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शहज़ाद अली लिंचिंग केस में पुलिसकर्मी समेत चार गिरफ्तार

पटना | 04 जून 2026 | BAZ Media Bhopal Division | BAZ Desk | Bazmedia.in

News in Short

  • सिवान, बिहार में शहज़ाद अली लिंचिंग केस में पुलिसकर्मी समेत चार और गिरफ्तार, कुल गिरफ्तारी पाँच हुई।
  • Dial-112 टीम के SI संजीव कुमार को लापरवाही के आरोप में तत्काल सस्पेंड किया गया, दो होम गार्ड्स के कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की सिफारिश।
  • परिवार, सिविल सोसाइटी और CPI(ML) Liberation ने न्याय के लिए मार्च निकाला, 10 लाख मुआवज़े और सरकारी नौकरी की माँग।

शहज़ाद अली लिंचिंग के मामले में बिहार पुलिस ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है — इनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है। सिवान ज़िले के बरहरिया थाना इलाके में 25 साल के शहज़ाद अली को 30 मई को कथित तौर पर भीड़ ने पेड़ से बाँधकर पीट-पीटकर मार डाला था। अब तक कुल पाँच लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।

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शहज़ाद अली लिंचिंग: क्या हुआ था उस रात?

शहज़ाद अली, शिवराजपुर गाँव के रहने वाले थे। उनकी पत्नी मोबीना खातून ने FIR में बताया कि पाँच-छह लोग घर आए, शहज़ाद को जबरदस्ती उठा ले गए, पेड़ से बाँधा और डंडों-लातों-मुक्कों से मारा। हमले के दौरान उनके पास से 5,000 रुपये भी छीन लिए गए। बाद में शहज़ाद ने दम तोड़ दिया।

बरहरिया थाने में केस नं. 230/28 सात नामज़द आरोपियों — अमित चौधरी उर्फ अवधेश चौधरी, प्रमेंद्र मांझी, छत्थू मांझी, अवध किशोर चौधरी, गुड्डू मांझी, रंजन चौधरी और मंटू कुमार — के खिलाफ दर्ज हुआ। एसपी सिवान खुद मौके पर पहुँचे, फोरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए और SDPO सदर-01 की अगुवाई में SIT बनाई गई।

पुलिस की लापरवाही उजागर, SI सस्पेंड

जाँच में सामने आया कि Dial-112 इमरजेंसी सर्विस के SI संजीव कुमार को 30 मई को ही सूचना मिली थी कि शिवराजपुर में भीड़ ने एक शख्स को पकड़ा हुआ है। लेकिन SI ने न तो शहज़ाद को भीड़ से बचाया, न कोई कानूनी कार्रवाई की — और उन्हें वहीं छोड़ दिया।

एसपी ने प्राथमिक जाँच के बाद SI संजीव कुमार को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया। Dial-112 टीम में तैनात दो होम गार्ड — नंदजी यादव और मुक्तिनाथ — के कॉन्ट्रैक्ट रद्द करने की सिफारिश भी की गई। बरहरिया SHO छोटन कुमार से 24 घंटे में जवाब माँगा गया है।

सड़कों पर उतरे लोग, मुआवज़े की माँग

2 जून को बरहरिया में CPI(ML) Liberation की अगुवाई में सैकड़ों लोग सड़क पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने माँग की — सभी आरोपियों की फौरन गिरफ्तारी, निष्पक्ष जाँच, शहज़ाद के परिवार को 10 लाख रुपये मुआवज़ा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी।

इस बीच सिवान साइबर पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) को नोटिस भेजकर मामले से जुड़ी कई पोस्ट हटाने को कहा — पुलिस का कहना है ये पोस्ट “भ्रामक और अमन के लिए खतरनाक” हैं। पत्रकार मीर फैसल की पोस्ट भी इसमें शामिल है। फैसल ने जवाब दिया — “एक जवान मर गया। पत्रकारिता अपराध नहीं है। सवाल उठाने वालों को डराना बंद करो।”

पुलिस का कहना है कि बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है और मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। लेकिन सवाल वही है — अगर Dial-112 वक्त पर पहुँचती, तो क्या शहज़ाद बच सकते थे?

📌 Sources & References

  • Maktoob Media (04 Jun 2026)
  • Bihar Police Official Statement

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