
BAZ Gohalpur Division: जबलपुर के रद्दी चौकी इलाके में 11 मई 2026 को जमीयत उलेमा जबलपुर के नए दफ़्तर का इफ्तिताह बड़े पुरनूर और रूहानी माहौल में अमल में आया। इस मुबारक मौके पर “दारुल इफ्ता अब्दुल्ला इब्ने मसूद” का भी बाकायदा क़ियाम किया गया, जो शहर और आसपास के मुसलमानों के लिए दीनि रहनुमाई का अहम मरकज़ साबित होगा।
यह तक़रीब प्रिंस मेडिकल के करीब आयोजित की गई, जिसमें जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती अहमद खान ने ख़ुसूसी शिरकत फरमाई। इसके अलावा जमीयत उलेमा रायसेन के सदर मौलाना हामिद क़ासमी, जमीयत उलेमा जबलपुर के सदर मौलाना इक़बाल नदवी, जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद राशिद खान समेत शहर के उलेमा-ए-किराम, समाजी शख्सियात और बड़ी तादाद में अहल-ए-इलाका मौजूद रहे।
उलेमा-ए-किराम ने अपने ख़िताब में कहा कि मौजूदा दौर में उम्मत को सही दीनि रहनुमाई और शरीअत की रोशनी में मसाइल के हल की सख्त ज़रूरत है। दारुल इफ्ता के जरिए निकाह, तलाक, विरासत, कारोबार और जिंदगी के दूसरे अहम मसाइल पर शरीअत के मुताबिक रहनुमाई फराहम की जाएगी, ताकि लोग दीन-ए-इस्लाम की सही तालीमात के मुताबिक अपनी जिंदगी गुजार सकें।
इस मौके पर एक इस्लामिक लाइब्रेरी का भी आग़ाज़ किया गया, जहां नौजवानों और तलबा के लिए दीनि किताबों का अच्छा इंतज़ाम किया गया है। उलेमा ने कहा कि इल्म ही वह रोशनी है जो इंसान को गुमराही से बचाकर कामयाबी की राह दिखाती है। लाइब्रेरी का मकसद नई नस्ल को दीन से वाबस्ता करना और उनमें मुताला का जज़्बा पैदा करना है।
बच्चों की बुनियादी दीनि तालीम के लिए मक्तब का भी क़ियाम किया गया है, जहां कुरआन-ए-पाक, दीनियात और इस्लामी अखलाक की तालीम दी जाएगी। तक़रीब में मौजूद अहल-ए-इल्म ने उम्मीद जाहिर की कि यह इदारा जबलपुर के मुसलमानों के लिए दीनि, तालीमी और इस्लाही सरगर्मियों का अहम मरकज़ बनेगा।
तक़रीब के आखिर में मुल्क में अमन-ओ-अमान, कौम की तरक्की और उम्मत-ए-मुस्लिमा की भलाई के लिए ख़ुसूसी दुआ भी की गई।
यह तमाम जानकारी जमीयत उलेमा जबलपुर के जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद राशिद खान की जानिब से जारी की गई।



