NationalNews

पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट से कटे नाम, राशन भी गया

कोलकाता | 17 मई 2025 | BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in

News in Short

  • पश्चिम बंगाल में SIR के तहत वोटर लिस्ट से कटे नामों के राशन कार्ड निष्क्रिय होंगे
  • करीब 27.16 लाख वोटर्स की छंटनी हुई, हज़ारों लोग प्रभावित
  • ओवैसी ने कहा — सरकारी योजना वोट का इनाम नहीं, हक़ है

राशन लाभ से महरूम होने का ख़तरा हज़ारों परिवारों पर मंडरा रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार ने फ़ैसला किया है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं, उनके राशन कार्ड निष्क्रिय कर दिए जाएंगे। यह क़दम Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद उठाया गया है।

विज्ञापन

राशन लाभ पर पाबंदी — किन्हें होगा असर

खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के आदेश के मुताबिक, जिन लोगों को “ग़ायब”, “स्थानांतरित”, “डुप्लीकेट” या “मृत” के तौर पर चिह्नित कर वोटर लिस्ट से निकाला गया है, उनके राशन कार्ड निष्क्रिय कर दिए जाएंगे। Public Distribution System (PDS) से वे बाहर हो जाएंगे। यह प्रक्रिया 15 जून तक पूरी होनी है।

हालांकि, जिन लोगों ने अपील दायर की है या Citizenship Amendment Act (CAA) के तहत आवेदन किया है, उन्हें तब तक लाभ मिलता रहेगा जब तक उनका मामला निपट नहीं जाता।

27 लाख वोटर्स की हुई छंटनी

SIR प्रक्रिया के “Logical Discrepancy” चरण में करीब 27.16 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए। विपक्षी दलों और प्रभावित लोगों ने आरोप लगाया कि नाम में छोटी ग़लती, डेटा में मामूली अंतर और सही नोटिस न मिलने की वजह से असली वोटर्स भी बाहर हो गए। पुरानी और नई सूची को जोड़ने में भी दिक्क़तें आईं।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई को SIR को क़ानूनी रूप से सही ठहराया था, लेकिन साफ़ किया कि चुनाव आयोग की जांच सिर्फ़ चुनावी मक़सद के लिए है, नागरिकता तय करने के लिए नहीं।

अन्नपूर्णा भंडार योजना में भी रुकावट

इससे पहले, महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा था कि जिनके नाम SIR में कटे हैं और अपील लंबित है, उन्हें प्रस्तावित अन्नपूर्णा भंडार योजना का लाभ नहीं मिलेगा। यह योजना लक्ष्मीर भंडार की जगह आएगी।

ओवैसी की सख़्त आपत्ति

AIMIM के सदर और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने इस फ़ैसले को ग़लत बताते हुए कहा, “सरकारी योजनाएं वोटरों को इनाम नहीं हैं। ये सभी पात्र नागरिकों के लिए हैं।” उन्होंने सवाल किया कि राशन और कल्याण का हक़ किसी के वोटर लिस्ट में होने पर क्यों निर्भर करे।

ओवैसी ने कहा कि इस नीति का सबसे ज़्यादा असर ग़रीबों, महिलाओं, अनुसूचित जातियों और मुसलमानों पर पड़ेगा। “यह क़दम जांच कम, लाभार्थियों की संख्या घटाने की कोशिश ज़्यादा लगता है,” उन्होंने कहा।

सोशल मीडिया पर नाराज़गी

सोशल मीडिया यूज़र्स ने भी इस फ़ैसले पर नाराज़गी जताई। पत्रकार सौम्या रमेश ने लिखा, “भारत का नया हथियार बंदूक-बम नहीं, यह काग़ज़ है जो तय करता है कि आप इस देश के हिस्से हैं या नहीं। पहले कहा सिर्फ़ वोट, अब खाना भी वोट से जोड़ दिया।”

एक यूज़र ने पूछा, “वोटर ID कब से कल्याण योजनाओं का आधार बन गया? अपीलीय ट्रिब्यूनल का काम अधूरा है और लाभार्थियों को पहले ही बाहर कर दिया जा रहा है।”

K. Sanjay Iyer ने लिखा, “CEC और CJI पर शर्म आनी चाहिए जिन्होंने इसे संभव बनाया। कितने ग़रीब लोग इस वजह से परेशान होंगे?”

SIR प्रक्रिया में कुल मिलाकर करीब 90 लाख नाम हटाए गए थे। विपक्ष और नागरिक संगठनों ने प्रक्रिया में गड़बड़ी और तार्किक विसंगतियों के आरोप लगाए हैं। अब राशन से जोड़ने के इस फ़ैसले ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

📌 Sources & References

  • सोशल मीडिया

विज्ञापन
Back to top button

You cannot copy content of this page