BAZ EDUCATION: RDVV कुलगुरु की नियुक्ति से लेकर राजनीतिक संपर्कों तक की हो जांच : अदनान अंसारी

छात्र नेता एवं अधिवक्ता ने कहा- विश्वविद्यालय की गरिमा और छात्रों के भविष्य से जुड़े मामले में शासन निष्पक्ष जांच कराए, शिकायतों पर कार्रवाई जरूरी
जबलपुर। रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (आरडीवीवी) के कुलगुरु प्रो. राजेश कुमार वर्मा के कार्यकाल को लेकर विवाद अब शासन और प्रशासन के स्तर तक पहुंच गया है। इस मामले में छात्र नेता एवं अधिवक्ता अदनान अंसारी ने कुलगुरु की नियुक्ति प्रक्रिया, उनके खिलाफ लंबित न्यायालयीन प्रकरणों, एसआईटी जांच और कथित राजनीतिक संपर्कों से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। छात्रों और कर्मचारियों द्वारा उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेते हुए शासन को तथ्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
कुलगुरु के खिलाफ आरडीवीवी शिक्षणोत्तर कर्मचारी संघ और छात्र संगठनों ने 20 जून को ज्ञापन सौंपकर मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 52 लागू करने और उन्हें पद से हटाने की मांग की थी। इस शिकायत में विश्वविद्यालय की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था के साथ कुलगुरु की नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे। मामले में राजभवन के उपसचिव सुनील दुबे ने 22 जुलाई को प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा को कार्रवाई के निर्देश दिए थे।
इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग के अवर सचिव राम कुमार यादव ने जबलपुर संभागायुक्त को पत्र भेजकर शिकायत में शामिल सभी बिंदुओं पर बिंदुवार तथ्यात्मक प्रतिवेदन और स्पष्ट अभिमत मांगा है। अब इस मामले में संभागायुक्त की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
नियुक्ति प्रक्रिया और न्यायालयीन मामलों की हो जांच
अदनान अंसारी ने कुलगुरु की नियुक्ति प्रक्रिया और उनके खिलाफ न्यायालय में लंबित मामलों को भी जांच का महत्वपूर्ण विषय बताया है। शिकायत में उच्च न्यायालय, जबलपुर में तीन प्रकरण विचाराधीन होने और याचिका क्रमांक 43097/2025 का उल्लेख किया गया है। इसके साथ ही एसआईटी की लंबित जांच का मुद्दा भी उठाया गया है।
उनका कहना है कि इन सभी मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आनी चाहिए। नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े नियमों का पालन हुआ या नहीं और न्यायालयीन प्रकरणों में क्या तथ्य सामने आए हैं, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मामला लंबित होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है, लेकिन शिकायतों में उठाए गए तथ्यों की जांच होना आवश्यक है।
कथित राजनीतिक संपर्कों पर भी उठे सवाल
इस विवाद में कुलगुरु के कथित राजनीतिक संपर्कों का मुद्दा भी शिकायत का हिस्सा है। शिकायतकर्ताओं ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और मुख्यमंत्री के करीबी बताए गए अशोक कढ़ेल से प्रो. राजेश कुमार वर्मा के संबंधों का उल्लेख किया है। अदनान अंसारी ने भी इस पहलू से जुड़े आरोपों की तथ्यात्मक जांच की आवश्यकता पर जोर दिया है। उनका कहना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान के महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति और प्रशासनिक निर्णयों में नियमों की पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। यदि राजनीतिक संपर्कों के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए गए हैं, तो उनकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
धारा 52 लागू करने की मांग पर शासन का फैसला अहम
कर्मचारी संघ और छात्र संगठनों ने कुलगुरु को पद से हटाने के लिए मध्य प्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 52 लागू करने की मांग की थी। अब उच्च शिक्षा विभाग द्वारा संभागायुक्त से रिपोर्ट मांगे जाने के बाद इस मांग पर शासन के अगले कदम का इंतजार है।
अदनान अंसारी के अनुसार, विश्वविद्यालय की गरिमा, प्रशासनिक पारदर्शिता और विद्यार्थियों के हितों को ध्यान में रखते हुए शासन को शिकायतों पर स्पष्ट और निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए। जांच केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि प्रत्येक आरोप का दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर परीक्षण होना चाहिए।
फिलहाल कुलगुरु को पद से हटाने या धारा 52 लागू करने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। संभागायुक्त की रिपोर्ट के बाद ही शासन की अगली कार्रवाई स्पष्ट होगी।



