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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने शरीयत की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी आंदोलन का किया ऐलान

नई दिल्ली | BAZ News Network (BNN) । ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सोमवार को संविधान और शरीयत की रक्षा के लिए राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का ऐलान किया। देश के बड़े शहरों में जनसभाएं और विरोध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

News in Short

  • AIMPLB ने ‘संविधान और शरीयत की रक्षा आंदोलन’ शुरू करने का फैसला किया
  • मुस्लिमों के खिलाफ भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर व्हाइट पेपर तैयार होगा
  • बोर्ड का कहना — यह किसी खास समुदाय का नहीं बल्कि पूरे देश का आंदोलन है
  • बुलडोजर कार्रवाई, वक्फ संपत्तियों पर कब्जे और UCC जैसे मुद्दे उठाए गए

AIMPLB राष्ट्रव्यापी आंदोलन की योजना

बोर्ड ने बताया कि इस अभियान का नाम ‘संविधान और शरीयत की रक्षा आंदोलन’ रखा गया है। इसका मकसद संवैधानिक अधिकारों, लोकतंत्र, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता और इंसानी गरिमा की रक्षा करना है। देश के प्रमुख शहरों में जनसभाएं आयोजित होंगी जिनमें विद्वान, विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेता, बुद्धिजीवी और सामाजिक-राजनीतिक शख्सियतें शामिल होंगी। नई दिल्ली में एक विरोध कार्यक्रम भी होगा।

व्हाइट पेपर से उजागर होंगे भेदभाव के मामले

AIMPLB ने कहा कि वह मुस्लिमों के साथ भेदभाव, संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन और मानवाधिकारों के हनन की घटनाओं पर एक विस्तृत व्हाइट पेपर तैयार करेगा। यह दस्तावेज मीडिया, मानवाधिकार संगठनों, बुद्धिजीवियों, चुने हुए प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित संस्थानों के साथ साझा किया जाएगा। बोर्ड के सदस्यों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारा पक्का यकीन है कि न्याय, मोहब्बत, बातचीत, आपसी सम्मान और संवैधानिक संघर्ष ही भारत के शांतिपूर्ण भविष्य की असली गारंटी हैं।”

बोर्ड ने गिनाई मुस्लिमों की चिंताएं

AIMPLB ने आरोप लगाया कि हाल के सालों में मुस्लिमों और अन्य कमजोर समुदायों पर दबाव और भेदभावपूर्ण बर्ताव बढ़ा है। बोर्ड ने भीड़ की हिंसा, बुलडोजर से की जाने वाली कथित गैरकानूनी कार्रवाई, मस्जिदों-मदरसों-मजारों को निशाना बनाए जाने, वक्फ संपत्तियों और कब्रिस्तानों पर अवैध कब्जे और मुस्लिम युवाओं की बेबुनियाद मामलों में गिरफ्तारी का जिक्र किया। बोर्ड ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) के जरिए मुस्लिम पर्सनल लॉ में दखल और वंदे मातरम गाना अनिवार्य बनाने जैसे कदमों पर भी चिंता जताई।

AIMPLB ने साफ किया कि यह आंदोलन किसी खास समुदाय तक सीमित नहीं है बल्कि भारत के संविधान, लोकतंत्र की सर्वोच्चता, कानून के शासन, धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय एकता की रक्षा के लिए एक साझा राष्ट्रीय संघर्ष है। बोर्ड ने देश के हर न्याय प्रिय, लोकतांत्रिक और शांतिप्रिय नागरिक, हर सामाजिक-धार्मिक संगठन और नागरिक समाज के हर जिम्मेदार सदस्य से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

📌 Sources & References

  • The Observer Post

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