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Madhya Pradesh: समान नागरिक संहिता: 22 जून तक दे सकते हैं सुझाव, मुसलमानों में चिंता

जबलपुर | BAZ Media Jabalpur Division । मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता पर आम अवाम से ऑनलाइन सुझाव मांगे हैं। 22 जून तक कोई भी शख्स ucc.mp.gov.in पर अपनी राय दे सकता है। मुस्लिम समुदाय में इसको लेकर गहरी चिंता है कि कहीं यह उनके पर्सनल लॉ और शरीयत पर हमला तो नहीं।

News in Short

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  • मध्य प्रदेश सरकार ने UCC पर 22 जून तक ऑनलाइन सुझाव आमंत्रित किए
  • सरकारी कर्मचारी, छात्र, धार्मिक संगठन सभी राय दे सकते हैं
  • मुस्लिम समुदाय को डर है कि निकाह, तलाक, वक्फ के नियम बदल जाएंगे
  • वेबसाइट पर 12 सवालों के हां-ना में जवाब देने होंगे
  • ओटीपी से सत्यापन के बाद सुझाव दर्ज होगा

समान नागरिक संहिता पर सुझाव देने का तरीका

हुकूमत ने इसके लिए खास वेबसाइट बनाई है। कोई भी शख्स — सरकारी अफसर, टीचर, छात्र, मीडियाकर्मी, धार्मिक संगठन — सुझाव दे सकता है। फॉर्म बेहद आसान है। नाम, लिंग, मजहब, संभाग, जिला, पता और मोबाइल नंबर भरना होगा। कुल 12 सवाल हैं। हर सवाल का जवाब हां या ना में देना है। मोबाइल पर ओटीपी आएगा, उससे वेरिफाई करना होगा। बस, सुझाव दर्ज हो जाएगा।

लेकिन असल सवाल यह है — ये 12 सवाल क्या हैं? क्या इनमें निकाह के तरीके, तलाक के नियम, वक्फ की जमीन के बारे में सवाल हैं? हुकूमत ने अभी तक यह साफ नहीं किया कि वो किन मुद्दों पर राय मांग रही है।

मुसलमानों की चिंता: पर्सनल लॉ खतरे में?

मुस्लिम समुदाय के बीच गहरी बेचैनी है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि शरीयत कानून आस्था का मामला है, इंतज़ाम का नहीं। तलाक-ए-तलाक, मेहर, विरासत में बेटियों का हिस्सा — ये सब इस्लामी नियमों से तय होते हैं। अगर सरकार ने एक समान कानून बना दिया तो क्या होगा?

जबलपुर के कुछ उलेमा का कहना है कि  “हमें डर है कि हमारे निकाह और तलाक के तरीके बदल जाएंगे। हलाला, इद्दत, मेहर — क्या सब खत्म हो जाएगा? अगर सरकार एक कानून लाती है तो मुसलमानों की पहचान ही मिट जाएगी।”

दूसरी तरफ, सरकार का कहना है कि यह समानता के लिए जरूरी है। महिलाओं को सभी धर्मों में बराबर अधिकार मिलने चाहिए। लेकिन मुस्लिम अवाम का सवाल है — क्या यह समानता है या हमारी आस्था पर हमला?

वक्फ बोर्ड और दूसरे मुद्दे

समान नागरिक संहिता सिर्फ शादी-तलाक तक सीमित नहीं है। वक्फ की जमीन, मदरसों की मान्यता, चैरिटेबल ट्रस्ट के नियम — सब कुछ इसमें आ सकता है। हाल में उत्तराखंड ने UCC लागू किया था। वहां निकाहनामा रजिस्ट्रार के सामने पढ़ना जरूरी हो गया। ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश में होगा तो क्या होगा?

भोपाल के एडवोकेट अजहर खान कहते हैं, “हमें सुझाव देने का हक है, लेकिन क्या सरकार हमारी बात सुनेगी? उत्तराखंड में लागू UCC को देखें — वहां किसी की नहीं सुनी गई। यह सिर्फ दिखावा है।”

22 जून तक का वक्त कम है। मुस्लिम संगठनों ने अपने लोगों से अपील की है कि ज्यादा से ज्यादा संख्या में सुझाव दें। लेकिन सवाल यह है — क्या सरकार इन सुझावों को गंभीरता से लेगी, या यह सिर्फ एक औपचारिकता है? आने वाले दिन बताएंगे।

📌 Sources & References

  • ucc.mp.gov.in

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बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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