जबलपुर से इंदौर रवाना हुआ दावत-ए-इस्लामी का मदनी काफिला, नेकियों की दावत का पैगाम

जबलपुर। आशिकान-ए-रसूल की आलमी तहरीक दावत-ए-इस्लामी के तहत जबलपुर से इस्लामी भाइयों का एक मदनी काफिला दीन की खिदमत और इस्लाह की नीयत से इंदौर पहुंचा। इस काफिले में हाफिज इमरान कादरी अत्तारी, अनवर अत्तारी, जावेद अत्तारी, मंसूर अत्तारी, दिलशाद अत्तारी, इम्तियाज भाई, हाफिज हसन अत्तारी समेत बड़ी तादाद में इस्लामी भाई शरीक हुए।
जानकारी के अनुसार इंदौर में मध्य प्रदेश भर से दावत-ए-इस्लामी के जिम्मेदारान और इस्लामी भाई जमा होंगे। यहां सूबे में दावत-ए-इस्लामी के दीनी व फलाही कामों को और मजबूत बनाने, सुन्नतों का पैगाम आम करने, समाज की इस्लाह और लोगों तक नेकियों की दावत पहुंचाने के लिए मशवरे और विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे।
दावत-ए-इस्लामी एक आलमी तहरीक है, जिसका मदनी मकसद है:
“मुझे अपनी और सारी दुनिया के लोगों की इस्लाह की कोशिश करनी है, इंशाअल्लाह।”
काफिले में शामिल हाफिज इमरान कादरी अत्तारी ने बताया कि दावत-ए-इस्लामी दुनिया भर में कुरआन व सुन्नत की तालीम को आम करने, नमाज की पाबंदी, सुन्नतों पर अमल, अच्छे अखलाक और मोहब्बत-ए-रसूल ﷺ के जज्बे को मजबूत करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मदनी काफिलों के जरिए मुसलमानों को इल्म-ए-दीन हासिल करने, नेकियों की दावत देने और अपनी जिंदगी को इस्लामी तालीमात के मुताबिक संवारने की तरगीब दी जाती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इंदौर में होने वाला यह इज्तिमा और मशवरा मध्य प्रदेश में दावत-ए-इस्लामी की दीनी, तालीमी और इस्लाही गतिविधियों को नई मजबूती प्रदान करेगा तथा ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कुरआन व सुन्नत का पैगाम पहुंचाने का जरिया बनेगा।
इंदौर पहुंचे इस मदनी काफिले के लिए दुआ की जा रही है कि अल्लाह तआला इनके इस सफर को कबूल फरमाए, इन्हें दीन की खिदमत की तौफीक अता करे और इनके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक नेकियों की दावत पहुंचे। आमीन।



