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भोपाल में APCR राज्य सम्मेलन: न्याय, संवैधानिक अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा पर उठी मजबूत आवाज़ । प्रशांत भूषण बोले – अदालतों के साथ समाज में भी लड़नी होगी लड़ाई, विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि हुए शामिल

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी में Association for Protection of Civil Rights (APCR) की प्रांतीय इकाई द्वारा राज्य स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें नागरिक अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक चुनौतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। सम्मेलन में राज्य और देश के विभिन्न हिस्सों से वकील, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र, धार्मिक विद्वान और वंचित समुदायों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

लोकतंत्र को लेकर प्रशांत भूषण ने जताई चिंता

सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता Prashant Bhushan ने देश में बढ़ती तानाशाही और फासीवादी प्रवृत्तियों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं और केवल अदालतों में कानूनी लड़ाई लड़ना पर्याप्त नहीं होगा।

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उन्होंने कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आम जनता की सक्रिय भागीदारी भी बेहद जरूरी है। उन्होंने APCR की कानूनी टीमों की सराहना करते हुए कहा कि संगठन लगातार अदालतों में नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहा है।

जबलपुर का प्रतिनिधि मंडल

न्याय की लड़ाई में एकजुटता जरूरी: मुफ्ती मुश्ताक नदवी

कार्यक्रम का एक प्रमुख आकर्षण भोपाल के काज़ी-ए-शहर Mufti Mushtaq Nadvi का संबोधन रहा। उन्होंने कहा कि न्याय प्राप्त करने के लिए समाज को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।

उन्होंने कहा कि न्याय की इस लड़ाई के साथ-साथ देश के लोगों को इस्लाम के वास्तविक स्वरूप और उसके मूल संदेश से परिचित कराना भी आवश्यक है।

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उप काज़ी-ए-शहर Mufti Al Qadar ने भी अपने संबोधन में सामूहिक संघर्ष और सामाजिक एकता की आवश्यकता पर बल दिया।

सरकारों की भूमिका पर APCR महासचिव ने उठाए सवाल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए APCR के महासचिव Malik Moatasim Khan ने कहा कि सरकारों और संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे आम नागरिकों की जमीन, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करें।

उन्होंने कहा कि कमजोर और वंचित वर्गों को न्याय और सुरक्षा प्रदान करना शासन व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

राष्ट्रीय रिपोर्ट में कानूनी संघर्षों का उल्लेख

APCR के राष्ट्रीय सचिव Nadeem Khan ने संगठन की राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए कहा कि अन्याय का शिकार कोई भी व्यक्ति अकेला नहीं है और सामूहिक कानूनी प्रयासों से न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

सम्मेलन में मध्य प्रदेश में APCR द्वारा किए गए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट भी पेश की गई, जिसमें नफरत से जुड़े अपराधों, कथित गलत FIR मामलों, कानूनी सहायता और दस्तावेजीकरण के प्रयासों का उल्लेख किया गया।

अल्पसंख्यकों और वंचित वर्गों के मुद्दे भी उठे

पूर्व सांसद Mohammad Adeeb ने लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए विभिन्न सामाजिक और लोकतांत्रिक ताकतों से एकजुट होने की अपील की।

वहीं पूर्व डीजीपी Wazir Ahmad Ansari ने मध्य प्रदेश में अल्पसंख्यकों और अनुसूचित जाति-जनजाति समुदायों की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कई प्रशासनिक और कानूनी मुद्दों को उठाया।

कानूनी हस्तक्षेपों और कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मान

सम्मेलन में वरिष्ठ अधिवक्ता Rekha Srivastava ने संगठन के कार्यों की सराहना की, जबकि खंडवा के काज़ी Ashfaq Ali ने टिटगांव मामले में APCR के कानूनी हस्तक्षेप का उल्लेख करते हुए राहत कार्यों की जानकारी दी।

कार्यक्रम की शुरुआत स्थानीय युवा वकीलों और कवियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई। स्वागत भाषण जावेद अख्तर ने दिया जबकि मंच संचालन अधिवक्ता फव्वाज शाहीन ने किया।

कार्यक्रम के समापन पर APCR मध्य प्रदेश की विभिन्न टीमों, वकीलों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने संविधान, लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की रक्षा के लिए विभिन्न समुदायों और संगठनों के बीच मजबूत एकजुटता की आवश्यकता पर जोर दिया।

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बाज़ मीडिया जबलपुर डेस्क 'जबलपुर बाज़' आपको जबलपुर से जुडी हर ज़रूरी खबर पहुँचाने के लिए समर्पित है.
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