रादुविवि की प्रवेश प्रक्रिया फिसड्डी साबित, देरी से बढ़ी छात्रों की चिंता । ऑनलाइन पंजीकरण में लगातार देरी, छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी..

जबलपुर। Rani Durgavati Vishwavidyalaya (रादुविवि) में नए शैक्षणिक सत्र की प्रवेश प्रक्रिया प्रशासनिक अव्यवस्था के कारण पूरी तरह प्रभावित होती दिखाई दे रही है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा पहले 4 मई से ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने का दावा किया गया था, लेकिन तय समय सीमा गुजरने के बाद भी पोर्टल शुरू नहीं हो सका। लगातार हो रही देरी से हजारों छात्र असमंजस और चिंता की स्थिति में हैं।
विभागों की लापरवाही से बिगड़ा पूरा शेड्यूल
जानकारी के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया को लेकर पिछले कई दिनों से तैयारियां चल रही थीं, लेकिन विभागीय स्तर पर लापरवाही और तकनीकी अपडेट समय पर नहीं होने से ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई। विश्वविद्यालय के विभिन्न शैक्षणिक विभाग अपने प्रोफाइल और पाठ्यक्रम से जुड़ी आवश्यक जानकारी समय पर अपडेट नहीं कर सके, जिससे पूरी प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित हो गई।
स्थिति बिगड़ने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को पुराना प्रवेश कार्यक्रम रद्द कर नया शेड्यूल जारी करना पड़ा।
आज से शुरू होगा ऑनलाइन पंजीकरण
नए कार्यक्रम के अनुसार अब 18 मई से ऑनलाइन पंजीकरण प्रक्रिया शुरू की जाएगी। प्रवेश के इच्छुक विद्यार्थी इसी तारीख से आवेदन कर सकेंगे। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विभागों को 15 से 17 मई के बीच हर हाल में अपने प्रोफाइल और आवश्यक जानकारी अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
दस्तावेज सत्यापन और सीट आवंटन की नई तारीखें
विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के अनुसार ऑनलाइन पंजीकरण के बाद दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया 1 जून तक चलेगी। इसके बाद 3 जून को सीट आवंटन सूची जारी की जाएगी।
जिन छात्रों को सीट आवंटित होगी, वे 3 जून से 6 जून तक ऑनलाइन फीस जमा कर अपना प्रवेश सुनिश्चित कर सकेंगे। प्रशासन का कहना है कि संशोधित कार्यक्रम के जरिए प्रवेश प्रक्रिया को समय पर पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि नए सत्र की पढ़ाई अधिक प्रभावित न हो।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी नाराजगी
लगातार बदलते शेड्यूल और प्रवेश प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण छात्रों और अभिभावकों में विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई विद्यार्थियों का कहना है कि यदि इसी तरह देरी होती रही तो उन्हें अन्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों का विकल्प चुनना पड़ सकता है।
प्रवेश फीस पर निर्भर है विश्वविद्यालय की आर्थिक व्यवस्था
विशेषज्ञों का मानना है कि इस अव्यवस्था का असर विश्वविद्यालय की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। विश्वविद्यालय का एक बड़ा वित्तीय ढांचा छात्रों से मिलने वाली प्रवेश फीस पर आधारित है।
हाल ही में आयोजित बजट बैठक में भी इस बात पर चर्चा हुई थी कि भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यों के लिए अधिक से अधिक छात्रों के प्रवेश आवश्यक हैं। यदि प्रवेश प्रक्रिया में देरी के कारण बड़ी संख्या में छात्र अन्य संस्थानों की ओर रुख करते हैं, तो विश्वविद्यालय के राजस्व पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है।
अब विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने समय पर, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।



