
जबलपुर। बढ़ती धार्मिक कट्टरता और अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ रही नफरत के माहौल के बीच मंगलवार को जबलपुर के ईसाई समुदाय ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर अपनी सुरक्षा और न्याय की मांग की। समुदाय के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कुछ सांप्रदायिक और असामाजिक तत्व लगातार ईसाइयों को निशाना बना रहे हैं, जबकि कई मामलों में बिना निष्पक्ष जांच के धर्मांतरण जैसे गंभीर आरोप लगाकर निर्दोष लोगों को परेशान किया जा रहा है।
ज्ञापन में कहा गया कि संविधान सभी नागरिकों को अपनी आस्था के अनुसार पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां संचालित करने का अधिकार देता है, लेकिन हाल के वर्षों में ईसाई समुदाय के धार्मिक कार्यक्रमों और प्रार्थना सभाओं को बाधित करने की घटनाओं में वृद्धि हुई है। कई बार संगठित समूह धार्मिक स्थलों के बाहर नारेबाजी करते हैं, माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते हैं और समुदाय के लोगों को डराने-धमकाने का प्रयास करते हैं।
समुदाय के नेताओं का कहना है कि नफरत फैलाने वाली ताकतें समाज में विभाजन पैदा कर रही हैं और अल्पसंख्यकों को संदेह की नजर से देखने का वातावरण बना रही हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान देश की सामाजिक एकता और भाईचारे को हो रहा है।
इस दौरान समाज के प्रतिनिधि शान कुमार और क्रिस्टोफ़र एंथोनी ने कहा कि ईसाई समुदाय हमेशा कानून का सम्मान करता आया है और देश के संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा, “हम केवल अपने संवैधानिक अधिकारों के साथ शांति और सम्मान के साथ जीवन जीना चाहते हैं। किसी भी नागरिक को केवल उसके धर्म की वजह से निशाना बनाना या बिना जांच के अपराधी की तरह पेश करना न्याय और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ है।”
प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि धर्मांतरण के नाम पर कई बार झूठी शिकायतें दर्ज कराई जाती हैं और बिना पर्याप्त साक्ष्यों के लोगों को कानूनी परेशानियों में धकेल दिया जाता है। उनका कहना है कि ऐसी कार्रवाइयों से निर्दोष परिवारों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
ईसाई समुदाय ने प्रशासन से मांग की कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, हमलों और उत्पीड़न में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए तथा किसी भी शिकायत पर मामला दर्ज करने से पहले निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही झूठी शिकायतों के जरिए समाज में तनाव फैलाने वालों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बिशप राजेश चौधरी, बिशप अर्नेस्ट सिंह, मलार सेलवन, एबिनेजर, प्रशांत डेविड, देवेंद्र कुम्हरे, विनोद चैम्बर्स, डेंजिल अंग्रे, आशीष सालोमन, डेविस समाधानम, अतुल जोसफ, संजय बारला, मनोज एंथनी सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
समुदाय के सदस्यों ने कहा कि भारत की पहचान विविधता, सहिष्णुता और धार्मिक स्वतंत्रता से है। ऐसे में नफरत और सांप्रदायिकता फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि सभी नागरिक बिना भय के अपने संवैधानिक अधिकारों का उपयोग कर सकें और समाज में आपसी भाईचारा कायम रह सके।



