
चांद नजर न आने के बाद हुआ फैसला, बड़ी ईदगाह रानीताल में सुबह 10:30 बजे होगी नमाज़-ए-ईद
जबलपुर, 18 मई 2026। शहर में ईद-उल-अजहा (बकरा ईद) को लेकर इंतजार खत्म हो गया है। मुफ्ती-ए-आज़म जबलपुर हज़रत मौलाना मुशाहिद रज़ा कादरी साहब ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि इस साल जबलपुर सहित पूरे प्रदेश में बकरा ईद 28 मई 2026, बृहस्पतिवार को मनाई जाएगी। चांद दिखाई न देने के बाद यह फैसला लिया गया।
मुफ्ती-ए-आज़म मौलाना मुशाहिद रज़ा कादरी साहब ने बाज मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि 17 मई 2026 को 29 ज़िलक़ादा 1447 हिजरी के मौके पर चांद नजर नहीं आया और न ही किसी विश्वसनीय स्थान से चांद दिखाई देने की शरई गवाही प्राप्त हुई। इसी वजह से 18 मई को 30 ज़िलक़ादा माना जाएगा और 19 मई 2026 से माह-ए-ज़िलहिज्जा की शुरुआत होगी। इस हिसाब से 10 ज़िलहिज्जा यानी ईद-उल-अजहा 28 मई को अदा की जाएगी।

बड़ी ईदगाह रानीताल में नमाज़ सुबह 10:30 बजे
शहर की ऐतिहासिक और प्रमुख ईदगाह, बड़ी ईदगाह रानीताल में ईद-उल-अजहा की मुख्य नमाज़ सुबह ठीक 10:30 बजे अदा की जाएगी। वहीं जामिया दारुल इस्लामिया ईदगाह कॉलोनी से जुड़े लोगों के लिए सुबह 10:00 बजे ईदगाह कॉलोनी परिसर में भी नमाज़ की व्यवस्था रहेगी।
उलेमा-ए-किराम ने तमाम नमाज़ियों से वक्त की पाबंदी के साथ ईदगाह पहुंचने, सफाई व्यवस्था का ध्यान रखने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
कुर्बानी का पैगाम: त्याग, सब्र और अल्लाह की रज़ा
ईद-उल-अजहा इस्लाम का वह मुबारक त्योहार है, जो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की कुर्बानी और अल्लाह की राह में फिदा होने की याद दिलाता है। इस दिन मुसलमान नमाज़-ए-ईद अदा करने के बाद सुन्नत के मुताबिक कुर्बानी करते हैं और उसका हिस्सा गरीबों, रिश्तेदारों और जरूरतमंदों तक पहुंचाते हैं।
उलेमा ने कहा कि कुर्बानी सिर्फ जानवर ज़बह करने का नाम नहीं, बल्कि अपनी ख्वाहिशात को अल्लाह की रज़ा के लिए कुर्बान करने का पैगाम भी है। समाज में भाईचारा, मोहब्बत और इंसानियत का जज़्बा कायम रखना भी इस त्योहार की अहम सीख है।
बाजारों में दिखने लगी ईद की रौनक
ईद की तारीख तय होने के बाद शहर के मुस्लिम इलाकों और बाजारों में रौनक बढ़ गई है। गोल बाजार, घमापुर, रानीताल, हनुमानताल और अधारताल क्षेत्रों में कपड़ों, टोपियों, इत्र, सेवइयों और कुर्बानी के जानवरों की खरीदारी शुरू हो गई है। बच्चे और युवा ईद की तैयारियों को लेकर खासे उत्साहित नजर आ रहे हैं।
मुस्लिम समाज के लोगों ने एक-दूसरे को ईद-उल-अजहा की मुबारकबाद पेश करते हुए अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की है।



