Advertisement
News

आटो पायलट मोड में जबलपुर शहर! मजाक बना प्रशासन – बढ़ती अराजकता ने दी चेतावनी

जबलपुर। मध्य प्रदेश का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से समृद्ध शहर जबलपुर आज बदहाली और अव्यवस्था की चपेट में है। प्रशासनिक तंत्र मानो “आटो पायलट मोड” पर चल रहा है। शहर में कोई दिशा नहीं, कोई नियंत्रण नहीं — अधिकारी एसी कमरों में फाइलें पलट रहे हैं, नेता सम्मान समारोहों में व्यस्त हैं, और विपक्ष बिजली मीटर और प्रेस बयानबाज़ी तक सीमित है। परिणामस्वरूप, शहर अराजकता, अपराध और अव्यवस्था का शिकार होता जा रहा है, और जनता रोज़मर्रा की परेशानियों से जूझ रही है।

सब लील रहा ई रिक्शा ….

ई रिक्शा जो रक्तबीज की तरह सिर्फ बढ़ रहे हैं. गोहलपुर चौराहे से मालवीय चौक तक हर दिन ईरिक्शा की रैली नजर आ रही है. मिलौनीगंज से आगे बढ़ने पर हालत यह है की कोई भी सौ मीटर बिना भीषण जाम से गुजरे पूरा नहीं होता. जब शहरवासी जाम से बचने सहायक मार्गों और गलियों में दाखिल हो रहे हैं, वहां ईरिक्शा फंसे मिल रहे हैं. समस्या यह नहीं हैं की ई रिक्शा की समस्या है, समस्या यह है की जिला प्रशासन और यातायात विभाग इसे समस्या नहीं मान रहा है. जिसका नतीजा हैं की आजतक कोई विस्तृत कार्ययोजना तो दूर ईरिक्शा को लेकर प्रशासन कोई सपष्ट नीति तक नहीं बना पाया है.

विज्ञापन

यातायात नियंत्रण से बाहर …

जबलपुर की सड़कें दुर्घटनाओं का पर्याय बनती जा रही हैं। बीते कुछ महीनों में कई दर्दनाक हादसे सामने आए कहीं लापरवाह ड्राइविंग से मासूमों की जान गई, तो कहीं अवैध पार्किंग और गड्ढों ने जानलेवा रूप ले लिया। मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति और तेज रफ्तार वाहनों का आतंक हर चौराहे पर दिखता है।   नर्मदा रोड, दमोह नाका, राइट टाउन और विजय नगर क्षेत्र में ट्रैफिक नियंत्रण लगभग नाममात्र का रह गया है। इन इलाकों में आए दिन टकराव, झगड़े और हादसे होते हैं, लेकिन किसी को इसकी फिक्र नहीं। तो दूसरी तरफ शहर के व्यापारिक क्षेत्र मिलौनीगंज, सराफा, गंजीपुरा, करमचंद चौक, बड़ा फुहारा, निवाड़गंज, रांझी के बड़ा पत्थर आदि क्षेत्र, गोहलपुर का चार खम्बा और रजा चौक क्षेत्र में यातायात पूरी तरह ठप्प हो चुका है. जिसका प्रत्यक्ष असर यहां के बाजारों पर पड़ा है. 

बिजली व्यवस्था तारों से मौत तक …

विद्युत मेंटिनेंस बीते 25 सालों के सबसे निचले स्तर पर है. नतीजा यह है की सिविक सेंटर और गोरखपुर बाजार जैसे ह्दय स्थलों कारोबार समय में अचानक लाईट गोल होना आम हैं. शहर के कई मोहल्लों में खुले और टूटे हुए बिजली के तार मौत का जाल बने हुए हैं। बरसात के मौसम में कई हादसे इन खतरनाक वायरिंग की वजह से हो चुके हैं। प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई बार शिकायतें दर्ज होने के बावजूद सुधार कार्य या तो अधूरे रहते हैं या लंबे समय तक टलते रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि “नगर निगम और बिजली विभाग तब ही जागते हैं, जब कोई बड़ी घटना हो जाती है।”

विज्ञापन

कानून व्यवस्था पर सवाल ….

जबलपुर में चेन स्नेचिंग, नशे की तस्करी, हत्या, लूट और ठगी जैसी घटनाएं आम हो चुकी हैं। कुछ ताज़ा घटनाएँ प्रेम संबंधों में विवाद के चलते महिला की चाकू मारकर हत्या। संपत्ति विवाद में पिता द्वारा बेटे पर गोली चलाना। 85 किलो गांजा जब्त, चार आरोपी गिरफ्तार। सरेराह छीना-झपटी और बाइक चोरी के कई मामले दर्ज। इन घटनाओं से साफ है कि शहर में अपराधी मानसिकता फिर से सिर उठा रही है और पुलिस का नियंत्रण कमजोर पड़ा है।

नेता जनसमस्याओं से बेखबर

शहर में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की प्राथमिकताएँ अब जनसेवा से ज्यादा दिखावे और औपचारिकताओं में बदल चुकी हैं। अधिकारी एसी दफ्तरों में बैठकर फाइलों पर हस्ताक्षर कर रहे हैं, जबकि जमीनी अमला लापरवाह है। नेता-मंत्री सम्मान समारोहों, फोटो सेशन और उद्घाटनों में व्यस्त हैं, वहीं विपक्ष केवल मीटर, बिल और बयानबाज़ी में उलझा है। तीनों ही पक्ष  सत्ता, प्रशासन और विपक्ष जनता से दूर हो चुके हैं।

Jabalpur Baz

बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
Back to top button

You cannot copy content of this page