चुनाव के 10 साल बाद हारे उम्मीदवार को जीता घोषित किया

चेन्नई | 23 May 2026 BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in
News in Short
- मद्रास हाईकोर्ट ने 2016 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का नतीजा 10 साल बाद पलटा
- राधापुरम सीट पर DMK के M. अप्पावु को 103 वोटों से असली विजेता घोषित किया
- 203 पोस्टल बैलट की गिनती में गड़बड़ी — AIADMK उम्मीदवार को पहले 49 वोट से जीत मिली थी
मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव के करीब एक दशक बाद एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। तमिलनाडु विधानसभा के पूर्व स्पीकर M. अप्पावु को राधापुरम (तिरुनेलवेली) सीट का असली विजेता घोषित किया गया। 2016 के चुनाव में DMK टिकट पर खड़े अप्पावु को AIADMK के I.S. इनबदुराई से 49 वोटों से हार मानी गई थी।
203 पोस्टल बैलट पर उठे सवाल
अप्पावु ने इलेक्शन पिटीशन दायर कर आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान 203 पोस्टल बैलट गलत तरीके से रद्द कर दिए गए। जस्टिस जी. जयचंद्रन ने याचिका को मंजूर करते हुए दोबारा गिनती का आदेश दिया। रिकाउंट में अप्पावु को 153 वैध पोस्टल वोट मिले, जबकि इनबदुराई को सिर्फ एक। इस गिनती के बाद अप्पावु 103 वोटों से आगे निकल गए।
सुप्रीम कोर्ट में अटका रहा मामला
2019 में हाईकोर्ट ने रिकाउंट का फैसला दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इनबदुराई की स्पेशल लीव पिटीशन पर नतीजों की घोषणा पर रोक लगा दी। मामला छह साल तक लटका रहा। मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने केस खारिज कर दिया क्योंकि विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो चुका था।
10 साल की देरी पर कड़ी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने चुनावी विवादों में देरी को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया। कोर्ट ने कहा, “रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1951 की धारा 86(7) का पालन न करना लोकतंत्र की असली भावना को कमजोर करता है।” जस्टिस जयचंद्रन ने टिप्पणी की, “अगर अदालतें अपने ही निर्देशों को नजरअंदाज करती रहीं, तो डर है कि देश भी उन तानाशाही देशों की राह पर चल सकता है जिन्हें 75 साल पहले हमारे साथ आजादी मिली थी।”
राधापुरम के मतदाताओं के साथ अन्याय
कोर्ट ने फैसले में कहा कि राधापुरम के मतदाताओं के साथ “न्याय का घोर मजाक” हुआ। “राधापुरम विधानसभा क्षेत्र के लोगों को ऐसे शख्स को अपना प्रतिनिधि मानने पर मजबूर किया गया जो वास्तव में चुना नहीं गया था,” फैसले में लिखा गया।
अब लेजिस्लेटिव असेंबली सचिवालय को अप्पावु का नाम सभी आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। इनबदुराई को 2016-2021 कार्यकाल के लिए MLA पेंशन नहीं मिलेगी। हालांकि कोर्ट ने उन्हें अयोग्य घोषित नहीं किया है।
📌 Sources & References
- Live Law
- Maktoob Media



