
नई दिल्ली | 11 जून 2026 | BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in
News in Short
- ओमान तट के पास अमेरिकी नेवी ने तेल टैंकर सेटेबेलो पर हमला किया — 2 भारतीय नाविकों की मौत, 1 अब भी लापता।
- तीन दिन में यह दूसरा हमला — इससे पहले सोमवार को टैंकर मैरीवेक्स पर हमले में 24 भारतीय नाविकों को बचाया गया था।
- भारत ने अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया, हमले की कड़ी निंदा की।
भारतीय नाविकों पर हमला — यह अब सिर्फ खबर नहीं, दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच एक बड़ा कूटनीतिक टकराव बन गया है। ओमान के तट के पास अमेरिकी नेवी ने तेल टैंकर सेटेबेलो पर सटीक हथियारों से हमला किया। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने बताया कि 2 भारतीय नाविकों की मौत हो गई है और 1 अभी भी लापता है।
भारतीय नाविकों पर हमला — तीन दिन में दूसरी बार
सोमवार को इसी इलाके में टैंकर मैरीवेक्स पर अमेरिकी हमला हुआ था। उसमें 24 भारतीय नाविकों को ओमान की सेना ने सुरक्षित बचाया था। अमेरिका ने उस जहाज़ पर पहले से पाबंदी लगा रखी थी।
अब सेटेबेलो पर हमले में 21 भारतीय नाविकों को बचाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि सेटेबेलो ईरान से तेल ले जाते हुए जारी नाकाबंदी का उल्लंघन कर रहा था। CENTCOM ने एक्स पर लिखा — “बार-बार चेतावनी देने के बावजूद चालक दल ने नज़रअंदाज़ किया। अमेरिकी विमान ने जहाज़ के इंजन को निशाना बनाकर हमला किया।” अमेरिकी सेना ने इस कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया।
समुद्री खुफिया वेबसाइट लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक सेटेबेलो उन जहाज़ों में शामिल था जो ओमान के दुक़्म बंदरगाह के पास रुके थे और अमेरिकी नौसेना की निगरानी में थे। जहाज़ ने मार्च-अप्रैल में दो बार चीन का सफर किया था और 12 मई को सिंगापुर से रवाना हुआ था।
भारत का कड़ा विरोध — अमेरिकी अफसर तलब
भारत सरकार ने नई दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के उप प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर उस वक्त कज़ाखस्तान की यात्रा पर थे। विदेश मंत्रालय ने हमले की निंदा करते हुए कहा — “ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थिति पर नज़र रखे हुए है। ओमानी अधिकारियों के साथ बचाव अभियान में सक्रिय तालमेल जारी है।”
मंत्रालय ने साफ कहा कि कारोबारी जहाज़ों और नागरिक ढांचे पर हमले बंद होने चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक समुद्री रास्तों पर आवाजाही बहाल हो। हालांकि मंत्रालय के बयान में ‘अमेरिका’ का नाम सीधे नहीं लिया गया — यह कूटनीतिक सतर्कता साफ दिखती है।
13 अप्रैल से अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू की थी। यह उस वक्त हुआ जब तेहरान ने होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों की आवाजाही पर पाबंदी कड़ी कर दी थी। यह पूरा संघर्ष 28 फरवरी को उस वक्त शुरू हुआ जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले किए थे — उन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई थी। जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू किए। अप्रैल में दो हफ्ते का युद्धविराम हुआ, लेकिन वह टिक नहीं पाया।
खाड़ी में जंग, निशाने पर भारतीय नाविक — यह सवाल अब सिर्फ कूटनीति का नहीं, भारतीय समुद्री मज़दूरों की जान का है। दो हमले, तीन दिन, दो मौतें — और दिल्ली अभी भी “अमेरिका” का नाम लेने से बच रही है।
📌 Sources & References
- BBC News Hindi
- CENTCOM X Statement
- Forward Seamen Union of India



