गोमांस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के मोहम्मद आरिफ को दी जमानत

गांधीनगर | BAZ News Network (BNN) । 10 महीने हिरासत में रहने के बाद आखिरकार गुजरात के मोहम्मद आरिफ अब्दुल रज़ाक समोल को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली। 23 किलो गोमांस रखने के आरोप में 3 जनवरी को गिरफ्तार किए गए आरिफ को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल पांचोली की बेंच ने 14 अक्टूबर को जमानत दे दी।
News in Short
- मोहम्मद आरिफ समोल को सुप्रीम कोर्ट ने गोमांस मामले में 10 महीने बाद जमानत दी
- पुलिस ने आरिफ के घर के पास खुले प्लॉट से 23 किलो गोमांस बरामद किया था
- कोर्ट ने कहा- सिर्फ पुराने आपराधिक मामले मौजूदा केस में गुनाह की सबूत नहीं
- डिफेंस ने दलील दी कि न तो प्लॉट आरिफ का था, न कार उसकी थी
- राज्य सरकार ने 5 पुराने आपराधिक केस का हवाला देकर जमानत का विरोध किया था
गोमांस मामले में क्या था आरोप
पुलिस का कहना है कि आरिफ के घर के पास खुले प्लॉट से 23 किलो गोमांस बरामद हुआ। आरोप है कि यह गोमांस गैरकानूनी तरीके से लाया गया, एक स्विफ्ट कार में ट्रांसपोर्ट किया गया और खुदरा बिक्री के लिए प्लॉट पर रखा गया था। पुलिस के अनुसार, छापेमारी के दौरान आरिफ मौके से भाग गया था।
आरिफ पर गुजरात एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट, 2011 की धारा 5(1), 6(b), 8(2), 8(4) और 10, भारतीय न्याय संहिता की धारा 325 और गुजरात पुलिस एक्ट की धारा 119 के तहत केस दर्ज किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ पुराने आपराधिक मामले मौजूदा केस में गुनाह की निश्चित सबूत नहीं हो सकते। कोर्ट ने कहा, “महज इसलिए कि अपीलकर्ता के खिलाफ पुराने मामले हैं, यह मौजूदा केस में गुनाह की निश्चित सबूत नहीं होगी।”
बेंच ने यह भी नोट किया कि कथित गोमांस आरिफ के घर के पास खुले प्लॉट से बरामद हुआ था, जहां दूसरे लोगों की भी पहुंच थी। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है और ट्रायल शुरू हो गया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह केस की मेरिट पर कोई राय नहीं दे रहा, लेकिन आरिफ नियमित जमानत का हकदार है।
डिफेंस की दलील और राज्य का विरोध
आरिफ के वकील ने दलील दी कि प्रॉसिक्यूशन का केस मुख्य रूप से परिस्थितिजन्य सबूतों और अनुमान पर आधारित है। उसे कथित जगह से गिरफ्तार नहीं किया गया था, और गोमांस खुले प्लॉट से मिला जहां दूसरों की भी पहुंच थी। डिफेंस ने कहा कि प्लॉट आरिफ का नहीं था और कथित तौर पर गोमांस ट्रांसपोर्ट करने वाली स्विफ्ट कार भी उसकी नहीं थी।
राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए आरिफ के खिलाफ पांच पुराने आपराधिक मामलों का हवाला दिया। राज्य ने दलील दी कि अगर रिहा किया गया तो वह ऐसी गतिविधियां दोहरा सकता है। राज्य ने यह भी कहा कि ट्रायल अंतिम चरण में है और दो महीने में खत्म हो जाएगा।
3 जनवरी को गिरफ्तार किए गए मोहम्मद आरिफ समोल ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने से पहले 10 महीने हिरासत में गुजारे। कोर्ट ने पुराने केस को मौजूदा गुनाह की सबूत मानने से इनकार करते हुए उसे जमानत दे दी।
📌 Sources & References
- Maktoob Media



