बरगी डैम हादसा : “एक पल में उजड़ गया घर…” — सिविल लाइन के सैयद रियाज हुसैन की आंखों में आज भी तैर रहा है बरगी का वो खौफनाक मंज

जबलपुर। बरगी बांध की शांत लहरों के बीच बिताने निकला एक सुकून भरा दिन, सैयद रियाज हुसैन के लिए ज़िंदगी का सबसे बड़ा ग़म बन गया। 72 साल के इस बुज़ुर्ग की आंखों में अब सिर्फ पानी नहीं, बल्कि उस हादसे की दर्दनाक यादें तैर रही हैं, जिसने उनकी पूरी दुनिया बदल दी।
🌊 खुशियों से शुरू हुआ दिन, मातम में बदला
सैयद रियाज हुसैन अपने परिवार के साथ बरगी डैम घूमने गए थे। मौसम सामान्य था, माहौल खुशनुमा… लेकिन अचानक आए तेज़ तूफान ने सब कुछ छीन लिया।
कुछ ही मिनटों में क्रूज पलट गया — और देखते ही देखते हंसी-खुशी का सफर चीखों और मातम में बदल गया।
इस हादसे में उनकी पत्नी रेशमा सैयद और समधन शमीम फातिमा जैदी हमेशा के लिए उनसे बिछड़ गईं।
रियाज हुसैन खुद और उनका 13 साल का नाती घंटों बाद रेस्क्यू टीम द्वारा सुरक्षित निकाले गए, लेकिन उनके दिल में जो खालीपन रह गया, उसे कोई नहीं भर सकता।
😢 “मैं उन्हें बचा नहीं सका…” — टूट चुके हैं रियाज हुसैन
घर में पसरा सन्नाटा, दीवारों पर टंगी तस्वीरें, और हर कोना उनकी याद दिला रहा है।
रियाज हुसैन की आवाज़ कांप जाती है जब वे कहते हैं —
“मेरी आंखों के सामने सब हुआ… मैं उन्हें बचा नहीं सका…”
एक बुज़ुर्ग, जिसने पूरी उम्र अपने परिवार के लिए मेहनत की, आज खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
🤝 मुख्यमंत्री ने दी हिम्मत.. सरकार पहुंची दरवाज़े तक

मुख्यमंत्री Mohan Yadav खुद उनके घर पहुंचे, ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया।
इस दौरान Jagdish Devda, Rakesh Singh सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की।
🚨 सवाल अब भी खड़े हैं…
रेस्क्यू ऑपरेशन में कई लोगों की जान बचा ली गई, लेकिन यह हादसा कई सवाल छोड़ गया है —
क्या सुरक्षा इंतज़ाम पर्याप्त थे?
क्या मौसम की चेतावनी को नजरअंदाज किया गया?
और सबसे बड़ा सवाल — क्या यह हादसा टाला जा सकता था?
🕯️ एक परिवार की खामोश चीख
सैयद रियाज हुसैन का घर आज सिर्फ एक मकान नहीं, बल्कि एक दर्द की कहानी बन गया है।
जहां पहले हंसी गूंजती थी, वहां अब खामोशी है…
जहां साथ बैठकर चाय पी जाती थी, वहां अब यादें हैं…
बरगी का ये हादसा सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक ऐसी सच्चाई है, जिसने एक बुज़ुर्ग से उसका सबसे बड़ा सहारा छीन लिया।



