Zee News पर 2 लाख का जुर्माना, AMU प्रोटेस्ट की भड़काऊ रिपोर्टिंग पर NBDSA का एक्शन

नई दिल्ली | BAZ News Network (BNN) । मीडिया एथिक्स का एक और बड़ा केस सामने आया। न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने Zee News पर 2 लाख रुपये का जुर्माना ठोका है। आरोप है कि चैनल ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के एक स्टूडेंट प्रोटेस्ट की भड़काऊ कवरेज की।
News in Short
- NBDSA ने Zee News पर AMU प्रोटेस्ट की गलत रिपोर्टिंग पर 2 लाख का जुर्माना लगाया
- चैनल ने फीस बढ़ोतरी के खिलाफ प्रोटेस्ट को सिर्फ फिलिस्तीन मुद्दे तक सीमित करके दिखाया
- भड़काऊ भाषा इस्तेमाल की गई, जो क्रिमिनल एक्शन की वकालत करती नजर आई
- SIO के तलहा मन्नान की शिकायत पर ऑर्डर आया, चैनल को कंटेंट हटाने का निर्देश
- SIO ने कहा — फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाना कोई जुर्म नहीं
Zee News की रिपोर्टिंग में क्या था गलत
NBDSA ने अपने ऑर्डर में साफ किया कि AMU का प्रोटेस्ट कई मुद्दों को लेकर था, जिसमें फीस बढ़ोतरी का विरोध मुख्य था। लेकिन Zee News ने सिर्फ फिलिस्तीन से जुड़े नारों पर फोकस किया। ऐसा करके चैनल ने यह इंप्रेशन दिया कि पूरा प्रोटेस्ट ही फिलिस्तीन के मुद्दे पर केंद्रित था।
अथॉरिटी ने पाया कि चैनल की भाषा भड़काऊ थी। इसमें न्यूट्रल रिपोर्टिंग के बजाय ऐसे शब्द थे जो क्रिमिनल एक्शन की वकालत करते नजर आए। प्रोटेस्ट में उठे फिलिस्तीन समर्थन के नारों को क्रिमिनैलिटी और एक्सट्रीमिज्म से जोड़ दिया गया। साथ ही कवरेज को कम्युनल और भड़काऊ कैरेक्टर दिया गया।
शिकायत किसने की और क्या आरोप थे
यह शिकायत स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया के नेशनल सेक्रेटरी तलहा मन्नान ने दायर की थी। उनके साथ 8-10 अनजान स्टूडेंट्स के खिलाफ पिछले साल हिंदू रक्षा दल के जिला अध्यक्ष ने शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि स्टूडेंट प्रोटेस्ट के दौरान प्रो-पैलेस्टाइन नारे लगाए गए।
SIO ने NBDSA के सामने दलील दी कि Zee News ने जानबूझकर प्रोटेस्ट के असली मकसद को छिपाया। फीस बढ़ोतरी जैसे मुद्दे को साइड में रखकर सिर्फ फिलिस्तीन समर्थन वाले नारों को हाइलाइट किया गया। इससे एक गलत नैरेटिव बनाया गया कि मुस्लिम स्टूडेंट्स की देशभक्ति संदिग्ध है।
NBDSA का आदेश और Zee News पर पाबंदी
NBDSA ने Zee News को निर्देश दिया कि वह विवादित फुटेज को अपनी वेबसाइट और यूट्यूब से हटाए। सभी संबंधित हाइपरलिंक्स और एक्सेस भी बंद करने होंगे। चैनल को सात दिन के अंदर कंप्लायंस की पुष्टि करनी होगी। साथ ही 2 लाख रुपये का जुर्माना भी चुकाना होगा।
यह ऑर्डर Zee News जैसे बड़े चैनल के लिए एक सख्त चेतावनी है। NBDSA ने माना कि ब्रॉडकास्टर ने जिम्मेदार पत्रकारिता के मानकों का उल्लंघन किया। न्यूट्रल रिपोर्टिंग की जगह प्रोपेगेंडा को बढ़ावा दिया गया।
SIO ने क्या कहा ऑर्डर पर
SIO ऑफ इंडिया ने इस ऑर्डर का स्वागत किया। संगठन ने कहा कि यह जिम्मेदार पत्रकारिता, सही कॉन्टेक्स्ट में रिपोर्टिंग और डेमोक्रेटिक एक्सप्रेशन की जीत है। “प्रोपेगेंडा सच को तबाह नहीं कर सकता। फिलिस्तीन के समर्थन में नारे लगाना कोई जुर्म नहीं है,” संगठन ने कहा।
SIO ने जोर देकर कहा कि फिलिस्तीनियों के साथ शांतिपूर्ण एकजुटता को सनसनीखेज, कम्युनल या भड़काऊ तरीके से पेश नहीं किया जाना चाहिए। इसे क्रिमिनैलिटी या एक्सट्रीमिज्म से जोड़ने की कोशिश गलत है। “यह सिर्फ एक शख्स की जीत नहीं है। यह उस सिद्धांत की जीत है कि असहमति को क्रिमिनल नहीं बनाया जा सकता, और मजलूम लोगों के साथ एकजुटता को आसानी से एक्सट्रीमिज्म नहीं कहा जा सकता,” SIO ने अपने बयान में कहा।
यह फैसला मीडिया एथिक्स की दिशा में एक अहम कदम है। NBDSA ने साफ संदेश दिया कि न्यूज़ चैनल्स कम्युनल एंगल से न्यूज़ को तोड़-मरोड़कर पेश नहीं कर सकते। सही कॉन्टेक्स्ट और न्यूट्रल रिपोर्टिंग जरूरी है।
📌 Sources & References
- Maktoob Media
- NBDSA Order



