
बाड़मेर | BAZ Media Bhopal Division । राजस्थान के बाड़मेर में 6 मस्जिदों और मदरसों को एक दिन के अंदर जमीन खाली करने या जवाब देने का नोटिस मिला। सिविल राइट्स की संस्था APCR ने इसे कानूनी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन बताया। नोटिस 11 जून को जारी हुआ, लेकिन पहुंचा 17 जून की शाम को — सिर्फ 24 घंटे का वक्त दिया गया।
News in Short
- बाड़मेर के गढ़ा रोड तहसील इलाके में 6 मस्जिदों-मदरसों को बेदखली का नोटिस
- 18 जून तक जमीन खाली करने या तहसील में हाजिर होने का आदेश
- APCR ने कहा — संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25, 26 का उल्लंघन
- मस्जिद कमेटियों को कानूनी मदद लेने का भी वक्त नहीं मिला
- संस्था ने कार्रवाई रोकने और न्यायिक जांच की मांग की
बाड़मेर मस्जिद नोटिस — 11 जून का आदेश 17 जून शाम पहुंचा
APCR राजस्थान के अध्यक्ष एडवोकेट सैयद सादत अली ने बताया कि मस्जिद प्रबंधन कमेटियों को नोटिस मिला — या तो 18 जून तक जमीन खाली करो, या उसी दिन तहसील दफ्तर में हाजिर होकर बताओ कि बेदखली क्यों न की जाए। नोटिस की तारीख थी 11 जून, लेकिन पहुंचा 17 जून की शाम को। सिर्फ 24 घंटे से भी कम वक्त — न कानूनी मदद लेने का मौका, न दस्तावेज जुटाने का।
अली ने कहा — किसी भी धार्मिक स्थल या संपत्ति के खिलाफ कार्रवाई से पहले प्रभावित पक्ष को अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलना चाहिए। सिर्फ एक दिन का नोटिस देना कानूनी प्रक्रिया का साफ उल्लंघन है।
संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 25, 26 का हनन — APCR
APCR ने कहा कि यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है — खासकर ‘audi alteram partem’ यानी किसी भी फैसले से पहले दूसरे पक्ष को सुनने के सिद्धांत के। संस्था ने दावा किया कि नोटिस संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार), अनुच्छेद 25 (धर्म की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 26 (धार्मिक संस्थाओं के अधिकार) का उल्लंघन करता है।
APCR ने सुप्रीम कोर्ट के बेदखली और विध्वंस से जुड़े फैसलों का हवाला दिया — प्रभावित पक्ष को पर्याप्त नोटिस और अदालत जाने का वक्त मिलना जरूरी है। संस्था का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई इन मानकों पर खरी नहीं उतरती और कानून के राज को कमजोर करती है।
संस्था ने चिंता जताई कि धार्मिक संस्थाओं के मामले में एक खास पैटर्न दिख रहा है — एक साथ कई मस्जिदों को एक जैसे नोटिस। अगर जमीन के मालिकाना हक या निर्माण को लेकर सवाल हैं, तो उन्हें कानूनी तरीके, निष्पक्ष जांच और अदालती समीक्षा से हल किया जाना चाहिए — ऐसे नोटिस से नहीं जो प्रभावित पक्ष को खुद का बचाव करने का मौका ही न दें।
APCR ने तमाम बेदखली कार्रवाई फौरन रोकने, कानूनी प्रक्रिया और अदालती दिशा-निर्देशों का पालन करने और गारंटी देने की मांग की है कि बिना निष्पक्ष सुनवाई और न्यायिक जांच के कोई विध्वंस या बेदखली नहीं होगी। संस्था ने कहा — अगर इन नोटिसों के आधार पर कोई एकतरफा या जबरन कार्रवाई हुई, तो वे प्रभावित मस्जिद कमेटियों के साथ कानूनी उपाय अपनाएंगे।
📌 Sources & References
- Maktoob Media



