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पूर्व विधानसभा में बदलते समीकरण : 7 अहम वार्डों की कमान युवा चेहरे आसिफ इकबाल को

कोराना के संकट काल में आसिफ इकबाल

राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को सामान्य संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पूर्व विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के डैमेज कंट्रोल अभियान के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन क्षेत्रों में कांग्रेस का परंपरागत जनाधार रहा है, वहां बीते डेढ़ दशक से सक्रिय कई नेताओं की कार्यशैली और संगठनात्मक निष्क्रियता के कारण पार्टी की पकड़ कमजोर हुई। इसी का फायदा उठाकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) ने इन इलाकों में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई और कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने में सफलता हासिल की।

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संगठन और जनता के बीच नई कड़ी

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार पार्टी अब केवल चुनावी राजनीति के बजाय वार्ड स्तर पर सक्रिय संगठन खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी सोच के तहत ऐसे चेहरों को आगे लाया जा रहा है जो सीधे जनता से जुड़े हों और स्थानीय मुद्दों पर लगातार सक्रिय रहते हों।

आसिफ इकबाल को मुस्लिम समाज के बीच एक निर्विवाद और सक्रिय युवा चेहरे के रूप में देखा जाता है। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि उनकी नियुक्ति से संगठन और स्थानीय जनता के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा तथा बूथ स्तर तक कांग्रेस की सक्रियता बढ़ेगी।

सात वार्डों की जिम्मेदारी

डॉ. जाकिर हुसैन ब्लॉक के अंतर्गत डॉ. जाकिर हुसैन वार्ड, शहीद अब्दुल हमीद वार्ड, संजय गांधी वार्ड, रविंद्रनाथ टैगोर वार्ड, पंडित मोतीलाल नेहरू वार्ड, चितरंजन दास वार्ड तथा महर्षि महेश योगी वार्ड शामिल हैं। ये सभी वार्ड राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं और पूर्व विधानसभा क्षेत्र के चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इस नियुक्ति पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मतीन अंसारी, पार्षद कलीम खान, हाजी सलीम खान, सुबोध पहाड़िया, आजम खान, इस्तियाक अंसारी, चमन पासी, राजू तोमर, ताहिर अली, राजू लाइक, सोनू तिवारी, यावर चौधरी, हामिद मंसूरी, तौफीक खान, चंकी मोहम्मद अली, नदीम राईन, फिज्जू सहित अनेक कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

शीर्ष नेतृत्व की सहमति से नियुक्ति

आसिफ इकबाल की नियुक्ति कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी के अनुमोदन तथा पूर्व विधायक लखन घनघोरिया और नगर कांग्रेस अध्यक्ष सौरभ शर्मा की अनुशंसा पर की गई है। इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि यह फैसला केवल स्थानीय स्तर का नहीं बल्कि प्रदेश नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा है।

2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अभी से पूर्व विधानसभा क्षेत्र में अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को दूर करने की कवायद में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व समझ चुका है कि यदि मुस्लिम बहुल और पारंपरिक कांग्रेस समर्थक वार्डों में संगठन मजबूत नहीं हुआ तो भविष्य में विपक्षी दलों और क्षेत्रीय राजनीतिक ताकतों को फायदा मिल सकता है।

ऐसे में आसिफ इकबाल की नियुक्ति को केवल एक ब्लॉक की ताजपोशी नहीं, बल्कि पूर्व विधानसभा में कांग्रेस के नए संगठनात्मक प्रयोग और राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि कांग्रेस का यह दांव पार्टी को जमीनी स्तर पर कितना लाभ पहुंचाता है और क्या वह अपने पारंपरिक जनाधार को फिर से मजबूत कर पाती है।

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बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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