी’ कहने पर BJP MLC को HC की फटकार

बेंगलुरु | BAZ News Network (BNN) । कर्नाटक हाई कोर्ट ने BJP विधान परिषद सदस्य एन. रविकुमार को आड़े हाथों लिया। कालाबुरगी की डिप्टी कमिश्नर फौज़िया तरन्नुम को ‘पाकिस्तानी’ बताने के आरोप पर जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सख्त टिप्पणी की — “मैं इस बात को माफ नहीं करूंगा कि सिर्फ इसलिए कि वो मुस्लिम हैं, उन्हें पाकिस्तान से बताया जाए।”
News in Short
- कर्नाटक HC ने BJP MLC रविकुमार को IAS अधिकारी फौज़िया तरन्नुम पर नफरती बयान के लिए फटकार लगाई
- जस्टिस नागप्रसन्ना ने कहा — धर्म के आधार पर किसी IAS की देशभक्ति पर सवाल नहीं उठाया जा सकता
- मई 2025 में कालाबुरगी प्रदर्शन के दौरान रविकुमार ने कथित तौर पर फौज़िया को ‘पाकिस्तानी’ कहा था
- कोर्ट ने माफीनामे पर भी सवाल उठाया — क्या माफी से बयान का असर खत्म हो जाता है?
- अगली सुनवाई 20 अगस्त 2026 को
फौज़िया तरन्नुम IAS पर नफरती बयान का मामला
मामला मई 2025 का है। कालाबुरगी में BJP नेता और विधान परिषद विपक्ष के नेता चालावडी नारायणस्वामी की कथित हिरासत के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। इसी दौरान रविकुमार ने कथित तौर पर फौज़िया तरन्नुम को ‘पाकिस्तान से’ बताया।
रविकुमार के वकील ने दावा किया कि MLC ने सिर्फ इतना कहा था — “सभी पुलिस अधिकारी प्रभारी मंत्री के गुलाम हैं।” लेकिन राज्य सरकार ने अदालत में साफ किया कि रविकुमार ने फौज़िया की धार्मिक पहचान को निशाना बनाया था।
कोर्ट ने कहा — फौज़िया तरन्नुम कर्नाटक की IAS अधिकारी हैं। उनके धर्म के आधार पर उनकी राष्ट्रीयता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। जज ने जोड़ा — “आप प्रदर्शन कर सकते हैं, यात्रा निकाल सकते हैं, लेकिन ऐसे बयान नहीं दे सकते।”
माफी से मिट जाता है नफरती बयान का असर?
रविकुमार ने घटना के बाद माफीनामा भेजा था। लेकिन अदालत ने इस पर भी सवाल उठाया — “आपका माफीनामा उस बयान को खत्म कर देगा जो आपने दिया?”
कोर्ट ने साफ किया — प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि किसी IAS अधिकारी के खिलाफ सांप्रदायिक बयान दिए जाएं।
मामला कालाबुरगी के एक निवासी की शिकायत पर दर्ज हुआ। भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a), 196(1)(b) और 353(2) के तहत केस चल रहा है। सुनवाई बेंगलुरु की विशेष अदालत में हो रही थी, जहां सांसद-विधायकों के मामले सुने जाते हैं।
कोर्ट ने तिरंगा विवाद पर भी टिप्पणी की। प्रदर्शनकारियों को तिरंगा लेकर मार्च करने से नहीं रोका जा सकता, अदालत ने कहा। अगर प्रशासन ने गलत तरीके से मार्च रोका तो अधिकारियों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
जस्टिस नागप्रसन्ना ने फिजूल के आपराधिक मामलों पर भी चिंता जताई। कोर्ट ने कहा — ऐसे केस बढ़ रहे हैं, जबकि गंभीर मामले लंबित पड़े हैं। हिंदुत्ववादी नेताओं द्वारा मुस्लिमों को ‘पाकिस्तानी’ कहना आम हो गया है — ये सांप्रदायिक नफरत फैलाने और भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाने का हथियार है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- Karnataka High Court proceedings



