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कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीजेपी रैली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ केस खारिज किया

बेंगलुरु | BAZ News Network (BNN) । बीजेपी रैली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ बोलने पर केस खारिज। कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक शख्स के खिलाफ मुकदमा रद्द करते हुए कहा कि बीजेपी के कार्यक्रम में ऐसा नारा लगाना “अत्यंत असंभव” है। आरोपी ने दावा किया कि ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ की जगह गलती से ‘जिंदाबाद’ बोल दिया।

News in Short

  • 28 अक्टूबर को जस्टिस वी श्रीशानंदा ने आदेश में कहा — बीजेपी के प्रदर्शन में ऐसा नारा “highly unimaginable”
  • आरोपी के वकील ने कहा — “slip of the tongue” हुई, ‘मुर्दाबाद’ की जगह ‘जिंदाबाद’ निकल गया
  • 18 दिसंबर 2022 को मांड्या में बीजेपी रैली के दौरान हुआ था वाक्या
  • कोर्ट ने कहा — जांच में समाज में कोई अशांति फैलाने का सबूत नहीं मिला
  • शिकायतकर्ता ने 2024 में वीडियो देखकर केस दर्ज कराया था

कोर्ट ने ‘slip of the tongue’ दलील मानी

कर्नाटक हाईकोर्ट ने 2022 की बीजेपी रैली में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ नारा लगाने के आरोप में फंसे एक शख्स के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी। आरोपी का कहना था कि उसने जोश में ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ बोलना चाहा, लेकिन गलती से ‘जिंदाबाद’ निकल गया। जस्टिस वी श्रीशानंदा ने आदेश में लिखा — “यह अत्यंत असंभव है कि बीजेपी के प्रदर्शन में शामिल लोग ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ का नारा लगाएं।”

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मांड्या पुलिस ने सार्वजनिक शरारत और राष्ट्रीय एकता के खिलाफ बयानबाजी से जुड़ी आईपीसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया था। प्रॉसिक्यूशन ने दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर “समाज में अशांति फैलाने के लिए” नारा लगाया। लेकिन कोर्ट ने पाया कि जांच में किसी सामाजिक अशांति का सबूत नहीं मिला।

2024 में वीडियो देखकर हुई शिकायत

दिलचस्प बात यह है कि घटना 18 दिसंबर 2022 को हुई थी, लेकिन केस 2024 में दर्ज हुआ। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने वाकये का वीडियो देखा और उससे उसे मानसिक परेशानी हुई, इसलिए उसने पुलिस से कार्रवाई की मांग की। आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आपराधिक कार्यवाही खारिज करने की गुहार लगाई।

कोर्ट ने माना कि मामला आगे चलाना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। जस्टिस श्रीशानंदा ने कहा — “आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई मतलब नहीं बनता।” यह फैसला कर्नाटक में राजनीतिक नारों और अभिव्यक्ति की आजादी की बारीक रेखा पर बहस खोल सकता है।

कर्नाटक हाईकोर्ट का यह फैसला उन मामलों में राहत दे सकता है जहां गलती या भावनाओं में बोले गए शब्दों पर आपराधिक मुकदमे चलाए जाते हैं। कोर्ट ने साफ किया कि सिर्फ शिकायत से नहीं, ठोस सबूत से ही मामला बनता है।

📌 Sources & References

  • Maktoob Media
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