संभल: बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद पर गैरकानूनी तामीर का इल्जाम

संभल | BAZ News Network (BNN) । यूपी के संभल में एक और मस्जिद विवाद में फंस गई। बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद पर गैरकानूनी तामीर और ASI संरक्षित जमीन पर कब्जे का इल्जाम लगा है। हिंदू संगठन के नेता और वकील सुभाष चंद्र त्यागी ने DM को शिकायत दी, जिसके बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी।
News in Short
- श्री कल्की सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाष चंद्र त्यागी ने DM अंकित खंडेलवाल को शिकायत सौंपी
- आरोप है कि ASI संरक्षित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद की इमारत को किले की तरह बदला गया
- DM ने मामले की जांच SDM को सौंपी, अनधिकृत निर्माण की पुष्टि होगी
- मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि यह वक्फ संपत्ति है, दस्तावेज मौजूद हैं
- स्थानीय मुस्लिम निवासियों ने इल्जामों को राजनीतिक करार दिया
शिकायत में क्या है संभल मस्जिद विवाद
चौधरी सराय चौकी इलाके में स्थित बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद पर सुभाष चंद्र त्यागी ने गंभीर इल्जाम लगाए हैं। उनका दावा है कि मस्जिद ASI की संरक्षित संपत्ति है, लेकिन इसकी इमारत में बदलाव किए गए। त्यागी ने आरोप लगाया कि मस्जिद को किले जैसी शक्ल दी गई है, जहां से हथियार चलाए जा सकें।
त्यागी ने कहा, “यह ASI की संरक्षित संपत्ति है। इसके बावजूद इसकी संरचना बदली गई। इसे किले की तरह बनाया गया है ताकि दंगे की स्थिति में यहां से हथियार चलाए जा सकें।” उन्होंने यह भी दावा किया कि CAA विरोध और सांप्रदायिक तनाव के दौरान यहां लोग इकट्ठा हुए थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
DM ने जांच के आदेश दिए
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने मामले को गंभीरता से लिया और SDM को जांच सौंप दी। उन्होंने कहा कि कब्रिस्तान के पास दो जमीनें जामा मस्जिद के नाम रजिस्टर्ड हैं, जबकि मस्जिद खुद ASI की संरक्षित इमारत है। प्रशासन अब यह जांच करेगा कि क्या बिना अनुमति कोई निर्माण या कब्जा हुआ है।
खंडेलवाल ने साफ किया कि बिना जांच के कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। वह यह भी देखेंगे कि क्या मस्जिद की संरचना में बिना ASI की मंजूरी बदलाव किया गया। जांच पूरी होने के बाद ही नतीजा आएगा।
मस्जिद प्रबंधन और स्थानीय मुसलमानों का पक्ष
मस्जिद के मुतवल्ली ने अभी तक शिकायत पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। त्यागी के मुताबिक, मुतवल्ली का कहना है कि यह वक्फ संपत्ति है और सैयद बाबा बहाउद्दीन शाह से जुड़ी जमीन पर खड़ी है। इसके समर्थन में दस्तावेज मौजूद हैं।
स्थानीय मुस्लिम निवासियों ने बताया कि मस्जिद सैकड़ों साल पुरानी है। मौजूदा इमारत लगभग 15-20 साल पहले फिर से बनाई गई थी क्योंकि पुरानी इमारत कमजोर हो गई थी। उन्होंने इल्जामों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यह राजनीतिक मकसद से उठाए जा रहे हैं।
हिंदू निवासियों की मांग
कुछ हिंदू निवासियों का कहना है कि अगर मस्जिद वक्फ संपत्ति भी है, तो भी वह ASI नियमों के तहत संरक्षित हो सकती है। उनका तर्क है कि किसी भी संरक्षित स्मारक की मरम्मत, बदलाव या पुनर्निर्माण ASI के नियमों और अनुमति के मुताबिक होना चाहिए।
संभल में माहौल पहले से ही संवेदनशील है। शाही जामा मस्जिद विवाद के बाद अब बाबा बहाउद्दीन शाह मस्जिद पर यह नया विवाद सामने आया है। प्रशासन की जांच से ही साफ होगा कि गैरकानूनी निर्माण या कब्जा हुआ है या नहीं।
📌 Sources & References
- The Observer Post
- District Administration Sambhal



