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UP में मस्जिदों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष का आरोप, चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की साजिश

लखनऊ | BAZ News Network (BNN) । उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से महज पांच महीने पहले मस्जिदों और मुस्लिम धार्मिक ढांचों पर कार्रवाई का सिलसिला तेज़ हो गया है। सहारनपुर में 119 साल पुरानी मस्जिद की तोड़फोड़ और मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद को नोटिस के बाद विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि यह चुनावी ध्रुवीकरण की साज़िश है।

News in Short

  • सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में 5 सितंबर को 119 साल पुरानी मस्जिद तोड़ी गई
  • मुरादाबाद की मुस्तफा मस्जिद को अवैध निर्माण का नोटिस मिला
  • सपा सांसद अफजाल अंसारी ने इसे चुनावी ध्रुवीकरण बताया
  • कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सिर्फ मुस्लिम ढांचों को निशाना बनाया जा रहा
  • मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस दायर किया

विपक्ष का आरोप: उत्तर प्रदेश मस्जिद विवाद में चुनावी मंशा

समाजवादी पार्टी के गाजीपुर सांसद अफजाल अंसारी ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अगले पांच महीनों में ऐसे धार्मिक ढांचों पर कार्रवाई और तेज़ कर सकती है। उन्होंने कहा, “एनक्रोचमेंट हटाने के नाम पर मुस्लिम समाज से जुड़े ढांचों पर हमले बढ़ाए जा रहे हैं।” अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट से इस “मंशापूर्ण अभियान” पर संज्ञान लेने की अपील की।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने कहा कि प्रदेश सरकार “रोज़मर्रा के सांप्रदायिकरण” की नीति पर चल रही है। उन्होंने तर्क दिया कि कई धार्मिक स्थल 100 साल से ज़्यादा पुराने हैं, जब यूपी में आधुनिक निर्माण नियम नहीं थे। “अगर नए नियमों की कसौटी लगाएं तो दूसरे समुदायों के ढांचे भी फेल होंगे, लेकिन सिर्फ मुस्लिम समुदाय से जुड़े ढांचों को निशाना बनाया जा रहा है।”

सांभल सांसद ने सरकार की प्राथमिकताओं पर उठाए सवाल

सपा के सांभल सांसद ज़िया उर रहमान बर्क ने यूपी सरकार पर आरोप लगाया कि उसका “वन प्वाइंट प्रोग्राम” सिर्फ मस्जिदें, मदरसे और कब्रिस्तान हैं। उन्होंने सहारनपुर में तोड़फोड़ की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार महंगाई, बेरोज़गारी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर रही है।

बर्क ने दावा किया कि सहारनपुर की मस्जिद 119 साल पुरानी थी और उसके पास दस्तावेज़ मौजूद थे। उन्होंने सांभल और मुरादाबाद में जारी नोटिसों को भी गलत बताया।

कानूनी लड़ाई: हाईकोर्ट में चुनौती

सहारनपुर मस्जिद की तोड़फोड़ के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस दायर किया है। कमेटी का आरोप है कि बिना क़ानूनी नोटिस या औपचारिक आदेश के ढांचा गिरा दिया गया। उन्होंने प्लेसेज़ ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 का हवाला भी दिया है।

प्रशासन का कहना है कि पूरी कानूनी प्रक्रिया फॉलो की गई। अधिकारियों के मुताबिक ज़िला अदालत ने मजिस्ट्रेट के उस आदेश को बरक़रार रखा था जिसमें यह ढांचा अवैध और सरकारी ज़मीन पर बताया गया था।

तोड़फोड़ के बाद आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने मलबे के नीचे मिली करीब 20 फीट गहरी ईंटों वाली बावड़ी से सैंपल लिए।

विपक्षी दलों ने आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे को और गरमाने की आशंका जताई है। मस्जिद कमेटी की कानूनी लड़ाई जारी है, जबकि प्रशासन अपने फैसले पर अडिग है।

📌 Sources & References

  • The Observer Post
  • समाचार एजेंसियां

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