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मौलाना अबुल कलाम आजाद वार्ड: कांग्रेस के सबसे पुराने गढ़ को फिर मजबूत करने की जिम्मेदारी ‘तौफीक’ चंकी खान के कंधों पर

जबलपुर | BAZ News Network (BNN)

कांग्रेस संगठन ने युवा नेता तौफीक चंकी खान को उत्तर-मध्य विधानसभा क्षेत्र के महत्वपूर्ण मौलाना अबुल कलाम आजाद वार्ड क्रमांक 36 का प्रभारी नियुक्त किया है। संगठन द्वारा दी गई इस नई जिम्मेदारी को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह वार्ड कभी कांग्रेस का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में यहां पार्टी की पकड़ कमजोर होती दिखाई दी है।

नेतृत्व का जताया आभार, संगठन मजबूत करने का संकल्प

नई नियुक्ति पर तौफीक चंकी खान ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया है। उन्होंने पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं उत्तर-मध्य विधायक लखन घनघोरिया, नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, पार्षदों तथा उत्तर-मध्य विधानसभा के कार्यकर्ताओं का धन्यवाद किया।

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तौफीक चंकी खान ने कहा कि वे इस जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ करेंगे तथा संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए लगातार कार्य करेंगे। उन्होंने वार्ड में कांग्रेस की सक्रियता बढ़ाने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का भरोसा भी जताया।

संगठन में सक्रिय भूमिका का मिला पुरस्कार

गौरतलब है कि तौफीक चंकी खान इससे पहले शहीद अब्दुल हमीद वार्ड के उपाध्यक्ष तथा कांग्रेस आईटी सेल में प्रदेश महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संगठनात्मक गतिविधियों में उनकी सक्रिय भूमिका और युवा कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पकड़ को देखते हुए पार्टी ने उन्हें यह अहम दायित्व सौंपा है।

राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है मौलाना आजाद वार्ड

राजनीतिक दृष्टि से मौलाना अबुल कलाम आजाद वार्ड उत्तर-मध्य विधानसभा का सबसे चर्चित वार्ड माना जाता है। मुस्लिम बाहुल्य आबादी वाले इस वार्ड को लंबे समय तक कांग्रेस का अभेद्य किला माना जाता रहा, लेकिन समय के साथ यहां के राजनीतिक समीकरण बदलते गए। यह शहर का संभवतः एकमात्र ऐसा मुस्लिम बहुल वार्ड है जहां भाजपा भी लगातार अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराती रही है। बीते लगभग 25 वर्षों में भाजपा के जरताज अहमद दो बार और रिजवान एक बार पार्षद निर्वाचित हो चुके हैं।

पिछले चुनाव में एआईएमआईएम ने बढ़ाई कांग्रेस की चिंता

पिछले नगर निगम चुनाव में इस वार्ड की राजनीति ने नया मोड़ लिया था, जब एआईएमआईएम के युवा प्रत्याशी आरिफ ने पहली बार चुनाव लड़ते हुए कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा दी थी। स्थिति यह रही कि कांग्रेस को अपनी सीट बचाने के लिए पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। अंततः कांग्रेस जीत तो गई, लेकिन जीत-हार का अंतर 200 वोटों से भी कम रहा। इस परिणाम ने स्पष्ट संकेत दिया कि वार्ड में नई राजनीतिक शक्तियां तेजी से उभर रही हैं।

चार साल से संगठनात्मक गतिविधियां रहीं कमजोर

स्थानीय राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिछले चार वर्षों में संगठनात्मक स्तर पर कांग्रेस की सक्रियता इस वार्ड में बेहद सीमित रही है। बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क अभियान और नियमित संगठनात्मक कार्यक्रम लगभग न के बराबर दिखाई दिए। ऐसे में आगामी नगरीय निकाय चुनावों को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने वार्ड में नए सिरे से संगठन खड़ा करने की रणनीति पर काम शुरू किया है।

तौफीक के सामने संगठन को पुनर्जीवित करने की चुनौती

इसी रणनीति के तहत तौफीक चंकी खान की नियुक्ति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब राजनीतिक नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या वे कांग्रेस के इस पुराने गढ़ में संगठन को फिर से सक्रिय और मजबूत बना पाएंगे, या फिर पिछले चुनाव में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने वाली नई राजनीतिक ताकतें आने वाले समय में कांग्रेस के सामने और बड़ी चुनौती खड़ी करेंगी।

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