
प्रयागराज | 19 जून 2025 | BAZ News Network (BNN) | BAZ Desk | Bazmedia.in
News in Short
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने UP सरकार को आदेश दिया — प्रयागराज के मंसूर अहमद को 2 लाख रुपए मुआवज़ा 6 हफ्ते में दो।
- ACP बारा प्रयागराज से अनुशासनात्मक जांच के बाद यह रकम वसूली जाएगी — जांच 3 महीने में पूरी हो।
- कोर्ट ने नया नियम बनाया — 24 घंटे से ज़्यादा गैरकानूनी हिरासत पर हर दिन के 25,000 रुपए मुआवज़ा मिलेगा।
गैरकानूनी हिरासत मुआवज़ा मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रयागराज के मंसूर अहमद को 8 दिन तक बिना किसी ठोस वजह के हिरासत में रखा गया — और अब UP सरकार को उन्हें 2 लाख रुपए चुकाने होंगे।
गैरकानूनी हिरासत मुआवज़ा: कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस विनय कुमार द्विवेदी की डिवीज़न बेंच ने मंसूर अहमद की हेबियस कॉर्पस याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने साफ कहा — यह हिरासत गैरकानूनी थी। 6 हफ्ते के अंदर मुआवज़ा दिया जाए। यह रकम बाद में ACP बारा, प्रयागराज से वसूली जाएगी — लेकिन पहले 3 महीने में अनुशासनात्मक जांच होगी। पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को 14 सितंबर 2026 तक कंप्लायंस रिपोर्ट देनी होगी।
19 मार्च की रात — क्या हुआ था?
19 मार्च को रात करीब 12:50 बजे खीरी थाने के SHO उमेश सिंह और कांस्टेबल अंकित सिंह व त्रिभुवन पांडेय मंसूर के घर पहुंचे। उन्हें उठाकर ले गए — कोई वजह नहीं बताई। मंसूर की बीवी ने जब सवाल पूछा तो उसे धक्का दे दिया गया। बाद में परिवार थाने पहुंचा तो मंसूर बुरी तरह पिटा हुआ मिला। ACP और पुलिस कमिश्नर से गुहार लगाई — कुछ नहीं हुआ। 23 मार्च को परिवार हाईकोर्ट पहुंचा। मंसूर के बेटे शाहरुख खान ने उसी दिन CM ग्रीवेंस पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस की दलील — कोर्ट ने खारिज की
पुलिस ने कहा — शांति भंग के मामलों में अगर कोई पर्सनल बॉन्ड भरने से मना करे, तो न्यायिक हिरासत में भेजा जा सकता है। लेकिन कोर्ट ने पूछा — रिकॉर्ड में कहां है कि मंसूर ने बॉन्ड भरने से मना किया? कोई सबूत नहीं था। दलील धराशायी हो गई।
प्रयागराज कमिश्नरेट पर कोर्ट सख्त
कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा — “प्रयागराज कमिश्नरेट में यह हालात बेहद चौंकाने वाले हैं। पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए गए हैं — जिनका पूरी तरह दुरुपयोग हो रहा है।” कोर्ट ने गाज़ियाबाद कमिश्नरेट के एक पुराने मामले का भी हवाला दिया जहां ऐसे ही दुरुपयोग पर अफसरों पर जुर्माना लगाया गया था। साथ ही चेतावनी दी — अगर इस बार आदेश नहीं माना गया तो पुलिस कमिश्नर को खुद कोर्ट में हाज़िर होना पड़ेगा।
नया नियम — हर दिन की हिरासत पर 25,000 रुपए
इस फैसले में कोर्ट ने एक अहम नज़ीर कायम की। अब से अगर कोई शख्स बिना कानूनी जवाज़ के 24 घंटे से ज़्यादा हिरासत में रखा गया — तो हर दिन के लिए 25,000 रुपए मुआवज़ा मिलेगा। यह रकम जिम्मेदार अफसर से जांच के बाद वसूली जाएगी।
यह फैसला मनमाने तरीके से हिरासत में रखने के खिलाफ एक बड़ी चेतावनी है। संविधान की ज़मानतें महज़ कागज़ पर नहीं रहेंगी — कोर्ट ने यह साफ कर दिया है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- Allahabad High Court Order



