Advertisement
JabalpurNews

BAZ Report: बरगी क्रूज हादसे की जांच में नया मोड़: पेनड्राइव में कैद हैं दुर्घटना के अहम सबूत, प्रत्यक्षदर्शी ने आयोग को सौंपे वीडियो और 14 बिंदुओं की शिकायत

जबलपुर। बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए भीषण क्रूज हादसे की न्यायिक जांच के दौरान एक नया और महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। हादसे के प्रत्यक्षदर्शी एवं बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बरगी निवासी नीरज मिश्रा ने न्यायिक जांच आयोग के समक्ष वीडियो साक्ष्यों से भरी एक पेनड्राइव, 14 बिंदुओं की विस्तृत लिखित शिकायत और अपना बयान प्रस्तुत किया है। इन नए साक्ष्यों ने न केवल हादसे के कारणों बल्कि हादसे के बाद हुए राहत एवं बचाव कार्यों की गुणवत्ता, प्रशासनिक तैयारियों और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार आयोग को सौंपे गए वीडियो और दस्तावेजों में दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर उत्पन्न हुई परिस्थितियों, राहत कार्यों की वास्तविक स्थिति तथा मौके पर उपलब्ध संसाधनों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य दर्ज हैं। इन साक्ष्यों के सामने आने के बाद जांच का दायरा और व्यापक हो गया है।

एम्बुलेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल

शिकायत में सबसे गंभीर आरोप आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था को लेकर लगाए गए हैं। नीरज मिश्रा का दावा है कि हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुंची 108 एम्बुलेंस में चालक के अतिरिक्त कोई डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ या प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था।

विज्ञापन

शिकायतकर्ता के अनुसार एम्बुलेंस चालक ने स्वयं यह स्वीकार किया कि वह अकेले मौके पर पहुंचा था। इस कथित स्वीकारोक्ति का वीडियो भी आयोग को सौंपा गया है। यदि जांच में वीडियो की पुष्टि होती है तो यह सवाल खड़ा होगा कि 13 लोगों की जान लेने वाले इतने बड़े हादसे के दौरान आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं किस स्तर पर कार्य कर रही थीं।

नीरज मिश्रा का यह भी आरोप है कि पानी से बाहर निकाले गए कई लोगों में जीवन के संकेत मौजूद थे, लेकिन उन्हें समय पर सीपीआर, ऑक्सीजन सपोर्ट और प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी। ऐसे में जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी हो सकता है कि क्या कुछ लोगों की जान समय रहते चिकित्सकीय सहायता मिलने पर बचाई जा सकती थी।

राहत और बचाव कार्यों की कार्यप्रणाली पर भी उठे सवाल

आयोग को सौंपी गई 14 बिंदुओं की शिकायत में केवल चिकित्सा व्यवस्था ही नहीं बल्कि पूरे राहत एवं बचाव अभियान की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं।

शिकायत के अनुसार दुर्घटना के शुरुआती चरण में स्थानीय ग्रामीणों और आसपास मौजूद लोगों ने ही बचाव कार्य शुरू किया, जबकि राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीम कथित रूप से देरी से घटनास्थल पर पहुंची। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शुरुआती महत्वपूर्ण समय में प्रशिक्षित आपदा प्रबंधन दल की अनुपलब्धता के कारण राहत कार्य प्रभावित हुआ।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि घटनास्थल पर आधुनिक मोटर बोट और पर्याप्त बचाव संसाधनों की कमी थी। इसके अलावा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण राहत अभियान अपेक्षित गति से नहीं चल सका। शिकायतकर्ता का मानना है कि यदि शुरुआती घंटों में बेहतर संसाधन और प्रशिक्षित दल उपलब्ध होते तो राहत कार्य और अधिक प्रभावी साबित हो सकता था।

सुरक्षा मानकों की अनदेखी के आरोप

नीरज मिश्रा द्वारा आयोग को सौंपे गए दस्तावेजों में क्रूज संचालन से जुड़े सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि पर्यटकों से पूरा टिकट शुल्क वसूला गया, लेकिन उनके लिए किसी प्रकार का सामूहिक बीमा नहीं कराया गया था। इसके अलावा क्रूज पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा उपकरण, आपातकालीन संसाधन और अन्य आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं थीं।

इन आरोपों ने जांच को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है। अब सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि क्रूज आखिर डूबा कैसे, बल्कि यह भी है कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए निर्धारित मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

आयोग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं वीडियो साक्ष्य

कानूनी और प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि प्रत्यक्षदर्शी द्वारा उपलब्ध कराए गए वीडियो, दस्तावेज और लिखित शिकायत न्यायिक जांच आयोग के लिए महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकते हैं।

यदि इन साक्ष्यों की पुष्टि होती है तो आयोग को यह तय करना होगा कि हादसे के दौरान और उसके बाद विभिन्न विभागों, एजेंसियों तथा संबंधित अधिकारियों ने निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप कार्य किया था या नहीं। साथ ही जवाबदेही तय करने की दिशा में भी यह सामग्री महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

13 लोगों की गई थी जान

उल्लेखनीय है कि 30 अप्रैल की शाम लगभग 5:30 बजे मैकल रिसॉर्ट से 41 पर्यटकों को लेकर निकला क्रूज बरगी बांध के बैकवाटर क्षेत्र में डूब गया था। इस दर्दनाक हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 पर्यटकों को सुरक्षित बचा लिया गया था।

यह हादसा प्रदेश के सबसे बड़े जल पर्यटन हादसों में से एक माना जा रहा है और इसके बाद से ही सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा पर्यटन संचालन से जुड़े नियमों पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी।

जल्द सरकार को सौंपी जाएगी रिपोर्ट

न्यायिक जांच आयोग अब तक पर्यटन विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक, रिसॉर्ट प्रबंधन, क्रूज चालक और अन्य संबंधित पक्षों के बयान दर्ज कर चुका है। आयोग को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपनी है।

ऐसे में प्रत्यक्षदर्शी नीरज मिश्रा द्वारा प्रस्तुत किए गए नए वीडियो साक्ष्य, दस्तावेज और आरोप जांच की दिशा तथा अंतिम निष्कर्षों को प्रभावित कर सकते हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आयोग इन दावों की जांच के बाद किन निष्कर्षों पर पहुंचता है और क्या हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो पाती है।

विज्ञापन
Back to top button

You cannot copy content of this page