Baz Breaking News: सुप्रीम कोर्ट से हाजी अब्दुल रज्जाक को मिली जमानत । रिहाई का रास्ता साफ

BAZ MEDIA, JABALPUR। जबलपुर के हाजी अब्दुल रज्जाक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। उच्चतम न्यायालय ने ओमती थाना में दर्ज एफआईआर क्रमांक 257/2023 से जुड़े मामले में उन्हें नियमित जमानत प्रदान कर दी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले की सुनवाई में संभावित देरी और अभियोजन पक्ष के बदले रुख को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव टू अपील क्रमांक 271/2026 के माध्यम से पहुंचा था। सुनवाई के दौरान अदालत ने मुकदमे की प्रक्रिया और उसके जल्द निपटारे की संभावनाओं को लेकर सामने आई परिस्थितियों पर विचार किया। पीठ ने स्पष्ट किया कि रिहाई निचली अदालत द्वारा निर्धारित की जाने वाली शर्तों के अधीन होगी।
20/05/2026 को प्रकाशित बाज मीडिया की खबर ➜ जमानत के आसार बरक़रार
मामले की पिछली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को हुई थी। उस दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया था कि ट्रायल को बिना रुकावट तय समय-सीमा में पूरा कराया जाएगा। सरकारी पक्ष ने उस समय धारा 311 CrPC और धारा 348 BNSS के तहत गवाहों को दोबारा बुलाने संबंधी आवेदन पर आगे नहीं बढ़ने की सहमति भी जताई थी।
इसके अलावा, सह-अभियुक्त से संबंधित हस्तलेख विशेषज्ञ की रिपोर्ट को लेकर भी कार्यवाही को रोकने की स्थिति नहीं होने की बात कही गई थी। इससे मामले की सुनवाई जल्द पूरी होने की संभावना बनी थी।
14/02/2026 को प्रकाशित बाज मीडिया की खबर ➜ हाईकोर्ट में सुनवाई जारी
अभियोजन के रुख में बदलाव पर अदालत ने लिया संज्ञान
ताजा सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी और अभियोजन पक्ष ने पूर्व में दिए गए आश्वासन से अलग रुख अपनाया। गवाहों को दोबारा समन करने और विशेषज्ञ की हस्तलेख रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर शामिल करने की मांग सामने रखी गई।
अदालत ने माना कि इन प्रक्रियात्मक कदमों के कारण मामले की सुनवाई और अंतिम निर्णय में और समय लग सकता है। ऐसी स्थिति में लंबे समय तक हिरासत में रखने के बजाय जमानत देना उचित माना गया।
सुप्रीम कोर्ट ने रखी सुनवाई में निरंतरता की शर्त
पीठ ने हाजी अब्दुल रज्जाक को नियमित जमानत देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि यदि वे स्वयं मुकदमे की सुनवाई में देरी करते हैं या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालते हैं, तो अभियोजन पक्ष अथवा ट्रायल कोर्ट उचित आदेश के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
इस तरह अदालत ने जमानत के साथ यह सुनिश्चित किया है कि मामले की सुनवाई प्रभावित न हो और न्यायिक प्रक्रिया निर्धारित तरीके से आगे बढ़ती रहे।
हाजी अब्दुल रज्जाक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता पवन रेले, अनमोल खेता और शरिक़ अकील फारूकी ने पैरवी की। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद मामले में हाजी अब्दुल रज्जाक के लिए बड़ी कानूनी राहत का रास्ता साफ हुआ



