UCC के विरोध में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की महिला इकाई के नेतृत्व में मुस्लिम ख्वातीन ने सौंपा ज्ञापन

जबलपुर। मध्यप्रदेश में लागू किए जा रहे समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर मुस्लिम समाज की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, जबलपुर की हल्का-ए-ख्वातीन इकाई के नेतृत्व में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाएं और युवतियां कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं। यहां राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर UCC को वापस लेने और मुस्लिम समाज के मजहबी एवं संवैधानिक अधिकारों की हिफाजत की मांग की गई।

ज्ञापन में कहा गया कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिंदगी गुजारने की आजादी देता है। मुस्लिम महिलाओं का कहना है कि UCC के कई प्रावधान मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत से जुड़े मामलों को प्रभावित करते हैं, इसलिए उन्हें लेकर समाज में गंभीर आपत्तियां हैं।

नाजिया बानो, हल्का-ए-ख्वातीन, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, जबलपुर ने कहा कि नए कानून के तहत लाए गए UCC की वे सख्त मुखालफत करती हैं। उन्होंने कहा कि संविधान हर नागरिक को अपने धर्म को मानने और उसके प्रचार-प्रसार की आजादी देता है, लेकिन UCC के प्रावधान मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल का कारण बन रहे हैं। उन्होंने UCC को वापस लेने की मांग की और कहा कि यह कानून मुस्लिम समाज की धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है।

वहीं, तैय्यबा अंबर, हल्का-ए-ख्वातीन, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, जबलपुर ने कहा कि भारत की खासियत ही यह है कि यहां अलग-अलग धर्मों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं और अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई कानून, जिससे लोगों के लिए अपनी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक जिंदगी गुजारना मुश्किल हो या सामाजिक शांति प्रभावित हो, उसे लागू करने से पहले सभी धर्मों और समुदायों की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि UCC के कई प्रावधान शरीयत के खिलाफ हैं और मुस्लिम समाज के लिए चिंता का विषय हैं। उनका कहना है कि संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है, इसलिए कानून बनाते समय इस संवैधानिक अधिकार का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
महिलाओं ने कहा कि भारत की पहचान उसकी ‘अनेकता में एकता’ है। देश में अलग-अलग मजहबों और संस्कृतियों के लोग अपनी-अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ रहते आए हैं। ऐसे में किसी भी कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों की धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों की हिफाजत सुनिश्चित की जानी चाहिए।
ज्ञापन में मांग की गई कि प्रस्तावित UCC को वापस लिया जाए, मुस्लिम समाज की आपत्तियों और सुझावों को गंभीरता से सुना जाए तथा मुस्लिम पर्सनल लॉ और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों की हिफाजत सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान शकीला बेगम, खदीजा बानो, कनीस बानो, मुसर्रत जहां, अनीसा अंसारी, नाजिया बानो सहित बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज की महिलाएं और युवतियां मौजूद रहीं।



